साझेदारी का मूल सिद्धांत यह है: जो जितना लगाए, उतना पाए। लेकिन "लगाना" सिर्फ पैसे की मात्रा नहीं है — समय भी उतना ही अहम है।
सोचो एक ढाबे की तरह। रमेश ने ₹10,000 लगाए और पूरे साल रखे। सुरेश ने ₹20,000 लगाए पर सिर्फ 6 महीने के लिए। क्या सुरेश को दोगुना मिलेगा? नहीं — क्योंकि समय आधा था। रमेश ने प्रभावी रूप से लगाया: रुपए-महीने, और सुरेश ने रुपए-महीने। दोनों बराबर — इसलिए लाभ 1:1 बंटेगा।
यही साझेदारी का मूल सूत्र है:
SSC CHSL में साझेदारी के प्रश्न तीन प्रकार के आते हैं:
जब A, B, C एक साथ क्रमशः , , रुपए लगाएँ और पूरी अवधि तक बनाए रखें, तो लाभ का अनुपात सीधे है:
किसी का हिस्सा निकालना हो तो:
उदाहरण: A = ₹18,000, B = ₹12,000, C = ₹20,000 → अनुपात = 18:12:20 = 9:6:10
C का प्रतिशत =
यह SSC CHSL का सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला प्रकार है। नियम एक ही है:
बीच में राशि बदले तो क्या करें?
मान लो A ने पहले 6 महीने ₹1,20,000 रखे, फिर ₹20,000 और जोड़े और अगले 18 महीने ₹1,40,000 रखे:
देर से शामिल हो तो क्या करें?
C 6 महीने बाद ₹60,000 के साथ शामिल हुआ। कुल अवधि 12 महीने थी, तो C ने 6 महीने काम किया:
यह एक खास प्रकार है जो अक्सर आता है:
यदि A:B = 4:5 और B का हिस्सा = ₹1000, तो:
या एक साझेदार दूसरे से ज़्यादा पाता है:
A:B = 2:3, B को A से ₹1000 ज़्यादा मिलता है:
यह SSC CHSL में कभी-कभी आता है। प्रश्न में लिखा होगा कि "सक्रिय साझेदार को प्रबंधन के लिए पहले X% लाभ मिलेगा।"
हल का तरीका:
बड़ी संख्याओं को सरल करना समय बचाता है। जब भी प्रभावी पूँजियाँ निकालो, तुरंत HCF से भाग दो।
उदाहरण: 3,60,000 : 6,00,000 : 3,60,000 → HCF = 1,20,000 → 3:5:3
इस एक कदम से बाद की गणना दस गुना आसान हो जाती है।
जब दो साझेदारों का अनुपात और एक का लाभ दिया हो:
अनुपात = m:n, एक साझेदार का लाभ = P
एक भाग = P ÷ उस साझेदार के भाग कुल लाभ = (m+n) × एक भाग
उदाहरण: A:B = 4:5, B = ₹1000 → 1 भाग = 1000÷5 = 200 → कुल = 9×200 = ₹1800
सामान्य तरीका (ratio equation बनाना): 30 सेकंड | यह shortcut: 10 सेकंड
जब बताया जाए कि B को A से ₹D ज़्यादा मिला, और अनुपात m:n हो:
उदाहरण: A:B = 2:3, B को A से ₹1000 ज़्यादा → भाग = ₹1000 → कुल =
अंतर हमेशा भागों के बराबर होता है। यह सीधे देखते ही लिखो — 3 steps vs 6 steps सामान्य method में।
जब लाखों में राशियाँ हों, तो शून्य हटाकर काम करो।
1,20,000 × 6 को लिखो: 12 × 6 = 72 (इकाई हज़ार मानो) 1,40,000 × 18 को लिखो: 14 × 18 = 252
अनुपात में तुलना करते समय शून्य खुद-ब-खुद कट जाते हैं।
A की प्रभावी पूँजी = 72 + 252 = 324 (हज़ारों में) B की = 80 × 24 = 1920 (हज़ारों में)... रुको, यहाँ इकाई हज़ार है, तो 80×24 = 1920 सही।
इस method से calculator जैसी गलती नहीं होती। गणना समय: 40s बनाम 90s बिना simplification के।
जब पूछा जाए "C को कितने प्रतिशत लाभ मिलेगा":
C का investment ÷ कुल investment × 100 — बस यही है। अनुपात निकालने की ज़रूरत नहीं।
उदाहरण: A=18000, B=12000, C=20000 → कुल=50000 C% = 20000/50000 × 100 = 40% — 2 steps में।
Ratio निकालने का तरीका (9:6:10 बनाओ, फिर प्रतिशत): 5 steps।
परीक्षा में प्रश्न देखते ही यह decision tree चलाओ:
क्या सभी साझेदार एक साथ शुरू हुए और राशि नहीं बदली? → हाँ: सीधे राशियों का अनुपात लो। राशि×समय की ज़रूरत नहीं। → नहीं: अगला सवाल पूछो।
क्या कोई बाद में जुड़ा या बीच में राशि बदली? → हाँ: हर साझेदार के लिए निकालो। फिर अनुपात बनाओ।
क्या प्रश्न में "एक का हिस्सा दिया है"? → "X का हिस्सा = ₹P" → 1 भाग = P ÷ X के भाग → कुल = (कुल भाग) × 1 भाग → "B को A से ₹D ज़्यादा" → अंतर-भाग shortcut लगाओ।
क्या प्रश्न में निष्क्रिय साझेदार है? → पहले प्रबंधन-शुल्क कटाओ, फिर बचे लाभ को अनुपात में बाँटो।
हमेशा अनुपात को सरल (HCF से भाग) करके आगे बढ़ो — यह एक कदम बाकी सारी गणना आसान कर देता है।
क्यों यह प्रश्न: यह सबसे बुनियादी प्रश्न है — एक साथ निवेश, समान अवधि। अनुपात सीधे राशियों से आता है।
समाधान का रास्ता: अनुपात = 2000:3000:4000 = 2:3:4 → कुल 9 भाग → B के 3 भाग = (3/9)×1800 = ₹600। यहाँ समय एक जैसा है इसलिए राशि×समय की ज़रूरत ही नहीं।
क्यों यह प्रश्न: "एक का हिस्सा दिया, कुल निकालो" — SSC में बार-बार आने वाला उलटा प्रश्न।
समाधान का रास्ता: B = 5 भाग = ₹1000 → 1 भाग = ₹200 → कुल = (4+5)×200 = ₹1800। अनुपात-भाग shortcut यहाँ सबसे तेज़ है।
क्यों यह प्रश्न: "B को A से ₹1000 ज़्यादा" — अंतर-भाग shortcut की परीक्षा।
समाधान का रास्ता: अनुपात = 2:3 → अंतर = (3-2) = 1 भाग = ₹1000 → कुल = 5 भाग = ₹5000। देर से equation बनाने की ज़रूरत नहीं।
क्यों यह प्रश्न: C देर से जुड़ा — यह मिश्रित साझेदारी का classic रूप है। अनुपात में C का समय अलग है।
समाधान का रास्ता: A = 30,000×12 = 3,60,000 | B = 50,000×12 = 6,00,000 | C = 60,000×6 = 3,60,000 → अनुपात = 3,60,000 : 6,00,000 : 3,60,000 → HCF = 1,20,000 से भाग → 3:5:3।
क्यों यह प्रश्न: बीच में राशि बदली — दो अलग-अलग अवधियों की गणना एक साझेदार के लिए करनी है। यह SSC CHSL का सबसे कठिन partnership pattern है।
समाधान का रास्ता:
यहाँ अंश को decimal में बदलने से बचो — अनुपात को सरल करके काम करो।
राशि बदलने पर पुरानी राशि जोड़ना भूलना: जब A ने ₹1,20,000 में ₹20,000 जोड़े, तो नई राशि ₹1,40,000 है — ₹20,000 नहीं। बहुत सारे विद्यार्थी लिख देते हैं, जो गलत है।
देर से जुड़े साझेदार के लिए पूरी अवधि मानना: यदि C 6 महीने बाद जुड़ा और कुल अवधि 12 महीने है, तो C ने 6 महीने काम किया — 12 नहीं। परीक्षा में यह गलती सबसे ज़्यादा होती है।
C ने ₹10,000 निकाले → C की राशि ₹10,000 नहीं: C ने रखे। "withdrew" का मतलब घटाना है, नई राशि नहीं।
अनुपात सरल न करना और बड़े numbers से सीधे भाग देना: को calculator बिना हल करना मुश्किल है। पहले simplify करो — HCF निकालो। यह कदम 30 सेकंड लेता है पर गलती शून्य कर देता है।
"कितने प्रतिशत" पूछे तो ratio बनाना: जब percentage सीधे पूछा हो, तो \frac{\text{C का investment}}{\text\{कुल investment}} \times 100 — ratio बनाने की ज़रूरत ही नहीं।
अनुपात को उलटा पढ़ना: A:B = 5:7 का मतलब A के 5 भाग हैं। B का investment निकालना हो तो — नहीं। तेज़ गणना में यह उलटा-सीधा सबसे आम गलती है।