CDS परीक्षा: आधुनिक भारत एवं स्वतंत्रता आंदोलन — सम्पूर्ण अध्ययन सामग्री

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अवधारणा

आधुनिक भारत का इतिहास मोटे तौर पर 1757 के प्लासी युद्ध से शुरू होकर 1947 की स्वतंत्रता तक फैला है। यह काल दो समानांतर धाराओं की कहानी है — एक तरफ ब्रिटिश साम्राज्य का विस्तार और शोषण, दूसरी तरफ भारतीय प्रतिरोध और राष्ट्रीय चेतना का उदय।

एक सरल analogy से समझो: जैसे एक नदी पर बाँध बनाया जाए — पानी रोका जाएगा, लेकिन दबाव बढ़ता जाएगा। जब दबाव चरम पर पहुँचे, तो बाँध टूट जाता है। ब्रिटिश शासन ने जितना दमन किया, भारतीय राष्ट्रवाद उतना ही सशक्त होता गया। 1857 का विद्रोह पहला बड़ा विस्फोट था, और 1947 की स्वतंत्रता उस प्रक्रिया की अंतिम परिणति।

CDS परीक्षा में यह अध्याय बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रश्न तथ्य-आधारित होते हैं — कौन सा अधिनियम कब आया, किस आंदोलन का कारण क्या था, किस समझौते में क्या तय हुआ। रटने से काम नहीं चलेगा; timeline और कारण-परिणाम की समझ ज़रूरी है।

इस अध्याय को तीन बड़े खंडों में बाँटकर देखो:

  1. ब्रिटिश नीतियाँ और प्रारंभिक प्रतिरोध (1757–1885)
  2. संगठित राष्ट्रवाद का उदय (1885–1920)
  3. गांधीवादी युग और स्वतंत्रता (1920–1947)

गहन विश्लेषण

खंड 1: ब्रिटिश नीतियाँ और प्रारंभिक प्रतिरोध (1757–1885)

1857 से पहले की ब्रिटिश नीतियाँ:

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में व्यापार से शुरुआत की, लेकिन धीरे-धीरे राजनीतिक सत्ता हथियाती गई। "व्यपगत सिद्धांत" (Doctrine of Lapse) — लॉर्ड डलहौज़ी की नीति जिसके तहत उत्तराधिकारी-विहीन रियासतें ब्रिटिश क्षेत्र में मिला ली जाती थीं — ने देशी राजाओं में भारी असंतोष पैदा किया। यही एक प्रमुख कारण बना 1857 के विद्रोह का।

1857 का विद्रोह: इसे "सिपाही विद्रोह" कहना अधूरा है। यह सिपाहियों, किसानों और राजाओं का सम्मिलित विद्रोह था। परिणाम: 1858 में कंपनी शासन समाप्त हुआ, भारत सीधे ब्रिटिश Crown के अधीन आया।

वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट (1878): लॉर्ड लिटन ने भारतीय भाषाओं के अखबारों पर नकेल कसने के लिए यह कानून बनाया। इसका विरोध इतना तीव्र था कि 1882 में लॉर्ड रिपन को इसे वापस लेना पड़ा। यह घटना CDS में बार-बार पूछी जाती है — तारीख और दोनों गवर्नर-जनरल के नाम याद रखो।

खंड 2: संगठित राष्ट्रवाद का उदय (1885–1920)

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (1885): A.O. Hume ने स्थापना की। प्रारंभिक दशकों में नरमपंथी नेतृत्व — दादाभाई नौरोज़ी, गोपाल कृष्ण गोखले — जो petition और constitutional methods पर विश्वास रखते थे।

1907 का सूरत विभाजन: नरमपंथी बनाम गरमपंथी — यह मतभेद विधि को लेकर था, लक्ष्य को लेकर नहीं। बाल गंगाधर तिलक "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है" का नारा देते थे और जनांदोलन में विश्वास रखते थे। गोखले समझौते और धीरे-धीरे सुधारों में।

1916 का लखनऊ पैक्ट: यह CDS का favourite प्रश्न है। कांग्रेस और मुस्लिम लीग एक साथ आए, स्वशासन की माँग की, और मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र पर सहमति बनी। तिलक-जिन्ना की यह joint effort एक ऐतिहासिक क्षण था।

खिलाफत आंदोलन (1919–1924): प्रथम विश्व युद्ध के बाद मित्र शक्तियों ने ऑटोमन साम्राज्य को तोड़ दिया। तुर्की के सुल्तान इस्लामी दुनिया के खलीफा माने जाते थे। भारतीय मुसलमानों ने इसे धर्म पर आघात माना। गांधी जी ने इस आंदोलन का समर्थन करके हिंदू-मुस्लिम एकता बनाने की कोशिश की।

खंड 3: गांधीवादी युग और स्वतंत्रता (1920–1947)

असहयोग आंदोलन (1920–1922): पहला mass movement। सरकारी स्कूल, अदालतें, विदेशी वस्त्र छोड़ने का आह्वान। चौरी-चौरा (1922) की हिंसक घटना के बाद गांधी जी ने आंदोलन वापस लिया।

साइमन कमीशन (1927): सात सदस्यीय commission में एक भी भारतीय नहीं था। यही मुख्य कारण बना बहिष्कार का। "साइमन वापस जाओ" के नारे के साथ लाला लाजपत राय पर लाठीचार्ज हुआ।

पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव (1929): लाहौर अधिवेशन में नेहरू की अध्यक्षता में। 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस घोषित हुआ — इसीलिए 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस चुना गया।

सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930–1934): दांडी मार्च (12 मार्च – 6 अप्रैल 1930) से शुरुआत। नमक कानून तोड़ा गया। गांधी-इरविन समझौता (1931), फिर गोलमेज सम्मेलन।

भारत छोड़ो आंदोलन (1942): 8 अगस्त 1942, बंबई। "करो या मरो" नारा। ब्रिटिश सरकार ने तुरंत पूरे कांग्रेस नेतृत्व को गिरफ्तार कर लिया। यह सबसे तीव्र आंदोलन था।

1947 की स्वतंत्रता और विभाजन: माउंटबेटन योजना के तहत भारत और पाकिस्तान दो अलग dominions बने। लॉर्ड माउंटबेटन स्वतंत्र भारत के पहले Governor-General बने, उनके बाद C. राजगोपालाचारी।


शॉर्टकट और युक्तियाँ

patternतीन आंदोलनों की तारीख — ACQ Formula

तीन बड़े गांधीवादी आंदोलन याद करने का तरीका: A-C-Q — Asahyog (1920), Civil Disobedience (1930), Quit India (1942)। तारीखों में pattern देखो: 1920 → 1930 → 1942, यानी 10 साल का अंतर (पहले दो में), फिर 12 साल। नारे: "असहयोग = कोई नारा नहीं", "सविनय = कोई अफसोस नहीं", "QIM = करो या मरो"। Standard method: timeline रटना (60 सेकंड प्रति event) vs. यह pattern (10 सेकंड में तीनों तारीखें और नारे याद)।

patternगवर्नर-जनरल जोड़ी — ACT-UNDO

जब भी कोई कानून पास हो और रद्द हो — दोनों Governor-General अलग हों, तो "ACT-UNDO" pattern याद करो। वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट: Liton ने Lागू किया (1878), Ripon ने Rद्द किया (1882)। Trick: "L और R — एक ने बनाया, दूसरे ने तोड़ा, alphabetical order में L पहले, R बाद।" 4 facts (दोनों नाम + दोनों साल) को 1 sentence में: "Liton 1878, Ripon 1882 — बनाया-तोड़ा।" Standard method: 4 अलग entries याद करना (40 सेकंड) vs. यह जोड़ी (8 सेकंड)।

pattern1907 सूरत विभाजन — GOL बनाम TIL

नरमपंथी = GOkhale और Lajpat Rai (प्रारंभिक) — GOL। गरमपंथी = TILak, Lajpat Rai, Bipin Chandra Pal — "Lal-Bal-Pal" trio। "Lal-Bal-Pal" — तीन शब्द, तीन नेता: Lajpat Rai, Bal Gangadhar Tilak, Bipin Chandra Pal। जब भी "गरमपंथी" दिखे, "Lal-Bal-Pal" automatically आना चाहिए। Step count: 0 extra recall steps।

pattern1916 पैक्ट — 'लखनऊ में लीग-कांग्रेस मिले'

लखनऊ पैक्ट के चार key facts: वर्ष (1916), जगह (लखनऊ), parties (Congress + Muslim League), मुद्दा (separate electorate)। Sentence: "1916 में लखनऊ में League और Congress ने मिलकर separate electorate माना।" इसे एक बार बोलो — चारों facts lock हो जाते हैं। Distractor options में "Hindu-Muslim" या "British-Congress" आता है — पर answer हमेशा Congress-League है। Standard method: 4 facts अलग-अलग याद करना (30 सेकंड) vs. एक sentence (5 सेकंड)।

patternपहले Governor-General का क्रम — M-R-P

स्वतंत्र भारत के Governor-Generals का क्रम: Mountbatten → Rajagopalachari → (Republic, इसलिए President Prasad)। "M-R-P" — Mountbatten, Rajaji, President। Mountbatten = पहला, Rajaji = पहला और अंतिम भारतीय GG। CDS में distractor: "Rajendra Prasad" को GG बताना — वो President बने, GG नहीं। यह trick 2 options तुरंत eliminate करती है — elimination में 15 सेकंड बचते हैं।


तेज़-समाधान रूपरेखा

CDS के इस अध्याय में प्रश्न तीन प्रकार के होते हैं:

प्रकार 1 — तारीख/वर्ष आधारित: देखो कि event कौन सा है → उसकी decade याद करो → फिर exact year। गांधी आंदोलन 1920-1930-1942 के ढाँचे में fit करो।

प्रकार 2 — कारण/परिणाम आधारित: प्रश्न में "क्यों", "किसके विरोध में", "किस कारण" जैसे शब्द हों → options में सबसे direct और proximate cause चुनो। दूर का कारण नहीं, तात्कालिक कारण। उदाहरण: खिलाफत आंदोलन — ऑटोमन साम्राज्य का विघटन (तात्कालिक), न कि "ब्रिटिश नीतियाँ" (दूरस्थ)।

प्रकार 3 — व्यक्तित्व/संगठन आधारित: "पहला", "अंतिम", "किसकी अध्यक्षता में" — इन शब्दों पर ध्यान दो। Options में एक-दो नाम chronologically गलत होंगे। उन्हें eliminate करो।

सार्वभौमिक नियम: जब दो options सही लगें, तो अधिक specific answer चुनो। "ब्रिटिश नीतियाँ" जैसे broad options CDS में शायद ही correct होते हैं।


हल किए गए PYQs

क्यों यह प्रश्न: खिलाफत आंदोलन का कारण CDS में बार-बार पूछा जाता है क्योंकि यह हिंदू-मुस्लिम एकता और गांधी की रणनीति दोनों को समझने की कसौटी है। Distractor options में "जलियांवाला बाग" डाला जाता है — वो घटना उसी दौर की है, पर कारण नहीं।

समाधान का रास्ता: "विरोध में शुरू किया गया" — यानी तात्कालिक कारण खोजना है। ऑटोमन साम्राज्य का विघटन = इस्लामी खलीफा की सत्ता का अंत = भारतीय मुसलमानों में क्रोध। यह सीधा कारण-परिणाम है। बंगाल विभाजन और जलियांवाला बाग अलग events हैं।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
The Khilafat Movement in India was launched to protest against:
भारत में खिलाफत आंदोलन किसके विरोध में शुरू किया गया था?
  1. Partition of Bengal
  2. Dismemberment of the Ottoman Empire
  3. Jallianwala Bagh Massacre
  4. Simon Commission
  1. बंगाल का विभाजन
  2. ऑटोमन साम्राज्य का विघटन
  3. जलियांवाला बाग हत्याकांड
  4. साइमन कमीशन
Solutionसमाधान
The Khilafat Movement (1919-1924) was launched by Indian Muslims to protest against the dismemberment of the Ottoman Empire and the harsh treatment of the Turkish Sultan (Khalifa) by the Allied Powers after World War I. Gandhi supported this movement to achieve Hindu-Muslim unity.
खिलाफत आंदोलन (1919-1924) भारतीय मुसलमानों द्वारा ऑटोमन साम्राज्य के विभाजन और प्रथम विश्व युद्ध के बाद मित्र शक्तियों द्वारा तुर्की सुल्तान (खलीफा) के साथ किए गए कठोर व्यवहार के विरोध में शुरू किया गया था। गांधी जी ने हिंदू-मुस्लिम एकता प्राप्त करने के लिए इस आंदोलन का समर्थन किया था।

क्यों यह प्रश्न: वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट प्रश्न में चार options चारों अलग-अलग combinations देते हैं — यह classic CDS trap है। लिटन ने बनाया, रिपन ने रद्द किया — दोनों नाम और दोनों तारीखें एक साथ याद करनी होंगी।

समाधान का रास्ता: "L-1878, R-1882" — Liton और Ripon, alphabetical order में L पहले। Options में "1876" और "1879" distractors हैं — याद रखो 1878 ही सही है। रद्द करने वाला हमेशा रिपन है।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
The Vernacular Press Act was enacted in which year and was repealed by which Governor-General?
वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट किस वर्ष पारित हुआ था और इसे किस गवर्नर-जनरल ने रद्द किया था?
  1. 1878, Lord Ripon
  2. 1876, Lord Lytton
  3. 1879, Lord Ripon
  4. 1878, Lord Curzon
  1. 1878, लॉर्ड रिपन
  2. 1876, लॉर्ड लिटन
  3. 1879, लॉर्ड रिपन
  4. 1878, लॉर्ड कर्जन
Solutionसमाधान
The Vernacular Press Act was enacted in 1878 by Lord Lytton and was repealed in 1882 by Lord Ripon. This Act imposed restrictions on the vernacular press and was highly unpopular among Indians. Lord Ripon's repeal of this act was one of his liberal measures.
वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट 1878 में लॉर्ड लिटन द्वारा लागू किया गया था और 1882 में लॉर्ड रिपन द्वारा रद्द कर दिया गया था। इस एक्ट ने देशी भाषा की प्रेस पर प्रतिबंध लगाए थे और यह भारतीयों में बहुत अलोकप्रिय था। इस एक्ट का रद्द करना लॉर्ड रिपन के उदारवादी उपायों में से एक था।

क्यों यह प्रश्न: साइमन कमीशन बहिष्कार का कारण CDS में frequently पूछा जाता है। Distractor "मुस्लिम लीग की माँगों का समर्थन" डाला जाता है — यह historically गलत है।

समाधान का रास्ता: "मुख्य रूप से" शब्द पर ध्यान दो। Commission में कोई भारतीय सदस्य नहीं था — यही सबसे प्रमुख और immediate कारण था। अन्य options या तो गलत हैं या बाद की घटनाएँ हैं।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
The Simon Commission was boycotted by Indians primarily because:
साइमन कमीशन का भारतीयों ने मुख्य रूप से बहिष्कार क्यों किया था?
  1. It recommended partition of India
  2. It had no Indian members
  3. It supported Muslim League demands
  4. It proposed federal structure
  1. इसने भारत के विभाजन की सिफारिश की थी
  2. इसमें कोई भी भारतीय सदस्य नहीं था
  3. इसने मुस्लिम लीग की माँगों का समर्थन किया था
  4. इसने संघीय ढाँचे का प्रस्ताव रखा था
Solutionसमाधान
The Simon Commission, appointed in 1927, was boycotted by Indians primarily because it had no Indian members. The seven-member commission was entirely composed of British MPs, which was seen as an insult to Indian political aspirations. The famous slogan 'Simon Go Back' was raised during protests.
1927 में नियुक्त साइमन कमीशन का भारतीयों द्वारा बहिष्कार मुख्यतः इसलिए किया गया क्योंकि इसमें कोई भारतीय सदस्य नहीं था। सात सदस्यीय कमीशन पूर्णतः ब्रिटिश सांसदों से बना था, जिसे भारतीय राजनीतिक आकांक्षाओं का अपमान माना गया। विरोध प्रदर्शनों के दौरान 'साइमन वापस जाओ' का प्रसिद्ध नारा लगाया गया।

क्यों यह प्रश्न: भारत छोड़ो आंदोलन की तारीख — 8 अगस्त vs 9 अगस्त — यह सबसे common confusion है। 8 अगस्त को resolution पास हुआ, 9 अगस्त को गिरफ्तारियाँ हुईं। CDS में 8 अगस्त ही correct answer है।

समाधान का रास्ता: "शुरू किया" = resolution/announcement की तारीख = 8 अगस्त। 9 अगस्त को "Quit India Day" भी कहते हैं पर आंदोलन की शुरुआत 8 तारीख को AICC session में हुई।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
The Quit India Movement was launched by Mahatma Gandhi on:
भारत छोड़ो आंदोलन महात्मा गांधी ने किस तारीख को शुरू किया था?
  1. August 8, 1942
  2. August 9, 1942
  3. July 8, 1942
  4. September 8, 1942
  1. 8 अगस्त, 1942
  2. 9 अगस्त, 1942
  3. 8 जुलाई, 1942
  4. 8 सितंबर, 1942
Solutionसमाधान
The Quit India Movement was launched by Mahatma Gandhi on August 8, 1942, at the All India Congress Committee session in Bombay. Gandhi gave the famous call 'Do or Die' and asked the British to quit India immediately. The movement was also known as the August Movement.
महात्मा गांधी ने 8 अगस्त 1942 को बंबई में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अधिवेशन में भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की थी। गांधी जी ने प्रसिद्ध नारा 'करो या मरो' दिया और अंग्रेजों से तुरंत भारत छोड़ने को कहा। इस आंदोलन को अगस्त आंदोलन के नाम से भी जाना जाता है।

क्यों यह प्रश्न: 1907 सूरत विभाजन CDS में प्रायः "किन दो गुटों के बीच" के रूप में पूछा जाता है। "होम रूलर और स्वराजिस्ट" जैसे distractors बाद के दौर से हैं।

समाधान का रास्ता: 1907 में Congress में दो ही प्रमुख धाराएँ थीं — नरमपंथी (Moderates) और गरमपंथी (Extremists)। Hindu-Muslim विभाजन 1907 में Congress का internal issue नहीं था।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
The Indian National Congress session of 1907 at Surat witnessed a split between:
1907 में सूरत में हुए इंडियन नेशनल कांग्रेस के अधिवेशन में किन दो गुटों के बीच फूट पड़ी थी?
  1. Moderates and Extremists
  2. Hindus and Muslims
  3. Home Rulers and Swarajists
  4. Gandhians and Socialists
  1. नरमपंथी और गरमपंथी
  2. हिंदू और मुसलमान
  3. होम रूलर और स्वराजिस्ट
  4. गांधीवादी और समाजवादी
Solutionसमाधान
The Surat session of the Indian National Congress in 1907 witnessed a major split between the Moderates (led by leaders like Gopal Krishna Gokhale) and the Extremists (led by leaders like Bal Gangadhar Tilak). The split was primarily over the methods of struggle against British rule.
1907 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सूरत अधिवेशन में नरमपंथियों (गोपाल कृष्ण गोखले जैसे नेताओं के नेतृत्व में) और गरमपंथियों (बाल गंगाधर तिलक जैसे नेताओं के नेतृत्व में) के बीच एक बड़ा विभाजन हुआ था। यह विभाजन मुख्यतः ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष की पद्धतियों को लेकर था।

क्यों यह प्रश्न: लखनऊ पैक्ट (1916) में parties की पहचान critical है। "ब्रिटिश सरकार और कांग्रेस" एक लोकप्रिय लेकिन गलत option है।

समाधान का रास्ता: "पैक्ट" या "समझौता" शब्द दिखे और 1916 हो — answer हमेशा Congress और Muslim League। यह दोनों भारतीय संगठनों के बीच था, ब्रिटिश सरकार इसमें party नहीं थी।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
The Lucknow Pact of 1916 was an agreement between:
1916 का लखनऊ समझौता किन दो के बीच हुआ था?
  1. Indian National Congress and Muslim League
  2. British Government and Indian National Congress
  3. Moderates and Extremists of Congress
  4. Hindu Mahasabha and Muslim League
  1. इंडियन नेशनल कांग्रेस और मुस्लिम लीग
  2. ब्रिटिश सरकार और इंडियन नेशनल कांग्रेस
  3. कांग्रेस के नरमपंथी और गरमपंथी
  4. हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग
Solutionसमाधान
The Lucknow Pact of 1916 was a historic agreement between the Indian National Congress and the All India Muslim League. Both organizations came together to demand self-government and agreed on the system of separate electorates for Muslims, marking a phase of Hindu-Muslim unity in the freedom struggle.
1916 का लखनऊ पैक्ट भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और अखिल भारतीय मुस्लिम लीग के बीच एक ऐतिहासिक समझौता था। दोनों संगठन स्वशासन की मांग के लिए एक साथ आए और मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र की व्यवस्था पर सहमत हुए, जो स्वतंत्रता संग्राम में हिंदू-मुस्लिम एकता के चरण को दर्शाता था।

क्यों यह प्रश्न: पहले Governor-General का प्रश्न इसलिए tricky है क्योंकि "स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय GG" और "स्वतंत्र भारत के पहले GG" दो अलग-अलग प्रश्न हैं। Rajagopalachari पहले भारतीय GG थे, Mountbatten पहले GG।

समाधान का रास्ता: प्रश्न में "पहले" है, "पहले भारतीय" नहीं — तो Mountbatten। Rajendra Prasad राष्ट्रपति बने, GG नहीं। Nehru PM बने।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
Who was the first Governor-General of independent India?
स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल कौन थे?
  1. Lord Mountbatten
  2. C. Rajagopalachari
  3. Dr. Rajendra Prasad
  4. Jawaharlal Nehru
  1. लॉर्ड माउंटबेटन
  2. सी. राजगोपालाचारी
  3. डॉ. राजेंद्र प्रसाद
  4. जवाहरलाल नेहरू
Solutionसमाधान
Lord Mountbatten was the first Governor-General of independent India, serving from August 15, 1947 to June 21, 1948. He was succeeded by C. Rajagopalachari, who became the first and last Indian Governor-General of India before the country became a republic in 1950.
लॉर्ड माउंटबेटन स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल थे, जिन्होंने 15 अगस्त 1947 से 21 जून 1948 तक सेवा की। उनके बाद सी. राजगोपालाचारी आए, जो 1950 में देश के गणतंत्र बनने से पहले भारत के पहले और अंतिम भारतीय गवर्नर-जनरल बने।

क्यों यह प्रश्न: "पूर्ण स्वराज" का प्रस्ताव — 1928 कलकत्ता और 1929 लाहौर दोनों options आते हैं। 1928 में "Dominion Status" की माँग हुई थी, पूर्ण स्वतंत्रता की नहीं।

समाधान का रास्ता: 1928 कलकत्ता = Nehru Report (Dominion Status)। 1929 लाहौर = पूर्ण स्वराज। दोनों को confuse मत करो। अध्यक्ष: नेहरू (1929 लाहौर में)।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
The Indian National Congress adopted the resolution of 'Purna Swaraj' (Complete Independence) at its session held at:
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 'पूर्ण स्वराज' (पूर्ण स्वतंत्रता) का प्रस्ताव किस अधिवेशन में पारित किया था?
  1. Calcutta in 1928
  2. Lahore in 1929
  3. Karachi in 1931
  4. Bombay in 1932
  1. 1928 में कलकत्ता में
  2. 1929 में लाहौर में
  3. 1931 में कराची में
  4. 1932 में बॉम्बे में
Solutionसमाधान
The historic Lahore session of the Indian National Congress in December 1929, presided over by Jawaharlal Nehru, adopted the resolution of 'Purna Swaraj' or Complete Independence. January 26, 1930 was declared as Independence Day, which is why we celebrate Republic Day on this date.
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने दिसंबर 1929 में लाहौर अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में 'पूर्ण स्वराज' का प्रस्ताव पारित किया था। 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस घोषित किया गया, इसीलिए हम इस दिन गणतंत्र दिवस मनाते हैं।

आम गलतियाँ


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