SSC CGL के लिए सूक्ष्म अर्थशास्त्र की मूल अवधारणाएँ — माँग, उपयोगिता और बाज़ार संरचना

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अवधारणा

सूक्ष्म अर्थशास्त्र (Microeconomics) अर्थशास्त्र की वह शाखा है जो व्यक्तिगत आर्थिक इकाइयों — एक उपभोक्ता, एक फर्म, एक उद्योग — के निर्णयों का अध्ययन करती है। समष्टि अर्थशास्त्र (Macroeconomics) पूरी अर्थव्यवस्था को देखता है, जबकि सूक्ष्म अर्थशास्त्र एक "zoom in" करता है — एक परिवार कैसे अपनी आय खर्च करता है, एक फर्म कितना उत्पादन करती है, एक बाज़ार में कीमत कैसे तय होती है।

एक सरल उपमा लो: अगर अर्थव्यवस्था एक जंगल है, तो समष्टि अर्थशास्त्र जंगल का हवाई सर्वेक्षण है और सूक्ष्म अर्थशास्त्र एक-एक पेड़ की जाँच है।

SSC CGL में सूक्ष्म अर्थशास्त्र से सबसे ज़्यादा प्रश्न इन्हीं क्षेत्रों से आते हैं:

1. माँग और आपूर्ति का नियम — कीमत और मात्रा का संबंध।

2. वस्तुओं का वर्गीकरण — सामान्य, निम्न कोटि, गिफेन, पूरक, स्थानापन्न।

3. उपयोगिता सिद्धांत — सीमांत उपयोगिता, ह्रासमान उपयोगिता का नियम।

4. उपभोक्ता संतुलन — बजट रेखा और तटस्थता वक्र।

5. बाज़ार संरचनाएँ — पूर्ण प्रतियोगिता, एकाधिकार, अल्पाधिकार।

6. लागत अवधारणाएँ — अवसर लागत, सीमांत लागत, औसत लागत।

इन छः क्षेत्रों पर पकड़ बना लो — GK का यह हिस्सा सबसे अधिक predictable है।


गहन विश्लेषण

माँग का नियम और उसके अपवाद

माँग का नियम (Law of Demand) कहता है: अन्य बातें समान रहने पर (Ceteris Paribus), किसी वस्तु की कीमत बढ़ने पर उसकी माँग घटती है।

माँग वक्र नीचे की ओर झुका (downward sloping) होता है — यह नियम का दृश्य रूप है।

अपवाद — कब माँग वक्र ऊपर की ओर झुकता है:

| वस्तु का प्रकार | कीमत बढ़ने पर माँग | कारण | |---|---|---| | गिफेन वस्तु | बढ़ती है | आय प्रभाव > प्रतिस्थापन प्रभाव | | विलासिता/Veblen वस्तु | बढ़ती है | प्रतिष्ठा प्रभाव (status symbol) | | अपेक्षित कीमत वृद्धि | बढ़ती है | सट्टेबाज़ी व्यवहार |

गिफेन वस्तु को ठीक से समझो: यह एक निम्न कोटि की वस्तु है जहाँ कीमत बढ़ने पर उपभोक्ता इतना गरीब हो जाता है कि महँगी वस्तुओं को छोड़कर इसी सस्ती वस्तु पर और ज़्यादा निर्भर हो जाता है। उदाहरण: किसी गरीब परिवार के लिए मोटा चावल — अगर उसकी कीमत बढ़े, तो वे मांस-मछली तो छोड़ देंगे, लेकिन चावल और खरीदेंगे।


वस्तुओं का वर्गीकरण

यह SSC CGL का सबसे बार-बार आने वाला हिस्सा है। एक diagram मन में बनाओ:

आय बढ़ने पर माँग बढ़े → सामान्य वस्तु (Normal Good)
आय बढ़ने पर माँग घटे → निम्न कोटि की वस्तु (Inferior Good)
    └── कीमत बढ़ने पर माँग भी बढ़े → गिफेन वस्तु (Giffen Good)

कीमत बढ़ने पर दूसरी वस्तु की माँग बढ़े → स्थानापन्न वस्तुएँ (Substitutes)
कीमत बढ़ने पर दूसरी वस्तु की माँग घटे → पूरक वस्तुएँ (Complements)

पूरक वस्तुओं के उदाहरण: पेट्रोल-कार, चाय-चीनी, पेन-स्याही। स्थानापन्न वस्तुओं के उदाहरण: चाय-कॉफी, मक्खन-मार्जरीन, पेप्सी-कोका कोला।


उपयोगिता सिद्धांत

सीमांत उपयोगिता (Marginal Utility — MU): एक अतिरिक्त इकाई से मिलने वाली अतिरिक्त संतुष्टि।

ह्रासमान सीमांत उपयोगिता का नियम (Law of Diminishing Marginal Utility): जैसे-जैसे किसी वस्तु की अधिक इकाइयाँ उपभोग की जाती हैं, प्रत्येक अगली इकाई से मिलने वाली सीमांत उपयोगिता घटती जाती है। पहली रोटी की उपयोगिता सबसे ज़्यादा, पाँचवीं रोटी की कम।

उपभोक्ता संतुलन की शर्त (Cardinal Utility Approach):

MUxPx=MUyPy=λ (सीमांत उपयोगिता प्रति रुपया समान)\frac{MU_x}{P_x} = \frac{MU_y}{P_y} = \lambda \text{ (सीमांत उपयोगिता प्रति रुपया समान)}

यही "समान सीमांत उपयोगिता का नियम" है।


बजट रेखा और तटस्थता वक्र

बजट रेखा (Budget Line): वह रेखा जो उन सभी संयोजनों को दिखाती है जो उपभोक्ता अपनी दी गई आय से खरीद सकता है।

Pxx+Pyy=MP_x \cdot x + P_y \cdot y = M

बजट रेखा का ढाल (slope): PxPy-\frac{P_x}{P_y}

तटस्थता वक्र (Indifference Curve): वह वक्र जो उन सभी संयोजनों को जोड़ता है जिनसे उपभोक्ता को समान संतुष्टि मिलती है।

तटस्थता वक्र की मुख्य विशेषताएँ:

उपभोक्ता संतुलन: जहाँ बजट रेखा तटस्थता वक्र को स्पर्श करे — वहाँ MRS=PxPyMRS = \frac{P_x}{P_y}


Cobb-Douglas उपयोगिता फलन

SSC CGL में यह सूत्र कभी-कभी numerical के रूप में आता है:

U(x,y)=xaybU(x, y) = x^a \cdot y^b

इष्टतम माँग: x=aa+bMPx,y=ba+bMPyx^* = \frac{a}{a+b} \cdot \frac{M}{P_x}, \quad y^* = \frac{b}{a+b} \cdot \frac{M}{P_y}

सरल भाषा में: उपभोक्ता अपनी आय का aa+b\frac{a}{a+b} हिस्सा xx पर और ba+b\frac{b}{a+b} हिस्सा yy पर खर्च करता है।


बाज़ार संरचनाएँ

| बाज़ार | विक्रेता | क्रेता | उत्पाद | उदाहरण | |---|---|---|---|---| | पूर्ण प्रतियोगिता | अनेक | अनेक | समरूप | गेहूँ बाज़ार | | एकाधिकार | एक | अनेक | अद्वितीय | रेलवे | | अल्पाधिकार | कुछ | अनेक | समरूप/विभेदित | टेलीकॉम | | एकाधिकारी क्रेता (Monopsony) | अनेक | एक | — | श्रम बाज़ार |

एकाधिकार में लाभ-अधिकतमीकरण: MR=MCMR = MC की शर्त पर।

TR=PQTR = P \cdot Q, तो MR=d(TR)dQMR = \frac{d(TR)}{dQ}

रैखिक माँग P=abQP = a - bQ के लिए: MR=a2bQMR = a - 2bQ (MR वक्र का ढाल दोगुना होता है)।


अवसर लागत

अवसर लागत (Opportunity Cost): किसी एक विकल्प चुनने पर छोड़े गए सर्वश्रेष्ठ विकल्प का मूल्य।

अगर तुम ₹10,000 को बैंक में FD में रखने के बजाय व्यवसाय में लगाते हो, तो FD पर मिलने वाला ब्याज अवसर लागत है। यह अवधारणा लागत-लाभ विश्लेषण की नींव है।


शॉर्टकट और युक्तियाँ

patternवस्तु वर्गीकरण का 2×2 Matrix

दो अक्ष याद करो: (1) आय बढ़ने पर माँग का रुख, (2) कीमत बढ़ने पर माँग का रुख।

  • आय↑ → माँग↑ = सामान्य वस्तु
  • आय↑ → माँग↓ = निम्न कोटि
  • आय↑ → माँग↓ AND कीमत↑ → माँग↑ = गिफेन (निम्न कोटि का विशेष case)
  • एक वस्तु की कीमत↑ → दूसरी की माँग↑ = Substitute
  • एक वस्तु की कीमत↑ → दूसरी की माँग↓ = Complement

इस matrix को एक बार लिखकर याद करो — परीक्षा में 4-5 प्रश्न इसी से आते हैं। सामान्य method में हर question अलग सोचने पर 40-50 सेकंड, इस matrix से 10-12 सेकंड।

patternMR वक्र का 'Double Slope' नियम

रैखिक माँग वक्र P=abQP = a - bQ दिया हो, तो MR निकालने के लिए: slope को दोगुना करो, intercept वही रहता है।

P=1002QP = 100 - 2QMR=1004QMR = 100 - 4Q

P=803QP = 80 - 3QMR=806QMR = 80 - 6Q

यह गणना algebraically करने पर 3-4 steps लगती हैं। इस shortcut से 1 step में हो जाता है। Monopoly numericals में हर बार काम आता है।

substitutionCobb-Douglas का 'Income Share' shortcut

U=xaybU = x^a \cdot y^b में xx की इष्टतम माँग निकालनी हो:

Step 1: xx का income share निकालो = aa+b\frac{a}{a+b} Step 2: इसे MPx\frac{M}{P_x} से गुणा करो।

U=x0.5y0.5U = x^{0.5} y^{0.5}, M=360M = 360, Px=4P_x = 4: x=0.5{1}×{360}{4}=0.5×90=45x^* = \frac{0.5}\{1\} \times \frac\{360\}\{4\} = 0.5 \times 90 = 45

Lagrangian method से यही answer 6-7 steps में मिलता। यह shortcut 2 steps में देता है।

eliminationएकाधिकार संतुलन: MR=MC से Q निकालो, फिर P

Monopoly numericals में हमेशा यही sequence काम करती है:

  1. MR लिखो (माँग वक्र के slope को double करो)
  2. MR = MC रखो → Q निकालो
  3. Q को माँग वक्र में रखो → P निकालो

P=1002QP = 100 - 2Q, MC=20MC = 20: MR=1004Q=20MR = 100 - 4Q = 20Q=20Q = 20P=10040=60P = 100 - 40 = 60

Options में से गलत answers को तुरंत eliminate करो: P कभी MC से कम नहीं होगी monopoly में, इसलिए ₹20 वाला option तुरंत बाहर।

pattern'SIGN' याद रखो — वस्तु संबंध का संकेत

Cross Price Elasticity of Demand (XED) का sign बताता है relationship:

  • XED > 0 (धनात्मक) → Substitute goods (चाय-कॉफी)
  • XED < 0 (ऋणात्मक) → Complement goods (पेट्रोल-कार)
  • XED = 0 → असंबंधित वस्तुएँ

Income Elasticity of Demand (YED):

  • YED > 0 → Normal good
  • YED < 0 → Inferior good
  • YED > 1 → Luxury good

यह "SIGN" approach options eliminate करने में 15-20 सेकंड बचाता है।


तेज़-समाधान रूपरेखा

परीक्षा हॉल में सूक्ष्म अर्थशास्त्र का प्रश्न देखते ही यह decision tree चलाओ:

क्या प्रश्न वस्तु के प्रकार (Normal/Inferior/Giffen/Substitute/Complement) के बारे में है? → हाँ: "कीमत/आय बढ़ने पर माँग का क्या होता है?" — 2×2 matrix से तुरंत answer।

क्या प्रश्न numerical है (Monopoly या Cobb-Douglas)? → Monopoly: MR=MC sequence → Q → P। → Cobb-Douglas: Income share shortcut।

क्या प्रश्न बाज़ार संरचना (Market Structure) के बारे में है? → विक्रेताओं और क्रेताओं की संख्या पहचानो → table से match करो।

क्या प्रश्न माँग के नियम के अपवाद के बारे में है? → ऊपर झुका माँग वक्र = गिफेन वस्तु → आय प्रभाव > प्रतिस्थापन प्रभाव।

क्या प्रश्न पूरक/स्थानापन्न वस्तुओं का है? → "एक साथ उपयोग" = Complement; "बदला जा सकता है" = Substitute।

किसी भी प्रश्न पर 25 सेकंड से ज़्यादा मत रुको — GK में educated guess लगाकर आगे बढ़ो।


हल किए गए PYQs

क्यों यह प्रश्न: माँग के नियम की सबसे basic definition — यह हर CGL की GK section में किसी न किसी रूप में आता है। समाधान का रास्ता: "कीमत बढ़ने पर माँग घटती है" — यही definition है। घटते प्रतिफल का नियम उत्पादन से जुड़ा है, आपूर्ति का नियम उल्टा संबंध दिखाता है, समान सीमांत उपयोगिता उपभोक्ता संतुलन से जुड़ा है।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
When the price of a good rises and its demand falls, keeping all other factors constant, this principle is known as:
जब किसी वस्तु की कीमत बढ़ती है और अन्य सभी कारकों को स्थिर रखते हुए उसकी मांग घटती है, तो इस सिद्धांत को क्या कहते हैं?
  1. Law of Diminishing Returns
  2. Law of Supply
  3. Law of Equi-marginal Utility
  4. Law of Demand
  1. घटते प्रतिफल का नियम
  2. आपूर्ति का नियम
  3. समान सीमांत उपयोगिता का नियम
  4. मांग का नियम
Solutionसमाधान
The Law of Demand states that, ceteris paribus (all other things being equal), when the price of a good increases, the quantity demanded decreases, and vice versa. This inverse relationship between price and quantity demanded is a fundamental concept in microeconomics.
मांग का नियम कहता है कि, अन्य सभी चीजें समान रहने पर (ceteris paribus), जब किसी वस्तु की कीमत बढ़ती है, तो उसकी मांग की गई मात्रा घट जाती है और इसके विपरीत भी। कीमत और मांग की गई मात्रा के बीच यह विपरीत संबंध सूक्ष्म अर्थशास्त्र की एक मूलभूत अवधारणा है।

क्यों यह प्रश्न: Normal vs Inferior goods का distinction — यह वर्गीकरण SSC CGL में बार-बार आता है, अक्सर Giffen goods के साथ confuse किया जाता है। समाधान का रास्ता: "आय बढ़ने पर माँग बढ़े = Normal" — यह सीधा definition है। Giffen एक Inferior good का subtype है, Substitute एक अलग category है।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
If a consumer's income increases and the demand for a particular good also increases, that good is called a:
यदि किसी उपभोक्ता की आय बढ़ती है और किसी विशेष वस्तु की मांग भी बढ़ती है, तो उस वस्तु को क्या कहते हैं?
  1. Giffen good
  2. Normal good
  3. Substitute good
  4. Inferior good
  1. गिफेन वस्तु
  2. सामान्य वस्तु
  3. प्रतिस्थापन वस्तु
  4. निम्न कोटि की वस्तु
Solutionसमाधान
A normal good is one for which demand increases as consumer income rises. In contrast, an inferior good sees a decrease in demand when income rises. Giffen goods are a special type of inferior good where demand rises as price increases, which is an exception to the Law of Demand.
सामान्य वस्तु वह होती है जिसकी मांग उपभोक्ता की आय बढ़ने पर बढ़ती है। इसके विपरीत, निम्न कोटि की वस्तु की मांग आय बढ़ने पर घट जाती है। गिफेन वस्तु निम्न कोटि की वस्तु का एक विशेष प्रकार है जिसमें कीमत बढ़ने पर मांग बढ़ती है, जो मांग के नियम का अपवाद है।

क्यों यह प्रश्न: गिफेन वस्तु का माँग वक्र — यह एक conceptual trap है। अधिकांश candidates गलती से "ऊर्ध्वाधर" या "क्षैतिज" choose करते हैं। समाधान का रास्ता: गिफेन वस्तु माँग के नियम का उल्लंघन करती है — कीमत बढ़ने पर माँग बढ़ती है, इसलिए curve ऊपर की ओर झुकता है (positive slope)। "धनात्मक ढाल" = ऊपर की ओर।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
The demand curve for a 'Giffen Good' is:
'गिफेन वस्तु' के लिए माँग वक्र कैसा होता है?
  1. Downward sloping (negative slope)
  2. Perfectly vertical (perfectly inelastic)
  3. Upward sloping (positive slope)
  4. Perfectly horizontal (infinitely elastic)
  1. नीचे की ओर झुका हुआ (ऋणात्मक ढाल वाला)
  2. पूरी तरह ऊर्ध्वाधर (पूर्णतः बेलोचदार)
  3. ऊपर की ओर झुका हुआ (धनात्मक ढाल वाला)
  4. पूरी तरह क्षैतिज (अनंत लोचदार)
Solutionसमाधान
A Giffen Good is an inferior good for which demand increases as its price rises, violating the normal Law of Demand. This happens because the income effect (which reduces purchasing power) dominates the substitution effect. As a result, its demand curve slopes upward from left to right.
गिफेन वस्तु एक निम्न कोटि की वस्तु है जिसकी माँग कीमत बढ़ने पर बढ़ जाती है, जो माँग के सामान्य नियम का उल्लंघन करती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आय प्रभाव (जो क्रय शक्ति को कम करता है) प्रतिस्थापन प्रभाव पर हावी हो जाता है। इसलिए इसका माँग वक्र बाईं से दाईं ओर ऊपर की ओर झुका होता है।

क्यों यह प्रश्न: Cobb-Douglas numerical — यह advanced question है जो CGL Tier-I में भी आ चुका है। समाधान का रास्ता: Income share shortcut सीधे लगाओ: a=b=0.5a = b = 0.5, इसलिए xx का share = 0.5/1.0=0.50.5/1.0 = 0.5। आय का आधा xx पर = 360/2=180360/2 = 180xx की कीमत ₹4, इसलिए x=180/4=45x^* = 180/4 = 45

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
A consumer has a utility function U(x, y) = x^0.5 * y^0.5. The price of good x is ₹4, price of good y is ₹9, and income is ₹360. What is the optimal quantity of good x consumed?
एक उपभोक्ता की उपयोगिता फलन U(x, y) = x^0.5 * y^0.5 है। वस्तु x की कीमत ₹4 है, वस्तु y की कीमत ₹9 है और आय ₹360 है। वस्तु x की अनुकूलतम मात्रा कितनी होगी?
  1. 36
  2. 45
  3. 40
  4. 20
  1. 36
  2. 45
  3. 40
  4. 20
Solutionसमाधान
For a Cobb-Douglas utility function U = x^a * y^b, the optimal demand for x is: x* = (a/(a+b)) * (M/Px). Here a = b = 0.5, so x* = (0.5/1.0) * (360/4) = 0.5 * 90 = 45. The consumer allocates half the income to each good, spending ₹180 on x, giving 180/4 = 45 units.
Cobb-Douglas उपयोगिता फलन U = x^a * y^b के लिए, x की अनुकूलतम माँग: x* = (a/(a+b)) * (M/Px) होती है। यहाँ a = b = 0.5 है, इसलिए x* = (0.5/1.0) * (360/4) = 0.5 * 90 = 45। उपभोक्ता अपनी आय का आधा भाग x पर खर्च करता है: ₹180/₹4 = 45 इकाइयाँ।

क्यों यह प्रश्न: बाज़ार संरचना — "एक विक्रेता" की definition Monopoly और Monopsony के बीच confuse होती है। समाधान का रास्ता: "विक्रेता" = seller side देखो। एक विक्रेता = Monopoly। एक क्रेता = Monopsony। Oligopoly में "कुछ" (few) विक्रेता होते हैं।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
A market structure where there is only ONE seller and many buyers is called:
वह बाजार संरचना जिसमें केवल एक विक्रेता और अनेक क्रेता होते हैं, उसे क्या कहते हैं?
  1. Perfect Competition
  2. Oligopoly
  3. Monopsony
  4. Monopoly
  1. पूर्ण प्रतियोगिता (Perfect Competition)
  2. अल्पाधिकार (Oligopoly)
  3. एकाधिकारी क्रेता (Monopsony)
  4. एकाधिकार (Monopoly)
Solutionसमाधान
A Monopoly is a market structure where a single seller controls the entire supply of a product with no close substitutes, facing many buyers. Oligopoly has a few large sellers; Monopsony has a single buyer; and Perfect Competition has many sellers and buyers.
एकाधिकार (Monopoly) वह बाजार संरचना है जिसमें केवल एक विक्रेता होता है जो पूरे बाजार की आपूर्ति को नियंत्रित करता है और उत्पाद का कोई करीबी विकल्प नहीं होता। Oligopoly में कुछ बड़े विक्रेता होते हैं, Monopsony में एकमात्र क्रेता होता है, और Perfect Competition में अनेक विक्रेता व क्रेता होते हैं।

क्यों यह प्रश्न: पूरक वस्तुओं की पहचान — cross-price effect का concept। समाधान का रास्ता: "एक की कीमत बढ़ने पर दोनों की माँग घटे" = साथ-साथ use होती हैं = Complement। अगर दूसरी की माँग बढ़ती, तो Substitute होता।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
When the price of a good rises and its demand falls, while the demand for another good also falls, the two goods are called:
जब किसी वस्तु की कीमत बढ़ने पर उसकी माँग घटती है और साथ ही किसी अन्य वस्तु की माँग भी घट जाती है, तो ये दोनों वस्तुएँ क्या कहलाती हैं?
  1. Complementary goods
  2. Giffen goods
  3. Inferior goods
  4. Substitute goods
  1. पूरक वस्तुएँ (Complementary goods)
  2. गिफेन वस्तुएँ (Giffen goods)
  3. निम्न कोटि की वस्तुएँ (Inferior goods)
  4. स्थानापन्न वस्तुएँ (Substitute goods)
Solutionसमाधान
Complementary goods are those consumed together, such as petrol and cars. When the price of one rises and its demand falls, the demand for its complement also falls. Substitute goods, by contrast, see increased demand when the price of the alternative rises.
पूरक वस्तुएँ वे होती हैं जिन्हें एक साथ उपयोग किया जाता है, जैसे पेट्रोल और कार। जब एक वस्तु की कीमत बढ़ती है और उसकी माँग घटती है, तो उसकी पूरक वस्तु की माँग भी घट जाती है। इसके विपरीत, स्थानापन्न वस्तुओं में एक की कीमत बढ़ने पर दूसरे की माँग बढ़ती है।

क्यों यह प्रश्न: निम्न कोटि की वस्तु vs गिफेन वस्तु — यह distinction candidates को सबसे ज़्यादा confuse करता है। समाधान का रास्ता: "आय बढ़ने पर माँग घटे" = Inferior good। Giffen एक Inferior का subtype है — सब Giffen वस्तुएँ Inferior होती हैं, लेकिन सब Inferior वस्तुएँ Giffen नहीं होतीं।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
If a consumer's income increases and the demand for a particular good decreases, that good is classified as:
यदि किसी उपभोक्ता की आय बढ़ने पर किसी विशेष वस्तु की माँग घट जाती है, तो उस वस्तु को क्या कहा जाता है?
  1. Luxury good
  2. Giffen good
  3. Normal good
  4. Inferior good
  1. विलासिता वस्तु (Luxury good)
  2. गिफेन वस्तु (Giffen good)
  3. सामान्य वस्तु (Normal good)
  4. निम्न कोटि की वस्तु (Inferior good)
Solutionसमाधान
An inferior good is one for which demand decreases as consumer income rises, because consumers switch to higher-quality substitutes. Examples include coarse grains and low-quality cloth. A normal good sees demand rise with income, while a Giffen good is a special type of inferior good with an upward-sloping demand curve.
निम्न कोटि की वस्तु वह होती है जिसकी माँग उपभोक्ता की आय बढ़ने पर घट जाती है, क्योंकि उपभोक्ता बेहतर विकल्पों की ओर चला जाता है। उदाहरण के तौर पर मोटे अनाज और सस्ता कपड़ा शामिल हैं। सामान्य वस्तु में आय बढ़ने पर माँग भी बढ़ती है, जबकि गिफेन वस्तु एक विशेष प्रकार की निम्न कोटि की वस्तु है जिसकी माँग वक्र ऊपर की ओर झुकी होती है।

क्यों यह प्रश्न: Monopoly numerical — MR=MC condition का application। यह Tier-I में भी आ चुका है। समाधान का रास्ता: Double slope shortcut: P=1002QP = 100 - 2QMR=1004QMR = 100 - 4QMR=MCMR = MC: 1004Q=20100 - 4Q = 204Q=804Q = 80Q=20Q = 20। फिर P=1002(20)=60P = 100 - 2(20) = 60। Options में Q=20, P=₹60 check करो।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
A monopolist faces the demand curve P = 100 − 2Q and has a constant Marginal Cost of ₹20. What is the profit-maximising quantity and price?
एक एकाधिकारी फर्म को माँग वक्र P = 100 − 2Q का सामना करना पड़ता है और उसकी सीमांत लागत स्थिर ₹20 है। लाभ-अधिकतमीकरण मात्रा और कीमत क्या है?
  1. Q = 20, P = ₹40
  2. Q = 20, P = ₹60
  3. Q = 25, P = ₹50
  4. Q = 40, P = ₹20
  1. Q = 20, P = ₹40
  2. Q = 20, P = ₹60
  3. Q = 25, P = ₹50
  4. Q = 40, P = ₹20
Solutionसमाधान
For a monopolist, MR = MC for profit maximisation. TR = PQ = (100 − 2Q)Q = 100Q − 2Q². MR = dTR/dQ = 100 − 4Q. Setting MR = MC: 100 − 4Q = 20 → 4Q = 80 → Q = 20. Then P = 100 − 2(20) = 100 − 40 = ₹60.
एकाधिकारी फर्म के लिए लाभ-अधिकतमीकरण शर्त MR = MC है। TR = (100 − 2Q)Q = 100Q − 2Q²। MR = 100 − 4Q। MR = MC रखने पर: 100 − 4Q = 20 → Q = 20। फिर P = 100 − 2(20) = ₹60।

आम गलतियाँ


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