IBPS PO के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक एवं मौद्रिक नीति — सम्पूर्ण अध्ययन सामग्री

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अवधारणा

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को समझने का सबसे सीधा तरीका यह है — इसे पूरी बैंकिंग प्रणाली का "बैंकर" मानो। जैसे एक साधारण बैंक अपने ग्राहकों को ऋण देता है और उनकी जमा राशि सुरक्षित रखता है, ठीक उसी तरह RBI व्यावसायिक बैंकों का बैंकर है और साथ ही सरकार का भी।

RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई थी और 1949 में इसका राष्ट्रीयकरण किया गया। इसका मुख्यालय मुंबई में है। RBI एक बहु-कार्यात्मक संस्था है — यह मुद्रा जारी करती है, बैंकों का नियमन करती है, विदेशी मुद्रा भंडार संभालती है, और सबसे महत्वपूर्ण — देश की मौद्रिक नीति तय करती है।

एक सरल उपमा: RBI को देश की आर्थिक गति को नियंत्रित करने वाले "ट्रैफिक कंट्रोलर" की तरह समझो। जब अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति (inflation) बढ़ती है — यानी पैसे बहुत तेज़ "दौड़" रहे हों — तो RBI ब्रेक लगाता है (रेपो दर बढ़ाकर)। जब अर्थव्यवस्था सुस्त हो — तो RBI एक्सीलेटर दबाता है (रेपो दर घटाकर)।

IBPS PO परीक्षा में RBI से प्रश्न दो प्रकार के आते हैं:

  1. नीतिगत दरें और अनुपात — रेपो, रिवर्स रेपो, CRR, SLR की वर्तमान संख्याएँ
  2. नियामक ढाँचा — NBFC, सहकारी बैंक, D-SIB, Account Aggregator जैसे विशिष्ट नियम और सीमाएँ

पहले प्रकार के प्रश्न परिवर्तनशील होते हैं — इन्हें परीक्षा से कुछ सप्ताह पहले update करो। दूसरे प्रकार के प्रश्न अधिक स्थिर होते हैं और इन्हें अच्छी तरह समझने पर कई परीक्षाओं में काम आते हैं। यह अध्याय मुख्यतः दूसरे प्रकार पर केन्द्रित है।


गहन विश्लेषण

RBI के मुख्य कार्य — वर्गीकरण

RBI के कार्यों को तीन श्रेणियों में बाँटकर याद करना सबसे प्रभावी है:

श्रेणी 1: मौद्रिक प्राधिकरण के कार्य

श्रेणी 2: नियामक और पर्यवेक्षी कार्य

श्रेणी 3: सेवा कार्य

मौद्रिक नीति के मुख्य उपकरण

रेपो दर (Repo Rate): वह दर जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है। यह दर बढ़ने पर बैंकों के लिए कर्ज़ महँगा होता है, जिससे वे अपने ग्राहकों को भी महँगा ऋण देते हैं — मुद्रास्फीति पर नियंत्रण होता है।

रिवर्स रेपो दर (Reverse Repo Rate): वह दर जिस पर RBI बैंकों से अल्पकालिक धनराशि उधार लेता है। यह हमेशा रेपो दर से कम होती है। जब RBI रिवर्स रेपो दर बढ़ाता है, तो बैंकों को RBI के पास पैसा रखना अधिक आकर्षक लगता है और वे बाज़ार में कम धन छोड़ते हैं।

नकद आरक्षित अनुपात — CRR (Cash Reserve Ratio): बैंकों को अपनी कुल NDTL (Net Demand and Time Liabilities) का एक निश्चित प्रतिशत RBI के पास नकद के रूप में रखना अनिवार्य है। CRR पर कोई ब्याज नहीं मिलता। CRR बढ़ने से बैंकों के पास उधार देने के लिए कम पैसा बचता है।

वैधानिक तरलता अनुपात — SLR (Statutory Liquidity Ratio): बैंकों को NDTL का एक और निश्चित प्रतिशत सरकारी प्रतिभूतियों, सोने आदि में निवेश करना अनिवार्य है। SLR पर रिटर्न मिलती है (सरकारी बॉन्ड पर)। SLR CRR से अधिक होता है।

MSF — Marginal Standing Facility: यह रेपो से थोड़ी महँगी दर पर बैंकों को आपातकालीन ऋण। MSF दर = रेपो दर + 0.25%। बैंक SLR प्रतिभूतियों को गिरवी रखकर MSF ले सकते हैं।

Bank Rate: दीर्घकालिक उधार की दर। यह भी MSF के बराबर होती है।

NBFC नियामक ढाँचा — परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण

RBI ने NBFC को एक स्तरीय (layered) नियामक ढाँचे में विभाजित किया है:

| वर्ग | परिभाषा | मुख्य आवश्यकता | |------|---------|----------------| | Base Layer | छोटी NBFC | न्यूनतम नियमन | | Middle Layer | NBFC-ND-SI | 30 दिन का Liquidity Buffer | | Upper Layer | बड़ी NBFC | बैंक जैसा नियमन | | Top Layer | प्रणालीगत जोखिम | उच्चतम पर्यवेक्षण |

Core Investment Companies (CIC): ये वे NBFC हैं जो मुख्यतः अपनी सहायक कंपनियों में निवेश करती हैं। इनके लिए न्यूनतम Net Owned Fund = ₹100 करोड़।

Supervisory Action Framework (SAF): 2021 में लागू। जब किसी NBFC का Net NPA, Net Advances का 6% से अधिक हो जाए — तो RBI सुधारात्मक कार्रवाई शुरू करता है।

D-SIB (Domestic Systemically Important Banks)

कुछ बैंक इतने बड़े होते हैं कि उनके डूबने से पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है — इन्हें "too big to fail" कहते हैं। RBI इन्हें D-SIB घोषित करता है।

D-SIB को अतिरिक्त Common Equity Tier 1 (CET1) capital buffer रखना अनिवार्य है। सबसे कम bucket के D-SIB के लिए यह 0.6% है। वर्तमान में SBI, HDFC Bank और ICICI Bank D-SIB हैं।

Account Aggregator Framework

यह RBI का नवीन ढाँचा है जो ग्राहकों को अपनी वित्तीय जानकारी को विभिन्न संस्थाओं के साथ सुरक्षित रूप से साझा करने की सुविधा देता है। इसमें तीन पक्ष हैं:

FIU की consent की अधिकतम वैधता = 24 महीने

Ways and Means Advances (WMA)

जब सरकार के पास अस्थायी रूप से नकदी की कमी हो, तो RBI WMA के रूप में अल्पकालिक ऋण देता है। FY 2024-25 के लिए केंद्र सरकार की WMA सीमा ₹1,50,000 करोड़ है।


शॉर्टकट और युक्तियाँ

patternCRR-SLR-Repo क्रम याद करो — C-S-R

मौद्रिक उपकरणों का क्रम याद रखो: CRR (सबसे कम % नहीं, पर सबसे महँगा क्योंकि कोई ब्याज नहीं) → SLR (अधिक, पर ब्याज मिलता है) → Repo (अल्पकालिक उधार दर)।

याद रखो: "Cash से Start, Securities से Save, Repo से Run" — बैंक पहले CRR lock करते हैं, फिर SLR निवेश, फिर जो बचे उससे Repo।

सामान्य विधि में तीनों की अलग-अलग परिभाषाएँ रटनी पड़ती हैं (5-6 कदम)। इस pattern से एक वाक्य में तीनों का सम्बंध याद रहता है — 3 कदम में।

patternNBFC के numbers — 100-200-30-6 की श्रृंखला

IBPS PO में NBFC के numbers अक्सर आते हैं। इन्हें एक sequence में याद करो:

  • CIC के लिए Net Owned Fund = ₹100 करोड़
  • Small Finance Bank (non-SCB promoter) के लिए paid-up capital = ₹200 करोड़
  • NBFC-ND-SI के लिए Liquidity Buffer = 30 दिन
  • SAF में corrective action की Net NPA सीमा = 6%

"100-200-30-6" — एक बार इस क्रम को दोहराओ। गलत क्रम से उत्तर चुनने की गलती तुरंत पकड़ में आएगी।

रटकर याद करने में 8-10 बार दोहराना पड़ता है। इस sequence को 2-3 बार दोहराने से 80% retention होता है।

eliminationD-SIB बफर — 0.6% को Lock करो

D-SIB के लिए options में अक्सर 0.6%, 1.0%, 1.2%, 2.5% आते हैं। 2.5% Capital Conservation Buffer (CCB) है — D-SIB से अलग। 1.0% और 1.2% Global SIFI (G-SIB) के higher buckets हैं। भारत में D-SIB का न्यूनतम = 0.6%।

Elimination technique: पहले 2.5% हटाओ (यह CCB है), फिर 1.0%+ हटाओ (ये G-SIB के लिए हैं)। बचता है 0.6%।

सीधे याद करने की कोशिश: 15-20 सेकंड। Elimination से: 8-10 सेकंड।

patternAccount Aggregator की 24 महीने की validity — '2 साल का ठेका'

AA Framework में consent validity के options आमतौर पर 6, 12, 24, 36 महीने होते हैं। याद रखो — "2 साल का ठेका" यानी 24 महीने। 6 महीने बहुत कम (financial service के लिए), 36 महीने बहुत अधिक (privacy risk)। 24 महीने = balance।

इस logic से options में से 24 महीने 12 सेकंड में confirm हो जाता है — calculation नहीं, reasoning।

substitutionWMA को Treasury Gap से जोड़ो

WMA का full form Ways and Means Advances है। इसे "सरकार का overdraft" समझो। FY 2024-25 में ₹1,50,000 करोड़। Options में ₹1,25,000, ₹1,50,000, ₹1,75,000, ₹2,00,000 आते हैं।

Substitution trick: WMA = "डेढ़ लाख करोड़" — "डेढ़" शब्द याद करो। 1.25 = सवा लाख, 1.50 = डेढ़ लाख, 1.75 = पौने दो लाख। "डेढ़ लाख करोड़" एक बार मुँह से बोलो — 2 सेकंड में recall होगा।


तेज़-समाधान रूपरेखा

परीक्षा-हॉल में RBI से जुड़े प्रश्न देखते ही यह decision tree follow करो:

Step 1 — प्रश्न का प्रकार पहचानो:

Step 2 — Elimination लगाओ:

Step 3 — Cross-check करो:

Step 4 — समय सीमा: GA के प्रश्न 30-40 सेकंड से अधिक नहीं लेने चाहिए। अगर 30 सेकंड में answer नहीं मिला — best elimination लगाओ और आगे बढ़ो।


हल किए गए PYQs

क्यों यह प्रश्न: CIC एक विशेष NBFC श्रेणी है जिसे IBPS PO के छात्र अक्सर नज़रअंदाज़ करते हैं। ₹100 करोड़ की सीमा को ₹500 करोड़ या ₹1000 करोड़ से confuse करना बहुत आम गलती है।

समाधान का रास्ता: CIC = holding company जो सहायक कंपनियों में निवेश करती है। यह deposit नहीं लेती, इसलिए इसकी capital requirement अपेक्षाकृत कम है। "100-200-30-6" sequence में 100 सबसे पहले आता है — CIC के लिए।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
Under the RBI's Master Direction on Financial Parameters, what is the minimum Core Investment Companies (CIC) should maintain as Net Owned Fund?
RBI के मास्टर डायरेक्शन ऑन फाइनेंशियल पैरामीटर्स के तहत Core Investment Companies (CIC) को न्यूनतम कितना नेट ओन्ड फंड बनाए रखना चाहिए?
  1. ₹100 crore
  2. ₹500 crore
  3. ₹1000 crore
  4. ₹2000 crore
  1. ₹100 करोड़
  2. ₹500 करोड़
  3. ₹1000 करोड़
  4. ₹2000 करोड़
Solutionसमाधान
According to RBI's Master Direction on Core Investment Companies, CICs should maintain a minimum Net Owned Fund of ₹100 crore. This is part of RBI's regulatory framework for NBFCs classified as CICs.
आरबीआई के मुख्य निवेश कंपनियों पर मास्टर निर्देश के अनुसार, CIC को न्यूनतम ₹100 करोड़ का नेट ओन्ड फंड बनाए रखना चाहिए। यह CIC के रूप में वर्गीकृत NBFC के लिए आरबीआई के नियामक ढांचे का हिस्सा है।

क्यों यह प्रश्न: NBFC-ND-SI के लिए liquidity buffer के दिनों की संख्या एक ऐसा fact है जो अक्सर 15, 30, 45 के बीच confuse होता है।

समाधान का रास्ता: "Systemically Important" यानी बड़ी NBFC — इन्हें अधिक buffer चाहिए, पर 45 या 60 दिन बहुत अधिक होगा। 30 दिन = एक महीने का buffer। यह RBI का standard "30-day stress scenario" है जो Basel liquidity norms से inspired है। 15 दिन eliminate करो (बहुत कम), 45-60 दिन eliminate करो (NBFC के लिए नहीं, ये LCR के लिए हैं)।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
What is the minimum duration for which a Systemically Important Non-Deposit taking NBFC (NBFC-ND-SI) should maintain liquidity buffer as per RBI norms?
RBI के नियमों के अनुसार, सिस्टेमेटिकली इम्पोर्टेंट नॉन-डिपॉजिट टेकिंग NBFC (NBFC-ND-SI) को कम से कम कितने दिनों के लिए लिक्विडिटी बफर बनाए रखना चाहिए?
  1. 15 days
  2. 30 days
  3. 45 days
  4. 60 days
  1. 15 दिन
  2. 30 दिन
  3. 45 दिन
  4. 60 दिन
Solutionसमाधान
As per RBI guidelines, Systemically Important Non-Deposit taking NBFCs (NBFC-ND-SI) should maintain a minimum liquidity buffer of 30 days. This ensures they can meet their obligations during stress periods.
आरबीआई दिशानिर्देशों के अनुसार, सिस्टमिकली महत्वपूर्ण गैर-जमा लेने वाली NBFC (NBFC-ND-SI) को न्यूनतम 30 दिन का तरलता बफर बनाए रखना चाहिए। यह सुनिश्चित करता है कि वे तनाव की अवधि में अपनी देनदारियों को पूरा कर सकें।

क्यों यह प्रश्न: Urban Cooperative Banks (UCB) के लिए exposure limit एक ऐसा प्रश्न है जो Tier-1 capital के प्रतिशत के रूप में पूछा जाता है। 10%, 15%, 20%, 25% — चारों options reasonable लगते हैं।

समाधान का रास्ता: ₹100 करोड़ से अधिक जमा वाले UCB → ये mid-size cooperative banks हैं। RBI इन्हें सख्त concentration risk नियंत्रण में रखता है। Commercial banks की single borrower limit Tier-1 का 15% (Tier-2 include करने पर 20%) है। UCB के लिए भी यही 15% लागू है — consistency याद रखो।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
What is the maximum exposure limit for a single borrower that RBI has prescribed for Primary (Urban) Co-operative Banks with deposits above ₹100 crore?
RBI ने ₹100 करोड़ से अधिक जमा वाले प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंकों के लिए एकल उधारकर्ता की अधिकतम एक्सपोजर सीमा कितनी निर्धारित की है?
  1. 10% of Tier-1 capital
  2. 15% of Tier-1 capital
  3. 20% of Tier-1 capital
  4. 25% of Tier-1 capital
  1. Tier-1 पूंजी का 10%
  2. Tier-1 पूंजी का 15%
  3. Tier-1 पूंजी का 20%
  4. Tier-1 पूंजी का 25%
Solutionसमाधान
For Primary (Urban) Co-operative Banks with deposits above ₹100 crore, RBI has prescribed a maximum single borrower exposure limit of 15% of Tier-1 capital. This is part of prudential norms to ensure diversified lending.
₹100 करोड़ से अधिक जमा वाले प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंकों के लिए, आरबीआई ने टियर-1 पूंजी के 15% की अधिकतम एकल उधारकर्ता एक्सपोजर सीमा निर्धारित की है। यह विविधीकृत उधार सुनिश्चित करने के लिए विवेकपूर्ण मानदंडों का हिस्सा है।

क्यों यह प्रश्न: Account Aggregator Framework एक नया और उभरता विषय है। Consent validity की अधिकतम अवधि — 6, 12, 24, या 36 महीने — में से सही चुनना।

समाधान का रास्ता: Consent = ग्राहक की अनुमति। बहुत कम अवधि (6 महीने) → EMI loan जैसी services के लिए अपर्याप्त। बहुत अधिक (36 महीने) → privacy और data misuse का खतरा। 24 महीने = 2 साल → balance between utility और protection। "2 साल का ठेका" trick यहाँ सीधे काम आती है।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
Under the RBI's Account Aggregator framework, what is the maximum validity period for a Financial Information User (FIU) consent?
आरबीआई के Account Aggregator फ्रेमवर्क के तहत, Financial Information User (FIU) की सहमति (consent) की अधिकतम वैधता अवधि क्या है?
  1. 6 months
  2. 12 months
  3. 24 months
  4. 36 months
  1. 6 महीने
  2. 12 महीने
  3. 24 महीने
  4. 36 महीने
Solutionसमाधान
Under RBI's Account Aggregator framework, the maximum validity period for a Financial Information User (FIU) consent is 24 months. This ensures customer protection while allowing sufficient time for legitimate financial services.
आरबीआई के अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क के तहत, फाइनेंशियल इंफॉर्मेशन यूजर (FIU) सहमति की अधिकतम वैधता अवधि 24 महीने है। यह वैध वित्तीय सेवाओं के लिए पर्याप्त समय देते हुए ग्राहक सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

क्यों यह प्रश्न: Small Finance Bank licensing के लिए paid-up capital की आवश्यकता — यह facts-based प्रश्न है जहाँ ₹100, ₹200, ₹300, ₹500 करोड़ सभी plausible लगते हैं।

समाधान का रास्ता: "100-200-30-6" sequence में CIC = ₹100 करोड़, Small Finance Bank (non-SCB promoter) = ₹200 करोड़। Full-fledged commercial bank के लिए ₹500 करोड़ की capital requirement होती है — SFB के लिए यह कम होगी क्योंकि SFB limited area में काम करते हैं।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
Under the RBI's revised guidelines on 'on tap' licensing for Small Finance Banks, what is the minimum paid-up capital requirement for promoters other than scheduled commercial banks?
स्मॉल फाइनेंस बैंकों के लिए RBI के संशोधित 'ऑन टैप' लाइसेंसिंग दिशानिर्देशों के तहत, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों से अलग प्रमोटरों के लिए न्यूनतम पेड-अप कैपिटल की आवश्यकता क्या है?
  1. ₹100 crore
  2. ₹200 crore
  3. ₹300 crore
  4. ₹500 crore
  1. ₹100 करोड़
  2. ₹200 करोड़
  3. ₹300 करोड़
  4. ₹500 करोड़
Solutionसमाधान
According to RBI's revised guidelines on 'on tap' licensing for Small Finance Banks, promoters other than scheduled commercial banks need a minimum paid-up capital of ₹200 crore. This was updated to ensure better capitalization of SFBs.
स्मॉल फाइनेंस बैंकों के लिए 'ऑन टैप' लाइसेंसिंग पर आरबीआई के संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के अलावा अन्य प्रमोटरों को न्यूनतम ₹200 करोड़ की चुकता पूंजी की आवश्यकता होती है।

क्यों यह प्रश्न: D-SIB का CET1 buffer — 0.6% — एक ऐसी संख्या है जो बहुत छोटी लगती है और इसलिए candidates इसे 1% या 1.2% से replace कर देते हैं।

समाधान का रास्ता: D-SIB के लिए 4 buckets हैं — Bucket 1 (0.6%), Bucket 2 (0.9%), Bucket 3 (1.2%), Bucket 4 (1.5%)। प्रश्न में "न्यूनतम" शब्द है — इसलिए Bucket 1 = 0.6%। 2.5% Capital Conservation Buffer (CCB) से confuse मत होना — वह सभी बैंकों के लिए है।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
What is the minimum Common Equity Tier 1 (CET1) ratio that Domestic Systemically Important Banks (D-SIBs) need to maintain as additional capital buffer?
घरेलू प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण बैंकों (D-SIBs) को अतिरिक्त कैपिटल बफर के तौर पर न्यूनतम कॉमन इक्विटी टियर 1 (CET1) अनुपात कितना बनाए रखना होता है?
  1. 0.6%
  2. 1.0%
  3. 1.2%
  4. 2.5%
  1. 0.6%
  2. 1.0%
  3. 1.2%
  4. 2.5%
Solutionसमाधान
Domestic Systemically Important Banks (D-SIBs) are required to maintain an additional Common Equity Tier 1 capital buffer of 0.6% over and above the minimum capital requirements. This was implemented from April 2016.
घरेलू व्यवस्थित महत्वपूर्ण बैंकों (D-SIBs) को न्यूनतम पूंजी आवश्यकताओं के अतिरिक्त 0.6% का अतिरिक्त कॉमन इक्विटी टियर 1 कैपिटल बफर बनाए रखना आवश्यक है। यह अप्रैल 2016 से लागू किया गया था।

क्यों यह प्रश्न: NBFC का SAF framework — वर्ष और Net NPA threshold दोनों एक साथ पूछे जाते हैं। 2021 vs 2022 और 6% vs 8% — दोनों में गड़बड़ी होती है।

समाधान का रास्ता: SAF = 2021 में launch (COVID के बाद NBFC sector को regulate करने की ज़रूरत महसूस हुई)। Net NPA threshold = 6% (यही commercial banks के लिए भी Prompt Corrective Action का trigger point है — consistency)। 8% eliminate करो — यह किसी और framework से association है।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
The RBI's Supervisory Action Framework (SAF) for NBFCs was introduced in which year, and what is the threshold for Net NPAs that triggers corrective action?
RBI का NBFCs के लिए Supervisory Action Framework (SAF) किस साल शुरू किया गया था, और Net NPAs की वह सीमा क्या है जिस पर corrective action लिया जाता है?
  1. 2021, 6%
  2. 2022, 8%
  3. 2021, 8%
  4. 2022, 6%
  1. 2021, 6%
  2. 2022, 8%
  3. 2021, 8%
  4. 2022, 6%
Solutionसमाधान
The RBI introduced the Supervisory Action Framework (SAF) for NBFCs in 2021. Under this framework, corrective action is triggered when Net NPAs exceed 6% of net advances.
आरबीआई ने 2021 में NBFC के लिए पर्यवेक्षी कार्य ढांचा (SAF) पेश किया। इस ढांचे के तहत, जब नेट NPA नेट एडवांस का 6% से अधिक हो जाता है तो सुधारात्मक कार्रवाई शुरू की जाती है।

क्यों यह प्रश्न: WMA की सीमा FY-specific होती है और candidates अक्सर पुरानी सीमा याद रखते हैं। ₹1,25,000 करोड़ पुरानी सीमा थी — यह common trap है।

समाधान का रास्ता: FY 2024-25 के लिए WMA = ₹1,50,000 करोड़। "डेढ़ लाख करोड़" याद करो। ₹1,25,000 = पुरानी सीमा (यह common distractor है), ₹2,00,000 = बहुत अधिक। Elimination से ₹1,50,000 confirm होता है।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
What is the maximum limit of Ways and Means Advances (WMA) that RBI can provide to the Central Government as per the current agreement for FY 2024-25?
वर्तमान समझौते के अनुसार FY 2024-25 के लिए RBI केंद्र सरकार को Ways and Means Advances (WMA) की अधिकतम कितनी सीमा प्रदान कर सकता है?
  1. ₹1,25,000 crores
  2. ₹1,50,000 crores
  3. ₹1,75,000 crores
  4. ₹2,00,000 crores
  1. ₹1,25,000 करोड़
  2. ₹1,50,000 करोड़
  3. ₹1,75,000 करोड़
  4. ₹2,00,000 करोड़
Solutionसमाधान
The maximum limit of Ways and Means Advances (WMA) that RBI can provide to the Central Government for FY 2024-25 is ₹1,50,000 crores. WMA is a temporary loan facility provided by RBI to the government to meet short-term funding requirements and bridge cash flow mismatches.
वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए RBI द्वारा केंद्र सरकार को प्रदान की जा सकने वाली वेज एंड मींस एडवांस (WMA) की अधिकतम सीमा ₹1,50,000 करोड़ है। WMA सरकार को अल्पकालिक फंडिंग आवश्यकताओं को पूरा करने और नकदी प्रवाह की असंगति को पाटने के लिए RBI द्वारा प्रदान की जाने वाली एक अस्थायी ऋण सुविधा है।

आम गलतियाँ


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