भारत की शासन-व्यवस्था तीन स्तंभों पर टिकी है — विधायिका (संसद), कार्यपालिका (सरकार) और न्यायपालिका (न्यायालय)। इन तीनों के बीच का संतुलन ही संवैधानिक लोकतंत्र की रीढ़ है।
संसद वह संस्था है जो देश के लिए कानून बनाती है, सरकार पर नज़र रखती है और बजट पास करती है। इसे एक "दो-सदनीय विधायिका" कहते हैं — ऊपरी सदन राज्य सभा और निचला सदन लोक सभा। इसे ऐसे समझो: लोक सभा वह जगह है जहाँ जनता की सीधी आवाज़ आती है (क्योंकि सदस्य सीधे चुनाव से आते हैं), और राज्य सभा वह सदन है जहाँ राज्यों की आवाज़ आती है और जो जल्दबाज़ी में बनाए गए कानूनों पर "ब्रेक" का काम करता है।
न्यायपालिका की भूमिका यह सुनिश्चित करना है कि न तो संसद और न ही सरकार संविधान की सीमाएँ लाँघे। सर्वोच्च न्यायालय सबसे ऊपर है, उसके नीचे उच्च न्यायालय और फिर ज़िला एवं अधीनस्थ न्यायालय हैं।
CTET Paper II में यह अध्याय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Class 6-8 की सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तकों में "हमारी संसद" और "न्यायपालिका" सीधे पाठ के रूप में शामिल हैं। परीक्षा में अनुच्छेद-संख्या, समितियों के नाम और सदनों की विशेष शक्तियाँ — ये तीनों बार-बार आते हैं।
लोक सभा (निचला सदन)
राज्य सभा (ऊपरी सदन)
यह CTET में बार-बार आता है, इसलिए ध्यान से पढ़ो:
| समिति | काम | खास पहचान | |---|---|---| | लोक लेखा समिति (PAC) | CAG रिपोर्ट की जाँच, बीते व्यय की समीक्षा | "पोस्टमार्टम समिति" | | प्राक्कलन समिति | भविष्य के बजट अनुमानों की जाँच | "निरंतर अर्थव्यवस्था समिति" | | सार्वजनिक उपक्रम समिति | PSU के कामकाज की जाँच | — |
अनुच्छेद 312 के तहत यदि राज्य सभा दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पास करे, तो संसद कानून बनाकर नई अखिल भारतीय सेवाएँ बना सकती है। यह राज्य सभा की एक अनन्य शक्ति है जो संघवाद की भावना के विरुद्ध जाती है — इसीलिए इसके लिए विशेष बहुमत चाहिए।
सर्वोच्च न्यायालय
| क्षेत्राधिकार | अनुच्छेद | क्या होता है | |---|---|---| | मूल (Original) | 131 | केंद्र-राज्य या राज्य-राज्य विवाद सीधे SC में | | अपीलीय (Appellate) | 132-136 | उच्च न्यायालयों के निर्णयों की अपील | | परामर्शी (Advisory) | 143 | राष्ट्रपति SC से कानूनी राय माँग सकते हैं | | पुनरावलोकन (Review) | 137 | SC अपने ही निर्णयों की समीक्षा कर सकता है | | स्थानांतरण (Transfer) | 139A | एक HC से दूसरे HC में या SC में मामला स्थानांतरित |
महत्वपूर्ण: अनुच्छेद 143 के तहत SC की राय बाध्यकारी नहीं होती — यह केवल "परामर्शी" है।
संवैधानिक पीठ: जब किसी मामले में संविधान की व्याख्या का प्रश्न हो, तो कम से कम 5 न्यायाधीशों की पीठ चाहिए (अनुच्छेद 145(3))। 7 या 9 न्यायाधीशों की पीठ भी बनती है पर न्यूनतम 5 है।
न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु:
उच्च न्यायालय की विशेषताएँ:
जब भी प्रश्न पूछे "धन विधेयक राज्य सभा में पेश नहीं होगा — यह कहाँ लिखा है?" तो याद रखो: 110 = परिभाषा, 109 = प्रक्रिया। Pattern: 110 < 109 — छोटा नंबर पहले बताता है "क्या है", बड़ा नंबर बताता है "कैसे चलेगा"। सामान्य तरीका: दोनों अनुच्छेद याद करना — 2 अलग चीज़ें, 50% गलती की संभावना। Shortcut: "परिभाषा-प्रक्रिया" = "110-109" (उल्टा क्रम, घटते नंबर) — एक बार याद, हमेशा सही।
SC = सुप्रीम = सबसे ऊपर = बड़ा नंबर = 65 वर्ष HC = High Court = नीचे = छोटा नंबर = 62 वर्ष "जितना ऊँचा पद, उतनी देर काम" — यह pattern सभी competitive exams में काम करता है। Standard method: दोनों नंबर रटो, exam में mix-up होता है (देखा गया है 40% गलती rate)। Shortcut: SC > HC → 65 > 62 — एक logical link, zero confusion। 3 steps की जगह 1 step।
राज्य सभा के पास तीन अनन्य शक्तियाँ हैं जो लोक सभा के पास नहीं: A = अखिल भारतीय सेवा बनाना (अनुच्छेद 312) A = अलग विषय को संसद में देना (State List विषय पर कानून — अनुच्छेद 249) N = National Emergency की घोषणा की मंजूरी (यदि लोक सभा भंग हो — अनुच्छेद 352) जब भी प्रश्न हो "केवल राज्य सभा क्या कर सकती है?" — AAN याद करो। Standard method: तीनों अलग-अलग याद करो → 3 अलग entries → भूलने की संभावना ज़्यादा। Shortcut: AAN = 1 word → 3 facts → exam में 10 seconds में answer।
SC के 4 मुख्य क्षेत्राधिकार: M = Mool (मूल) — अनुच्छेद 131 A = Appellate (अपीलीय) — अनुच्छेद 132-136 R = Review (पुनरावलोकन) — अनुच्छेद 137 T = Transfer + paraMarshi (स्थानांतरण + परामर्शी) — अनुच्छेद 139A + 143 जब MCQ में कोई नया "क्षेत्राधिकार" option दिखे, MART से check करो — अगर इसमें नहीं है तो वह distractor है। Standard method: सभी अनुच्छेद अलग-अलग रटना → exam में blank आना। Shortcut: MART → 4 types याद → अनुच्छेद mapping automatic।
PAC = Public Accounts Committee = लोक लेखा समिति पोस्टमार्टम = मृत्यु के बाद जाँच। PAC = पैसा खर्च होने के बाद जाँच। यह logic एक बार बैठ जाए तो: जब भी "बीते खर्च की जाँच" दिखे → PAC। जब भी "भविष्य के अनुमान की जाँच" दिखे → प्राक्कलन समिति (Estimates Committee)। Elimination से: 4 options में PAC vs प्राक्कलन समिति confuse करने वाला होता है — Past/Post = PAC से instantly eliminate।
CTET Paper II में संसद-न्यायपालिका के प्रश्नों का pattern यही रहता है — "कौन सा अनुच्छेद?" या "कौन सा कथन गलत है?" इन दोनों types को इस framework से हल करो:
Step 1 — "गलत कथन" प्रश्न में: पहले वह option ढूँढो जो "राज्य सभा को भंग किया जा सकता है" जैसा absolute और wrong statement हो। राज्य सभा स्थायी सदन है — यह सबसे आम trap है।
Step 2 — "कौन सा अनुच्छेद?" प्रश्न में: 100-150 range = संसद और विधायिका। 130-145 range = सर्वोच्च न्यायालय। 217 = उच्च न्यायालय न्यायाधीश की नियुक्ति/सेवानिवृत्ति। अगर option में 131 और 143 दोनों हों और प्रश्न "राष्ट्रपति माँग सकते हैं" की बात करे → 143 (परामर्शी)।
Step 3 — "विशेष शक्ति" प्रश्न में: धन विधेयक = लोक सभा की ताकत। नई अखिल भारतीय सेवा = राज्य सभा की ताकत। संवैधानिक पीठ = न्यूनतम 5 जज — यह संख्या कभी 3 या 7 नहीं होती प्रश्न में।
क्यों यह प्रश्न: अनुच्छेद 143 CTET और अन्य teaching exams में बार-बार आता है क्योंकि यह SC की एक unique शक्ति है जिसे candidates अक्सर अनुच्छेद 131 (मूल क्षेत्राधिकार) से confuse करते हैं।
समाधान का रास्ता: "राष्ट्रपति माँग सकते हैं" = परामर्शी = 143। अनुच्छेद 131 में विवाद होता है, राष्ट्रपति की माँग नहीं। Elimination: 145 (SC के नियम), 131 (मूल क्षेत्राधिकार), 137 (पुनरावलोकन) — तीनों काटो, बचा 143।
क्यों यह प्रश्न: "5 या 7 या 9?" — यह संख्या-based trap CTET में खूब आता है। अनुच्छेद 145(3) की सटीक संख्या याद रखना ज़रूरी है।
समाधान का रास्ता: संवैधानिक पीठ = न्यूनतम 5 न्यायाधीश (अनुच्छेद 145(3))। 7 और 9 की पीठें भी बनती हैं लेकिन वे न्यूनतम नहीं हैं। 3 बहुत कम है — eliminate। Answer: 5।
क्यों यह प्रश्न: धन विधेयक की प्रक्रिया (अनुच्छेद 109) vs परिभाषा (अनुच्छेद 110) — यह pair CTET में सबसे ज़्यादा confuse करने वाला है।
समाधान का रास्ता: प्रश्न "राज्य सभा में पेश नहीं होगा" की बात करता है — यह प्रक्रिया है, परिभाषा नहीं। प्रक्रिया = अनुच्छेद 109। अनुच्छेद 110 परिभाषा देता है, 112 वार्षिक वित्तीय विवरण, 117 वित्तीय विधेयकों की विशेष प्रक्रिया।
क्यों यह प्रश्न: PAC को "पोस्टमार्टम समिति" का नाम — यह terminology-based प्रश्न CTET में Pedagogy section में भी आ सकता है जब "evaluation" की बात हो।
समाधान का रास्ता: "पहले किए गए व्यय" = past = post-fact = PAC। प्राक्कलन समिति future estimates देखती है। सार्वजनिक उपक्रम समिति PSU देखती है। कार्य मंत्रणा समिति संसद का agenda तय करती है।
क्यों यह प्रश्न: राज्य सभा की "गलत" विशेषता — यह "गलत कथन खोजो" format CTET में सबसे ज़्यादा आता है और "राज्य सभा को भंग किया जा सकता है" सबसे common trap है।
समाधान का रास्ता: राज्य सभा = स्थायी सदन = भंग नहीं होता — यह constitutional fact है (अनुच्छेद 85 केवल लोक सभा भंग करने की बात करता है)। बाकी तीनों option (6 साल कार्यकाल, 1/3 हर 2 साल, उपराष्ट्रपति सभापति) सब सही हैं।
अनुच्छेद 109 और 110 को पलट देना: "राज्य सभा में पेश नहीं होगा" = 109 (प्रक्रिया), "धन विधेयक क्या है" = 110 (परिभाषा)। उल्टा लिखने से सीधा गलत।
संवैधानिक पीठ के लिए 7 लिखना: न्यूनतम 5 है, 7 नहीं। 7 और 9 की पीठें भी बनती हैं, लेकिन "संवैधानिक पीठ" का मतलब न्यूनतम 5 है। अनुच्छेद 145(3) साफ़ कहता है।
राज्य सभा को भंग मानना: यह सबसे common trap है। राज्य सभा स्थायी सदन है — इसे न कभी भंग किया गया, न किया जा सकता है। केवल लोक सभा भंग होती है (अनुच्छेद 85)।
SC और HC की सेवानिवृत्ति आयु पलटना: SC = 65, HC = 62। गलती तब होती है जब option में 60 भी होता है (पुरानी आयु, अब बदल चुकी है)। 60 बिल्कुल गलत — 15वें संशोधन 1963 ने 60 को 62 किया।
अनुच्छेद 143 की राय को बाध्यकारी मानना: यह परामर्शी राय है — बाध्यकारी नहीं। राष्ट्रपति SC की सलाह मानने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं हैं।
नई अखिल भारतीय सेवा की शक्ति को राज्य सभा की समझना: शक्ति "संसद की" है (कानून बनाने की), लेकिन initiative राज्य सभा के दो-तिहाई प्रस्ताव से आता है। अनुच्छेद 312 को ध्यान से पढ़ो — "संसद, कानून द्वारा" ही सेवा बना सकती है।