Learn / SSC CGL / finance-and-accounts / fundamentals-of-financial-accounting SSC CGL लेखांकन: मूल प्रविष्टि की पुस्तकें — जर्नल, नकद बही, क्रय-विक्रय पुस्तक
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अवधारणा
लेखांकन की पूरी प्रक्रिया एक sequence में चलती है — लेन-देन होता है, पहले किसी पुस्तक में दर्ज होता है, फिर खाता-बही (Ledger) में जाता है, फिर तलपट (Trial Balance) बनता है, अंत में अंतिम खाते (Final Accounts)। इस sequence में जो पहली पुस्तक है — जहाँ लेन-देन सबसे पहले दर्ज होता है — उसे मूल प्रविष्टि की पुस्तक (Book of Original Entry) कहते हैं।
एक सरल उपमा: मान लो तुम डायरी रखते हो। दिन में जो भी हुआ, शाम को डायरी में लिखते हो — यह मूल प्रविष्टि है। बाद में उसी जानकारी को category-wise folder में रखते हो — यह खाता-बही है।
मूल प्रविष्टि की पुस्तकें दो प्रकार की होती हैं:
1. जर्नल (Journal / Daybook): यह सबसे बुनियादी पुस्तक है। जो लेन-देन किसी विशेष सहायक पुस्तक में नहीं जाते, वे यहाँ दर्ज होते हैं। इसे "उचित जर्नल" या "Journal Proper" भी कहते हैं।
2. सहायक पुस्तकें (Subsidiary Books / Special Journals): ये जर्नल का विस्तार हैं। जब व्यापार बड़ा हो और एक ही प्रकार के बहुत लेन-देन हों, तो उनके लिए अलग-अलग पुस्तकें रखी जाती हैं:
- नकद बही (Cash Book): नकद और बैंक लेन-देन
- क्रय पुस्तक (Purchase Day Book): उधार खरीद
- विक्रय पुस्तक (Sales Day Book): उधार बिक्री
- क्रय वापसी पुस्तक (Purchase Return Book): उधार खरीद की वापसी
- विक्रय वापसी पुस्तक (Sales Return Book): उधार बिक्री की वापसी
- प्राप्य विनिमय पुस्तक (Bills Receivable Book): प्राप्त विनिमय पत्र
- देय विनिमय पुस्तक (Bills Payable Book): स्वीकृत विनिमय पत्र
SSC CGL में इस topic से direct definition प्रश्न आते हैं, साथ ही calculation-based प्रश्न भी — खासकर व्यापारिक छूट और विनिमय पत्र पर।
गहन विश्लेषण
जर्नल (Journal Proper) — कब उपयोग होता है
जर्नल में वे लेन-देन दर्ज होते हैं जो किसी भी सहायक पुस्तक में नहीं जाते:
- सम्पत्ति की खरीद/बिक्री (नकद नहीं, उधार — लेकिन माल नहीं)
- मूल्यह्रास (Depreciation) की प्रविष्टि
- बट्टे खाते में डालना (Bad Debts written off)
- समायोजन प्रविष्टियाँ (Adjusting Entries)
- उद्घाटन प्रविष्टि (Opening Entry)
- त्रुटि सुधार (Rectification Entries)
जर्नल की format: तिथि | विवरण | डेबिट (₹) | क्रेडिट (₹)
नकद बही (Cash Book) — दोहरी भूमिका
यह सबसे महत्वपूर्ण सहायक पुस्तक है। इसकी खासियत यह है कि यह एक साथ जर्नल भी है और खाता-बही भी। नकद और बैंक के लेन-देन को अलग से खाता-बही में post करने की जरूरत नहीं पड़ती।
नकद बही तीन प्रकार की होती है:
- एक-स्तम्भीय (Single Column): केवल नकद
- द्वि-स्तम्भीय (Double Column): नकद + बट्टा (Discount)
- त्रि-स्तम्भीय (Triple Column): नकद + बैंक + बट्टा
महत्वपूर्ण: नकद बही में केवल नकद छूट (Cash Discount) दिखाई जाती है — व्यापारिक छूट (Trade Discount) कभी नहीं।
क्रय पुस्तक (Purchase Day Book)
इसमें केवल उधार खरीद दर्ज होती है — नकद खरीद नहीं।
क्रय पुस्तक में दर्ज राशि = चालान मूल्य − व्यापारिक छूट + यदि माल-भाड़ा चालान में शामिल हो
देखो — यह सूत्र परीक्षा में बार-बार काम आता है:
क्रय पुस्तक राशि=सूची मूल्य−व्यापारिक छूट+देय माल-भाड़ा (यदि हो)
नकद छूट क्रय पुस्तक में नहीं घटाई जाती — वह तो तब मिलती है जब भुगतान किया जाए।
विक्रय पुस्तक (Sales Day Book)
इसमें केवल उधार बिक्री दर्ज होती है।
विक्रय पुस्तक राशि=सूची मूल्य−व्यापारिक छूट
व्यापारिक छूट बनाम नकद छूट — परीक्षा का core trap
| बिंदु | व्यापारिक छूट | नकद छूट |
|---|---|---|
| कब मिलती है | खरीद/बिक्री के समय | भुगतान के समय |
| पुस्तकों में | घटाकर शुद्ध राशि दर्ज | अलग खाते में दर्ज |
| क्रय/विक्रय पुस्तक में | हाँ, घटाई जाती है | नहीं |
| नकद बही में | नहीं | हाँ, दिखाई जाती है |
विनिमय पत्र (Bills of Exchange) — बट्टा गणना
जब कोई विनिमय पत्र परिपक्वता से पहले बैंक से भुनाया जाए:
बट्टा=बिल राशि×100दर×12शेष महीने
शेष महीने = परिपक्वता तिथि − भुनाने की तिथि
अनादरण (Dishonour) पर: ग्राहक के खाते में डेबिट = बिल राशि + नोटिंग चार्ज
Journal Proper में क्या दर्ज होता है — quick list
- मूल्यह्रास की प्रविष्टि
- प्रारम्भिक प्रविष्टि
- उधार पर सम्पत्ति की खरीद (माल नहीं)
- सामान मालिक के व्यक्तिगत उपयोग के लिए निकाला गया
- त्रुटि सुधार प्रविष्टियाँ
शॉर्टकट और युक्तियाँ
जब भी क्रय पुस्तक या विक्रय पुस्तक में दर्ज राशि पूछी जाए और व्यापारिक छूट दी हो — पहले छूट घटाओ, फिर दर्ज करो। नकद छूट को ignore करो — वह यहाँ आती ही नहीं।
उदाहरण: ₹60,000 का माल, 20% व्यापारिक छूट, 5% नकद छूट।
- Standard method: पहले सोचो कौन सी छूट लगती है, कौन नहीं — 30 सेकंड
- Shortcut: "क्रय/विक्रय पुस्तक में = चालान मूल्य − व्यापारिक छूट" — 8 सेकंड
- दर्ज राशि = ₹60,000 − ₹12,000 = ₹48,000 (नकद छूट ignore)
बिल भुनाने पर बट्टा गणना में शेष अवधि सही गिनना ज़रूरी है। परिपक्वता तिथि से भुनाने की तिथि घटाओ।
Standard method: कैलेंडर देखकर महीने गिनो — 40 सेकंड
Shortcut: परिपक्वता माह − भुनाने का माह = शेष महीने, फिर formula:
बट्टा=बिल×100दर×12शेष महीने
उदाहरण: ₹50,000 × 12% × 2/12 = ₹1,000 — 15 सेकंड में।
परीक्षा में पूछे: "Cash Book किसका काम करती है?" — विकल्पों में Journal + Ledger दोनों होंगे।
Eliminate करो: Balance Sheet? नहीं — वह Final Account है। Trial Balance? नहीं — वह विवरण है। Journal Proper? नहीं — वह अलग है। बचता है: Ledger।
नकद बही = Journal + Ledger — यह 5 सेकंड का elimination है।
Standard method: concept याद करना — variable time।
Purchases Book में माल-भाड़ा (freight) का treatment:
- अगर माल-भाड़ा आपूर्तिकर्ता का है और चालान में शामिल है → जोड़ो
- अगर माल-भाड़ा अलग से खर्च है → Purchases Book में नहीं, अलग खाते में।
उदाहरण: ₹50,000 − 15% छूट + ₹1,500 माल-भाड़ा (चालान में):
= ₹50,000 − ₹7,500 + ₹1,500 = ₹44,000।
Standard approach: confuse होकर माल-भाड़ा घटाना — गलत जवाब।
Shortcut: "चालान में है? जोड़ो। बाहर है? अलग खाता।" — 10 सेकंड निर्णय।
जब बिल अनादृत (dishonour) हो: ग्राहक का खाता डेबिट = बिल राशि + नोटिंग चार्ज।
नोटिंग चार्ज कभी घटाओ मत, हमेशा जोड़ो — वह ग्राहक की गलती का खर्च है।
Standard method: सोचो कि नोटिंग चार्ज किसका है — 20 सेकंड।
Shortcut: "अनादरण = बिल + नोटिंग, हमेशा जोड़ो" — 5 सेकंड।
तेज़-समाधान रूपरेखा
परीक्षा हॉल में इस topic का प्रश्न मिले तो यह sequence follow करो:
Step 1 — लेन-देन की प्रकृति पहचानो:
- नकद/बैंक → नकद बही
- उधार खरीद (माल) → क्रय पुस्तक
- उधार बिक्री (माल) → विक्रय पुस्तक
- विनिमय पत्र प्राप्त → Bills Receivable Book
- बाकी सब → Journal Proper
Step 2 — राशि की गणना:
- व्यापारिक छूट दी है → घटाओ (क्रय/विक्रय पुस्तक में)
- नकद छूट दी है → ignore (क्रय/विक्रय पुस्तक में)
- माल-भाड़ा चालान में है → जोड़ो
Step 3 — विनिमय पत्र का प्रश्न है तो:
- परिपक्वता तिथि निकालो
- शेष महीने गिनो
- बट्टा = राशि × दर/100 × महीने/12
- अनादरण → बिल + नोटिंग चार्ज जोड़ो
Step 4 — definition प्रश्न है तो elimination:
- Ledger, Trial Balance, Balance Sheet को पहले हटाओ
- बची हुई पुस्तक → मूल प्रविष्टि की पुस्तक
हल किए गए PYQs
क्यों यह प्रश्न: यह सबसे बुनियादी definition प्रश्न है जो SSC CGL में बार-बार आता है। जर्नल को मूल प्रविष्टि की पुस्तक क्यों कहते हैं — यह अवधारणा स्पष्ट होनी चाहिए।
Which of the following is called the 'Book of Original Entry'?
निम्नलिखित में से किसे 'मूल प्रविष्टि की पुस्तक' (Book of Original Entry) कहा जाता है?
- Journal
- Ledger
- Balance Sheet
- Trial Balance
- जर्नल
- खाता-बही (Ledger)
- तुलन-पत्र (Balance Sheet)
- तलपट (Trial Balance)
Solutionसमाधान
A Journal is called the Book of Original Entry because all financial transactions are first recorded in it before being posted to the Ledger. The Ledger is a Book of Final Entry, while Balance Sheet and Trial Balance are statements, not books of original entry.
जर्नल को 'मूल प्रविष्टि की पुस्तक' कहा जाता है क्योंकि सभी वित्तीय लेन-देन सबसे पहले इसी में दर्ज किए जाते हैं, उसके बाद खाता-बही में पोस्ट किए जाते हैं। खाता-बही अंतिम प्रविष्टि की पुस्तक है, जबकि तुलन-पत्र और तलपट विवरण-पत्र हैं, न कि मूल प्रविष्टि की पुस्तकें।
समाधान का रास्ता: Elimination लगाओ। Ledger = अंतिम प्रविष्टि की पुस्तक। Balance Sheet और Trial Balance = विवरण-पत्र, पुस्तकें नहीं। बचता है Journal — जहाँ लेन-देन सबसे पहले दर्ज होते हैं।
क्यों यह प्रश्न: नकद बही की दोहरी भूमिका — यह SSC CGL का favourite trap है। "Journal + ___" के blank में क्या आएगा।
The Cash Book is a type of book of original entry that serves the dual purpose of being both a journal and a ________.
रोकड़ पुस्तक (Cash Book) मूल प्रविष्टि की एक ऐसी पुस्तक है जो जर्नल और ________ दोनों का काम करती है।
- Ledger
- Journal Proper
- Balance Sheet
- Purchase Day Book
- खाता-बही (Ledger)
- उचित जर्नल (Journal Proper)
- तुलन-पत्र (Balance Sheet)
- क्रय दिवस पुस्तक (Purchase Day Book)
Solutionसमाधान
The Cash Book serves a dual purpose: it acts as a journal (book of original entry) because cash and bank transactions are first recorded in it, and it also acts as a Ledger because it maintains the Cash Account and Bank Account directly, eliminating the need to post them separately to the Ledger.
रोकड़ पुस्तक दोहरा कार्य करती है: यह जर्नल की तरह काम करती है क्योंकि नकद और बैंक लेन-देन पहले इसी में दर्ज होते हैं, और खाता-बही की तरह भी काम करती है क्योंकि यह सीधे नकद खाता और बैंक खाता बनाए रखती है, जिससे उन्हें अलग से खाता-बही में पोस्ट करने की जरूरत नहीं होती।
समाधान का रास्ता: नकद बही में नकद और बैंक के लेन-देन पहले दर्ज होते हैं (जर्नल का काम) और नकद खाता व बैंक खाता सीधे यहीं बनाए जाते हैं (Ledger का काम)। इसलिए उत्तर = Ledger।
क्यों यह प्रश्न: नकद बही का उपयोग — यह conceptual प्रश्न है जो direct पूछता है कि किस पुस्तक में नकद और बैंक दोनों दर्ज होते हैं।
Which book of original entry is used to record all cash and bank transactions of a business?
व्यापार के सभी नकद और बैंक लेनदेन को रिकॉर्ड करने के लिए किस मूल प्रविष्टि पुस्तक का उपयोग किया जाता है?
- Cash Book
- Purchases Book
- Journal Proper
- Bills Receivable Book
- कैश बुक (नकद पुस्तक)
- क्रय पुस्तक
- जर्नल प्रॉपर
- प्राप्य विनिमय पुस्तक (Bills Receivable Book)
Solutionसमाधान
The Cash Book is a special journal that records all receipts and payments in cash as well as transactions through the bank. It serves the dual purpose of a journal and a ledger for cash and bank accounts.
कैश बुक एक विशेष जर्नल होती है जिसमें नकद और बैंक के सभी लेनदेन दर्ज किए जाते हैं। यह नकद और बैंक खातों के लिए जर्नल और खाता बही दोनों का काम करती है।
समाधान का रास्ता: क्रय पुस्तक → उधार खरीद। Journal Proper → विशेष लेन-देन। Bills Receivable Book → विनिमय पत्र। नकद और बैंक दोनों → Cash Book।
क्यों यह प्रश्न: यह calculation-based प्रश्न है। व्यापारिक छूट को क्रय पुस्तक में घटाना — यही सबसे common गलती है जो अभ्यर्थी करते हैं।
A trader purchased goods worth ₹50,000 on credit from Ram & Co. with a trade discount of 10%. What amount will be recorded in the Purchases Book?
एक व्यापारी ने राम एंड कंपनी से ₹50,000 का माल 10% व्यापारिक छूट पर उधार खरीदा। क्रय पुस्तक में कितनी राशि दर्ज की जाएगी?
- ₹50,000
- ₹55,000
- ₹40,000
- ₹45,000
- ₹50,000
- ₹55,000
- ₹40,000
- ₹45,000
Solutionसमाधान
Trade discount is deducted before recording in the Purchases Book. Amount recorded = ₹50,000 − 10% of ₹50,000 = ₹50,000 − ₹5,000 = ₹45,000. Cash discount is NOT deducted at the time of recording in subsidiary books.
क्रय पुस्तक में दर्ज करने से पहले व्यापारिक छूट घटाई जाती है। दर्ज राशि = ₹50,000 − 10% × ₹50,000 = ₹50,000 − ₹5,000 = ₹45,000। नकद छूट को सहायक पुस्तकों में दर्ज करते समय नहीं घटाया जाता।
समाधान का रास्ता:
- चालान मूल्य = ₹50,000
- व्यापारिक छूट = 10% × ₹50,000 = ₹5,000
- क्रय पुस्तक में राशि = ₹50,000 − ₹5,000 = ₹45,000
- नकद छूट इस चरण में irrelevant है।
क्यों यह प्रश्न: यह प्रश्न दो चीज़ें एक साथ पूछता है — किस पुस्तक में दर्ज होगा और कितनी राशि। व्यापारिक छूट का treatment जानना जरूरी है।
A trader sold goods worth ₹15,000 to Ramesh on credit at a trade discount of 10%. In which book of original entry will this transaction be recorded, and what amount will be recorded?
एक व्यापारी ने रमेश को ₹15,000 का माल उधार पर बेचा, जिस पर 10% व्यापार छूट (trade discount) दी गई। यह लेन-देन किस मूल प्रविष्टि की पुस्तक में दर्ज होगा और कितनी राशि दर्ज की जाएगी?
- Sales Journal; ₹13,500
- Cash Book; ₹15,000
- Sales Journal; ₹15,000
- General Journal; ₹13,500
- विक्रय जर्नल; ₹13,500
- रोकड़ बही; ₹15,000
- विक्रय जर्नल; ₹15,000
- सामान्य जर्नल; ₹13,500
Solutionसमाधान
Credit sales are recorded in the Sales Journal (Sales Day Book). Trade discount is deducted before recording: ₹15,000 × 10% = ₹1,500 discount, so the recorded amount = ₹15,000 − ₹1,500 = ₹13,500. Trade discount is never shown separately in the books; only the net amount is entered. The Cash Book is used only for cash/bank transactions, so it does not apply here.
उधार बिक्री को विक्रय जर्नल (Sales Day Book) में दर्ज किया जाता है। व्यापार छूट दर्ज करने से पहले घटाई जाती है: ₹15,000 × 10% = ₹1,500 छूट, इसलिए दर्ज की जाने वाली राशि = ₹15,000 − ₹1,500 = ₹13,500। व्यापार छूट को पुस्तकों में अलग से नहीं दिखाया जाता; केवल शुद्ध राशि ही दर्ज होती है। रोकड़ बही केवल नकद/बैंक लेन-देन के लिए होती है, इसलिए यहाँ वह लागू नहीं होती।
समाधान का रास्ता:
- उधार बिक्री → विक्रय जर्नल (Sales Day Book)
- व्यापारिक छूट = 10% × ₹15,000 = ₹1,500
- दर्ज राशि = ₹15,000 − ₹1,500 = ₹13,500
- रोकड़ बही गलत है क्योंकि यह उधार लेन-देन है।
क्यों यह प्रश्न: बिल बट्टा calculation — शेष अवधि सही निकालना ही असली challenge है।
A trader draws a Bill of Exchange on 1st March 2024 for ₹50,000 at 3 months. The bill is discounted with the bank on 1st April 2024 at 12% per annum. What is the amount of discount charged by the bank?
एक व्यापारी ने 1 मार्च 2024 को ₹50,000 का 3 महीने का विनिमय पत्र (Bill of Exchange) खींचा। इस बिल को 1 अप्रैल 2024 को बैंक से 12% प्रति वर्ष की दर से भुनाया गया। बैंक द्वारा लगाया गया बट्टा (discount) कितना होगा?
- ₹1,000
- ₹500
- ₹1,500
- ₹2,000
- ₹1,000
- ₹500
- ₹1,500
- ₹2,000
Solutionसमाधान
The bill matures on 1st June 2024 (3 months from 1st March). When discounted on 1st April 2024, the remaining period is 2 months. Discount = ₹50,000 × 12/100 × 2/12 = ₹50,000 × 0.02 = ₹1,000. Bills of Exchange are recorded in the Bills Receivable Book (a Book of Original Entry), and discount on discounting is a financial charge.
बिल 1 जून 2024 को परिपक्व होगा (1 मार्च से 3 महीने बाद)। जब 1 अप्रैल 2024 को बैंक से भुनाया गया, तो शेष अवधि 2 महीने है। बट्टा = ₹50,000 × 12/100 × 2/12 = ₹1,000। विनिमय पत्र को बिल्स रिसीवेबल बुक (मूल प्रविष्टि की पुस्तक) में दर्ज किया जाता है और बैंक बट्टा एक वित्तीय शुल्क है।
समाधान का रास्ता:
- बिल की तिथि: 1 मार्च 2024, अवधि: 3 महीने
- परिपक्वता: 1 जून 2024
- भुनाने की तिथि: 1 अप्रैल 2024
- शेष अवधि = 1 जून − 1 अप्रैल = 2 महीने
- बट्टा = ₹50,000 × 12/100 × 2/12 = ₹1,000
क्यों यह प्रश्न: अनादरण पर नोटिंग चार्ज जोड़ना — यह अवधारणा clear होनी चाहिए।
A trader draws a bill of exchange on a customer for ₹50,000 at 3 months. The bill is accepted on 1st January 2024. On the due date, the bill is dishonoured and a noting charge of ₹500 is paid. What is the total amount debited to the customer's account on dishonour?
एक व्यापारी किसी ग्राहक पर ₹50,000 का 3 महीने का विनिमय बिल खींचता है। बिल 1 जनवरी 2024 को स्वीकार किया जाता है। देय तिथि पर बिल अनादृत (dishonour) हो जाता है और ₹500 नोटिंग चार्ज चुकाया जाता है। अनादरण पर ग्राहक के खाते में कुल कितनी राशि डेबिट की जाएगी?
- ₹49,500
- ₹50,000
- ₹51,000
- ₹50,500
- ₹49,500
- ₹50,000
- ₹51,000
- ₹50,500
Solutionसमाधान
When a bill of exchange is dishonoured, the drawee's (customer's) account is debited with the full amount of the bill plus any noting charges paid. Here, ₹50,000 (bill amount) + ₹500 (noting charges) = ₹50,500 is debited to the customer's account. Noting charges are a legal expense incurred to officially record the dishonour and are recoverable from the defaulting party.
जब विनिमय बिल अनादृत होता है, तो ड्रॉई (ग्राहक) के खाते में बिल की पूरी राशि और नोटिंग चार्ज दोनों मिलाकर डेबिट किए जाते हैं। यहाँ ₹50,000 (बिल राशि) + ₹500 (नोटिंग चार्ज) = ₹50,500 ग्राहक के खाते में डेबिट होगा। नोटिंग चार्ज एक कानूनी खर्च है जो अनादरण को आधिकारिक रूप से दर्ज कराने के लिए चुकाया जाता है और डिफॉल्टर से वसूल किया जा सकता है।
समाधान का रास्ता:
- बिल अनादृत → ग्राहक फिर से देनदार बना
- ग्राहक खाते में डेबिट = बिल राशि + नोटिंग चार्ज
- = ₹50,000 + ₹500 = ₹50,500
- नोटिंग चार्ज घटाओ मत — यह ग्राहक की जिम्मेदारी है।
क्यों यह प्रश्न: यह सबसे complex calculation वाला प्रश्न है — व्यापारिक छूट घटाओ और माल-भाड़ा जोड़ो, दोनों एक साथ।
In a Purchases Book, goods worth ₹50,000 were recorded at invoice price. The supplier allowed a trade discount of 15%, and the invoice also included freight charges of ₹1,500. What is the correct amount to be entered in the Purchases Book?
एक Purchases Book में ₹50,000 का माल चालान मूल्य पर दर्ज किया गया। आपूर्तिकर्ता ने 15% व्यापार छूट दी, और चालान में ₹1,500 माल-भाड़ा भी शामिल था। Purchases Book में दर्ज की जाने वाली सही राशि क्या होगी?
- ₹44,000
- ₹42,500
- ₹43,500
- ₹50,000
- ₹44,000
- ₹42,500
- ₹43,500
- ₹50,000
Solutionसमाधान
The Purchases Book records the net amount payable. Trade discount is deducted from invoice price: 15% of ₹50,000 = ₹7,500. Net price = ₹50,000 − ₹7,500 = ₹42,500. Freight charges of ₹1,500 are added as they form part of the cost payable to the supplier: ₹42,500 + ₹1,500 = ₹44,000.
Purchases Book में देय शुद्ध राशि दर्ज की जाती है। व्यापार छूट: 15% × ₹50,000 = ₹7,500। शुद्ध मूल्य = ₹50,000 − ₹7,500 = ₹42,500। माल-भाड़ा ₹1,500 आपूर्तिकर्ता को देय लागत का हिस्सा होने के कारण जोड़ा जाता है: ₹42,500 + ₹1,500 = ₹44,000।
समाधान का रास्ता:
- चालान मूल्य = ₹50,000
- व्यापारिक छूट (15%) = ₹7,500
- शुद्ध मूल्य = ₹50,000 − ₹7,500 = ₹42,500
- माल-भाड़ा (चालान में शामिल) = ₹1,500 → जोड़ो
- क्रय पुस्तक में राशि = ₹42,500 + ₹1,500 = ₹44,000
आम गलतियाँ
-
नकद छूट को क्रय/विक्रय पुस्तक में घटाना: यह सबसे बड़ी गलती है। नकद छूट केवल नकद बही में दिखती है, क्रय या विक्रय पुस्तक में कभी नहीं।
-
नकद खरीद को क्रय पुस्तक में दर्ज करना: क्रय पुस्तक केवल उधार खरीद के लिए है। नकद खरीद सीधे नकद बही में जाती है।
-
Cash Book को केवल Journal मानना: Cash Book दोनों का काम करती है — जर्नल भी और Ledger भी। "केवल जर्नल" कहना गलत है।
-
बिल की शेष अवधि गलत गिनना: परिपक्वता तिथि से भुनाने की तिथि घटानी है, बिल की जारी तिथि से नहीं। यह गलती ₹1,000 और ₹1,500 जैसे options के बीच confusion देती है।
-
अनादरण पर नोटिंग चार्ज घटाना: नोटिंग चार्ज हमेशा बिल राशि में जोड़ा जाता है, ग्राहक के खाते में डेबिट करते समय।
-
Journal और Journal Proper में भ्रम: Journal Proper एक specific पुस्तक है — वह जो सहायक पुस्तकों में नहीं जाता। "Journal" एक broad term है। परीक्षा में अंतर पहचानो।
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