जब कोई व्यक्ति कोई कथन (statement) बोलता है या कोई कार्रवाई सुझाता है, तो वह कुछ बातों को बिना कहे ही सच मान लेता है। इन्हीं अनकही, मान ली गई बातों को पूर्वधारणा (assumption) कहते हैं।
एक सीधा उदाहरण लो: कोई कहता है — "कल सुबह जल्दी उठना, ट्रेन पकड़नी है।" इस कथन में स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया कि ट्रेन समय पर चलेगी, या कि स्टेशन पहुँचा जा सकेगा — फिर भी वक्ता ये बातें मान कर चल रहा है। यही पूर्वधारणाएँ हैं।
परीक्षा में यह प्रश्न-प्रकार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे तर्क की जड़ पकड़ता है: क्या वक्ता को अपनी बात कहने के लिए यह मानना ज़रूरी था?
पूर्वधारणा और निष्कर्ष में फ़र्क़:
कथन: "बच्चों को 5 साल में स्कूल भेजो।"
दोनों अलग-अलग दिशाओं में काम करते हैं। यह भेद परीक्षा में बहुत काम आता है।
किसी assumption को अंतर्निहित (implicit) तब माना जाता है जब उसके बिना कथन का कोई अर्थ ही न रहे या वह कथन करना व्यर्थ हो जाए।
परीक्षण सूत्र: कथन से assumption हटा दो। अगर कथन तार्किक रूप से लड़खड़ा जाए, तो assumption अंतर्निहित है।
उदाहरण:
1. आवश्यकता-आधारित (Need-based): जब कोई सुझाव दिया जाए, तो उसके पीछे यह assumption होती है कि वह ज़रूरत वास्तव में मौजूद है।
कथन: "बेरोज़गार युवाओं को भत्ता दिया जाए।" Assumption: बेरोज़गार युवाओं को आर्थिक सहायता की ज़रूरत है। → अंतर्निहित
2. व्यवहार्यता-आधारित (Feasibility-based): जब कोई नीति सुझाई जाए, तो उसे लागू करना संभव है — यह assumption हमेशा अंतर्निहित नहीं होती। केवल तभी मानो जब कथन में व्यवहार्यता का स्पष्ट संकेत हो।
कथन: "सभी बेरोज़गार युवाओं को भत्ता दिया जाए।" Assumption: सरकार के पास पर्याप्त धन है। → अंतर्निहित नहीं — यह एक सुझाव है, घोषणा नहीं।
यहाँ सबसे बड़ा trap है। बहुत से छात्र feasibility को automatically implicit मान लेते हैं। मत मानो।
3. विरोधाभासी (Contradictory): जो assumption कथन से उल्टी दिशा में हो, वह कभी अंतर्निहित नहीं होती।
कथन: "punctuality लाने के लिए conveyance allowance दो।" Assumption I: Allowance से punctuality नहीं आएगी। → यह कथन के विरुद्ध है — अंतर्निहित नहीं।
4. अति-विशिष्ट (Over-specific): जो assumption कथन से बहुत आगे जाकर एक विशेष दावा करे जो न कहा गया हो, न ज़रूरी हो — वह अंतर्निहित नहीं।
कथन: "बच्चे को 5 साल में स्कूल भेजो।" Assumption: स्कूल 6 साल के बाद बच्चे नहीं लेते। → कथन में यह कहीं नहीं है और इसके बिना भी कथन का अर्थ पूरा है। अंतर्निहित नहीं।
विज्ञापन/अपील (Advertisement/Appeal): "हमारा उत्पाद खरीदें — आपकी त्वचा चमक उठेगी।" Assumption: लोग चमकती त्वचा चाहते हैं। → अंतर्निहित। Assumption: उत्पाद वाकई असर करेगा। → यह तो वक्ता का दावा है, assumption नहीं।
नियुक्ति/probation पत्र: जब कोई probation period का उल्लेख करे:
नीति-सुझाव (Policy Suggestion): "सुझाव" हमेशा यह मानता है कि जिसे सुझाव दिया जा रहा है, वह उसे लागू कर सकता है — लेकिन यह भी हमेशा नहीं। Context देखो।
| प्रकार | परिभाषा | उदाहरण | |--------|----------|---------| | Implicit (अंतर्निहित) | कथन में नहीं कहा, लेकिन कथन के लिए ज़रूरी | "ट्रेन समय पर चलेगी" जब कोई "जल्दी चलो ट्रेन है" कहे | | Explicit (स्पष्ट) | कथन में प्रत्यक्ष रूप से कहा गया | "ट्रेन 6 बजे है" — यह fact है, assumption नहीं |
परीक्षा में explicit को assumption मानकर mark करना एक बड़ी गलती है।
जब assumption कथन के विपरीत हो, उसे तुरंत eliminate करो।
कदम:
उदाहरण: "Allowance दो → punctuality आएगी" के सामने "Allowance से punctuality नहीं आएगी" — यह तुरंत eliminate। Standard method: 30 सेकंड। इस shortcut से: 5 सेकंड।
Assumption को हटाकर देखो — क्या कथन अभी भी तार्किक रहता है?
कदम:
उदाहरण: "5 साल में बच्चा ready नहीं होता" → "5 साल में भेजो" का कोई तर्क नहीं रहता। अतः assumption I implicit है। यह test 2-3 steps में देता है जो standard 5-step analysis से तेज़ है।
Pattern: जब भी कोई सुझाव/नीति हो और assumption में "पर्याप्त संसाधन हैं" या "यह संभव है" जैसी बात हो — default answer है "implicit नहीं।"
Rule: सुझाव देना ≠ उपलब्धता मान लेना।
"सभी बेरोज़गारों को भत्ता दो" → "सरकार के पास पैसे हैं" = implicit नहीं। यह pattern SBI PO में 3-4 questions में repeat होता है। इसे पहचानो और 10 सेकंड में eliminate करो।
जब दोनों assumptions दी हों:
Sequence follow करने से random guessing बंद होती है। 4 options में से 2 eliminate हो जाते हैं — accuracy 50% से 80% पर जाती है।
परीक्षा हॉल में हर Statement-Assumption प्रश्न के लिए यह क्रम अपनाओ:
Step 1 — कथन की मंशा पहचानो (5 सेकंड): यह सुझाव है, तथ्य है, या विज्ञापन है? मंशा से assumptions की दिशा तय होती है।
Step 2 — हर assumption पर Contradiction Test (5 सेकंड प्रति assumption): कथन की मंशा से उल्टा है? → Eliminate।
Step 3 — बचे हुए पर Necessity Test (10 सेकंड प्रति assumption): इसके बिना कथन का अर्थ रहता है? → Implicit नहीं। इसके बिना कथन बेमतलब हो जाता है? → Implicit है।
Step 4 — Feasibility Trap Check (3 सेकंड): Assumption में "पर्याप्त संसाधन" या "यह संभव है" है? → Default implicit नहीं, जब तक कथन में संकेत न हो।
Step 5 — Answer select करो।
कुल समय: 25-35 सेकंड प्रति प्रश्न। 5+ मॉक दे चुके छात्र के लिए यह achievable है।
क्यों यह प्रश्न: यह probation letter वाला प्रश्न SBI PO के उच्चतम-frequency patterns में से एक है — नियुक्ति/नीति संदर्भ में दोनों assumptions का अंतर्निहित होना।
समाधान का रास्ता:
क्यों यह प्रश्न: यह प्रश्न "अति-विशिष्ट assumption" trap का classic उदाहरण है — Assumption II में एक ऐसी बात कही गई जो कथन में न कही गई, न ज़रूरी है।
समाधान का रास्ता:
क्यों यह प्रश्न: यह Contradiction Test का सबसे सीधा उदाहरण है — Assumption I कथन से सीधे उल्टा है।
समाधान का रास्ता:
क्यों यह प्रश्न: यह Feasibility Trap का सबसे साफ़ उदाहरण है — Assumption II में "पर्याप्त धन" की बात है जो सुझाव में नहीं मानी जाती।
समाधान का रास्ता:
Feasibility को हमेशा implicit मानना: "नीति लागू करना संभव है" या "पर्याप्त संसाधन हैं" — ये सुझाव-आधारित कथनों में implicit नहीं होतीं। सुझाव देना संसाधन की गारंटी नहीं है।
Contradiction test skip करना: जो assumption कथन की मंशा से उल्टी हो, उसे implicit मान लेना — यह सबसे बड़ी गलती है। Contradiction test पहला step है, न आखिरी।
Conclusion को assumption समझना: जो बात कथन से निकलती है (output) वह conclusion है, न assumption। "इससे X होगा" — यह conclusion है। "X ज़रूरी है" — यह assumption हो सकती है।
Explicit fact को implicit assumption मानना: जो बात कथन में स्पष्ट रूप से कही गई हो, वह assumption नहीं है। Assumption वह है जो बिना कहे मान ली गई हो।
Over-specific assumptions को accept करना: जब assumption कथन से बहुत आगे जाकर एक विशेष दावा करे — जैसे "6 साल के बाद स्कूल नहीं लेते" — और यह कथन में कहीं नहीं है, तो इसे implicit नहीं मानना।
दोनों assumptions सही लगने पर "Both" चुनना: दोनों का necessity test अलग-अलग करो। एक के implicit होने से दूसरा automatically implicit नहीं हो जाता।