वित्तीय बाज़ार वह व्यवस्था है जहाँ पैसे की ज़रूरत वाले (उधार लेने वाले) और पैसे वाले (निवेशक) एक-दूसरे से मिलते हैं। सरल भाषा में — यह वह मंडी है जहाँ पैसा खुद एक वस्तु की तरह खरीदा-बेचा जाता है।
एक किसान बाज़ार की कल्पना करो जहाँ गेहूँ बिकता है। वित्तीय बाज़ार उसी तरह है, बस यहाँ गेहूँ की जगह "धन" और "प्रतिभूतियाँ" (securities) हैं।
भारत में वित्तीय बाज़ार को मुख्यतः दो हिस्सों में बाँटा जाता है:
मुद्रा बाज़ार (Money Market): यहाँ अल्पकालिक उधार होता है — एक दिन से लेकर एक साल तक। RBI इसका नियामक है। Treasury Bills, Commercial Paper, Certificate of Deposit, Call Money — ये सब मुद्रा बाज़ार के उपकरण हैं। बैंक और बड़े संस्थान यहाँ अपनी तरलता (liquidity) को manage करते हैं।
पूंजी बाज़ार (Capital Market): यहाँ दीर्घकालिक पूंजी जुटाई जाती है — एक साल से अधिक की अवधि के लिए। इसे आगे दो भागों में बाँटते हैं:
SEBI (Securities and Exchange Board of India) पूंजी बाज़ार का नियामक है, जबकि RBI मुद्रा बाज़ार और विदेशी मुद्रा बाज़ार का।
SBI PO में इस topic से सीधे fact-based प्रश्न आते हैं — दरें, सीमाएँ, नियम, और क्रम। इन्हें रटने की नहीं, समझने की ज़रूरत है।
| उपकरण | जारीकर्ता | अवधि | विशेषता | |--------|-----------|------|---------| | Treasury Bill (T-Bill) | केंद्र सरकार | 91, 182, 364 दिन | Discount पर जारी | | Commercial Paper (CP) | कंपनियाँ | 7 दिन - 1 साल | Unsecured | | Certificate of Deposit (CD) | बैंक | 7 दिन - 1 साल | Negotiable | | Call Money | बैंक | 1 दिन (Overnight) | Interbank lending |
Repo Rate वह दर है जिस पर RBI बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है। दिसंबर 2024 तक यह 6.50% है। यह दर मुद्रा बाज़ार की सभी दरों को प्रभावित करती है।
न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (Minimum Public Shareholding): SEBI का स्पष्ट नियम है — सभी listed कंपनियों में कम से कम 25% शेयर आम जनता के पास होने चाहिए। यह इसलिए ज़रूरी है ताकि बाज़ार में पर्याप्त free float रहे और promoters बाज़ार में हेरफेर न कर सकें।
IPO में निवेशक श्रेणियाँ:
IPO में आवेदन तीन categories में होता है:
Settlement Cycle का क्रम — यह SBI PO का favorite है:
भारतीय इक्विटी बाज़ार में settlement cycle का विकास इस प्रकार रहा:
यहाँ "T" का अर्थ है Trade Date — जिस दिन खरीद-बिक्री हुई। T+1 का मतलब है कि अगले कार्य दिवस पर पैसा और शेयर transfer हो जाएँगे।
STT वह कर है जो शेयर खरीदने-बेचने पर लगता है:
परीक्षा में Equity Delivery की दर सबसे ज़्यादा पूछी जाती है — 0.1%।
LRS के तहत भारत का कोई भी निवासी व्यक्ति एक वित्त वर्ष में USD 2,50,000 (ढाई लाख डॉलर) विदेश भेज सकता है — पढ़ाई, यात्रा, विदेश में निवेश, आदि के लिए। यह सीमा RBI द्वारा निर्धारित होती है और FEMA के अंतर्गत आती है।
AIF वे funds हैं जो पारंपरिक म्यूचुअल फंड और बैंक से अलग हों। SEBI AIF Regulations 2012 के तहत तीन categories हैं:
सभी तीनों categories के लिए न्यूनतम corpus ₹20 करोड़ है।
SEBI ने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए डीमैट खाता खोलने की न्यूनतम राशि की बाध्यता हटा दी है। कोई भी व्यक्ति शून्य राशि से भी खाता खोल सकता है।
Equity Delivery पर STT = 0.1% (दोनों तरफ), Intraday बिक्री = 0.025% (आधा यानी delivery का चौथाई)। याद करने का तरीका: Delivery में तुम शेयर "रखते" हो — इसलिए दर ज़्यादा (0.1%); Intraday में उसी दिन निकाल देते हो — इसलिए कम (0.025%)। परीक्षा में 4 options में से 0.1% को eliminate करने में 3 seconds लगते हैं क्योंकि बाकी तीन (0.025%, 0.15%, 0.2%) में से delivery की दर केवल 0.1% है। Standard approach: सभी options पढ़ना (15s) → Shortcut: सीधे 0.1% (3s)।
Settlement cycle हमेशा घटता रहा है — कभी बढ़ा नहीं। इसलिए अगर options में कोई भी "बढ़ने" वाला क्रम हो (जैसे T+1 → T+2), वह गलत है। सही उत्तर हमेशा T+5 → T+3 → T+2 → T+1 होगा। Elimination से 4 options में से गलत 3 हटाने में 8s लगते हैं बनाम सभी options verify करने में 25s।
IPO में Retail = ₹2 लाख। LRS में विदेश भेजना = USD 2,50,000। दोनों में "2" याद रखो। परीक्षा में ₹1 लाख और ₹3 लाख का जाल होता है — ₹2 लाख की सीमा fixed है। Options eliminate करते समय ₹1 लाख और ₹3 लाख को पहले काटो (5s) बनाम चारों options सोचने में (20s)।
परीक्षा में जाल यह होता है कि Category III के लिए ज़्यादा corpus माँगा जाता है। लेकिन SEBI नियमों के तहत Category I, II, और III — तीनों के लिए न्यूनतम corpus ₹20 करोड़ है। अगर कोई option ₹50 करोड़ या ₹100 करोड़ दे, वह गलत है। Elimination: 2 wrong options (₹50 करोड़, ₹100 करोड़) तुरंत काटो → ₹20 करोड़ बनाम ₹10 करोड़ में से ₹20 करोड़ चुनो। Time: 8s बनाम 25s।
जो भी अल्पकालिक (1 साल से कम) है → RBI। जो भी दीर्घकालिक/equity/bonds/mutual funds है → SEBI। LRS और Forex → RBI। इस एक नियम से 80% "नियामक कौन" वाले प्रश्न 5 seconds में हल होते हैं।
परीक्षा हॉल में वित्तीय बाज़ार का प्रश्न देखते ही यह क्रम अपनाओ:
चरण 1 — नियामक पहचानो: प्रश्न में RBI है या SEBI? अल्पकालिक = RBI, दीर्घकालिक/equity = SEBI।
चरण 2 — संख्या की जाँच: क्या प्रश्न में कोई दर, सीमा, या प्रतिशत पूछा गया है?
चरण 3 — क्रम/sequence प्रश्न: Settlement cycle हमेशा घटता है। T+5 से T+1 की दिशा याद रखो।
चरण 4 — "नई नीति" वाले प्रश्न: डीमैट खाते के लिए कोई न्यूनतम राशि नहीं। अगर options में कोई राशि दी हो, वह गलत है।
किसी भी प्रश्न को इन चार चरणों से 20-25 seconds में हल करो।
क्यों यह प्रश्न: STT सबसे ज़्यादा पूछी जाने वाली दर है। 0.025% (intraday) और 0.1% (delivery) के बीच confusion परीक्षा में जाल बनाता है।
समाधान का रास्ता: Delivery में खरीदार और विक्रेता — दोनों पर STT लगती है, इसलिए दर ज़्यादा (0.1%)। Options में 0.025% (intraday की दर) को पहले eliminate करो। शेष में 0.1% सही उत्तर है।
क्यों यह प्रश्न: Repo Rate एक dynamic figure है — SBI PO में "current rate" वाले प्रश्न अक्सर आते हैं। यह RBI की monetary policy का सबसे महत्वपूर्ण उपकरण है।
समाधान का रास्ता: दिसंबर 2024 तक repo rate 6.50% पर स्थिर रही। Options में 6.25% और 6.75% distractor हैं — RBI ने inflation control और growth के संतुलन के लिए 6.50% बनाए रखा।
क्यों यह प्रश्न: LRS की सीमा FEMA और capital account convertibility से जुड़ी है। "250,000" का confusion सबसे आम गलती है।
समाधान का रास्ता: USD 2,50,000 — यह सीमा RBI ने निर्धारित की है। USD 2,00,000 एक पुरानी सीमा नहीं है — यह सीधे गलत option है। "कोई सीमा नहीं" option को तुरंत eliminate करो क्योंकि LRS की concept ही सीमा पर आधारित है।
क्यों यह प्रश्न: Minimum Public Shareholding SEBI के सबसे बुनियादी नियमों में से एक है। 25% vs 30% का जाल हर बार आता है।
समाधान का रास्ता: SEBI का नियम — 25% minimum public shareholding। 30% वाला option distractor है (कुछ PSUs के लिए अलग नियम थे)। Listed companies के लिए universal rule = 25%।
क्यों यह प्रश्न: Settlement cycle का sequence SBI PO में sequence/chronological order वाले प्रश्नों में आता है। गलत क्रम वाले options में फँसना आसान है।
समाधान का रास्ता: याद रखो — cycle हमेशा घटी है, बढ़ी कभी नहीं। T+5 → T+3 → T+2 → T+1। Option (D) में T+3 → T+1 → T+2 का क्रम है — यह गलत है क्योंकि T+2, T+1 के बाद नहीं आया। तुरंत eliminate।
क्यों यह प्रश्न: डीमैट खाते की "कोई न्यूनतम राशि नहीं" वाला नियम नया है और SEBI की financial inclusion policy का हिस्सा है। यह counter-intuitive लगता है इसलिए परीक्षा में आता है।
समाधान का रास्ता: SEBI ने यह बाधा हटाई — इसलिए "कोई न्यूनतम राशि जरूरी नहीं" सही उत्तर है। Options में ₹500, ₹1000, ₹2000 सब distractor हैं।
क्यों यह प्रश्न: AIF की categories और उनके corpus की जानकारी advanced level की है — SBI PO में यह differentiate करता है।
समाधान का रास्ता: Category III = Hedge funds = जटिल strategies। लेकिन corpus सभी categories में समान = ₹20 करोड़। ₹50 करोड़ और ₹100 करोड़ को तुरंत eliminate करो। ₹10 करोड़ vs ₹20 करोड़ में SEBI नियम के अनुसार ₹20 करोड़ सही है।
क्यों यह प्रश्न: IPO में RII की सीमा SEBI नियमों का core हिस्सा है। ₹1 लाख, ₹2 लाख, ₹3 लाख — तीनों options आते हैं।
समाधान का रास्ता: RII = Retail Individual Investor = अधिकतम ₹2 लाख। इससे अधिक = HNI category। ₹2 लाख की यह सीमा retail investors की protection के लिए है।
STT की दर में confusion: Intraday (0.025%) और Delivery (0.1%) को आपस में बदल देना सबसे आम गलती है। याद रखो — Delivery में तुम शेयर घर ले जाते हो, इसलिए tax ज़्यादा।
Settlement cycle में गलत क्रम: T+3 → T+1 → T+2 → T+0 जैसे उलटे-सीधे sequences में फँसना। याद रखो — यह हमेशा घटता ही गया, कोई reversal नहीं हुआ।
Minimum Public Shareholding: 25% को 30% समझना: कुछ PSUs (Public Sector Undertakings) के लिए अलग नियम रहे हैं, लेकिन सामान्य listed कंपनियों के लिए यह 25% है।
LRS सीमा: USD 2,00,000 vs USD 2,50,000: 2,00,000 एक आम distractor है — सही आँकड़ा 2,50,000 डॉलर प्रति वित्त वर्ष है।
AIF corpus: Category के हिसाब से अलग-अलग मानना: तीनों categories (I, II, III) के लिए न्यूनतम corpus एक समान — ₹20 करोड़। Category III के लिए ज़्यादा मानना गलत है।
RBI और SEBI का नियामक क्षेत्र मिलाना: Money Market (T-Bills, CP, Call Money, Repo) → RBI। Capital Market (Equity, IPO, Mutual Funds, AIF) → SEBI। LRS और Forex → RBI। इन्हें मिलाओगे तो "नियामक कौन" वाले प्रश्न गलत होंगे।