भारत की बैंकिंग प्रणाली को एक बड़े परिवार की तरह समझो। इस परिवार का मुखिया है — भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)। वह न केवल घर के पैसों का हिसाब रखता है, बल्कि परिवार के बाकी सदस्यों (वाणिज्यिक बैंकों, सहकारी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों) के व्यवहार को नियंत्रित भी करता है।
RBI की स्थापना 1935 में Reserve Bank of India Act, 1934 के तहत हुई थी। 1949 में इसका राष्ट्रीयकरण हुआ। RBI के चार मुख्य कार्य हैं:
पहला — मौद्रिक प्राधिकरण (Monetary Authority): RBI देश में मुद्रा की आपूर्ति और ब्याज दरों को नियंत्रित करता है। मुद्रास्फीति को काबू में रखना इसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है — 2016 से Flexible Inflation Targeting Framework के तहत 4% (±2%) का लक्ष्य।
दूसरा — बैंकों का बैंकर: सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक अपनी reserve राशि RBI के पास रखते हैं। आपातकाल में RBI इन्हें "अंतिम ऋणदाता" (Lender of Last Resort) के रूप में नकदी उपलब्ध कराता है।
तीसरा — सरकार का बैंकर: केंद्र और राज्य सरकारों के accounts RBI में होते हैं। सरकारी प्रतिभूतियों का प्रबंधन RBI करता है।
चौथा — विदेशी मुद्रा प्रबंधन: FEMA, 1999 के तहत विदेशी मुद्रा भंडार का संरक्षण और रुपये के मूल्य को स्थिर रखना।
एक सरल सादृश्य: अगर अर्थव्यवस्था एक गाड़ी है, तो RBI उसका driver है — accelerator (तरलता बढ़ाना) और brake (तरलता घटाना) दोनों उसके हाथ में हैं।
RBI के पास दो प्रकार के उपकरण हैं — परिमाणात्मक (Quantitative) और गुणात्मक (Qualitative)।
1. नकद आरक्षित अनुपात (Cash Reserve Ratio — CRR)
प्रत्येक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक को अपनी शुद्ध मांग और सावधि देनदारियों (Net Demand and Time Liabilities — NDTL) का एक निश्चित प्रतिशत RBI के पास नकद रूप में रखना अनिवार्य है। इस राशि पर RBI कोई ब्याज नहीं देता। वर्तमान CRR: 4.50%।
CRR बढ़ने से बैंकों के पास उधार देने योग्य धन घटता है — यह contractionary नीति है। CRR घटाने से तरलता बढ़ती है।
2. सांविधिक तरलता अनुपात (Statutory Liquidity Ratio — SLR)
बैंकों को NDTL का एक हिस्सा सरकारी प्रतिभूतियों, सोने, या RBI-अनुमोदित securities में रखना होता है। वर्तमान SLR: 18%। SLR पर ब्याज मिलता है (इस बिंदु पर CRR से अंतर याद रखो)।
3. रेपो दर (Repo Rate)
जब बैंकों को तत्काल नकदी चाहिए, तो वे सरकारी प्रतिभूतियाँ गिरवी रखकर RBI से अल्पकालिक ऋण लेते हैं। इस उधार पर जो दर लगती है, वह Repo Rate है। Repo Rate बढ़ने से बाजार में ब्याज दरें बढ़ती हैं, जिससे ऋण महंगा होता है और माँग घटती है।
4. रिवर्स रेपो दर (Reverse Repo Rate)
इसमें बैंक अपनी अतिरिक्त नकदी RBI के पास जमा करते हैं और RBI उन्हें ब्याज देता है। यह हमेशा Repo Rate से कम होती है। जब Reverse Repo Rate आकर्षक होती है, बैंक RBI के पास पैसा parking कर देते हैं — बाजार में तरलता कम होती है।
5. तरलता समायोजन सुविधा (Liquidity Adjustment Facility — LAF)
LAF एक framework है जिसमें Repo और Reverse Repo दोनों operations शामिल हैं। दिन-प्रतिदिन की तरलता को RBI इसी के माध्यम से manage करता है। LAF corridor = Reverse Repo Rate (नीचे की सीमा) से MSF Rate (ऊपर की सीमा) तक।
6. Marginal Standing Facility (MSF)
यह बैंकों के लिए आपात तरलता की सुविधा है। बैंक अपने SLR portfolio से भी प्रतिभूतियाँ गिरवी रखकर MSF के तहत उधार ले सकते हैं। दर = Repo Rate + 25 basis points।
7. खुले बाजार परिचालन (Open Market Operations — OMO)
RBI सरकारी प्रतिभूतियाँ खरीदकर (बाजार में पैसा डालता है) या बेचकर (बाजार से पैसा खींचता है) तरलता का दैनिक प्रबंधन करता है। यह RBI का सबसे लचीला और प्रमुख तरलता प्रबंधन उपकरण है।
2016 से RBI ने MCLR (Marginal Cost of Funds Based Lending Rate) प्रणाली लागू की। इसके घटक:
| घटक | महत्व | |-----|-------| | फंड्स की सीमांत लागत (Marginal Cost of Funds) | सर्वाधिक — यह main component है | | CRR पर negative carry | कम | | Operating Cost | कम | | Tenor Premium | कम |
फंड्स की सीमांत लागत = उधार की सीमांत लागत का 92% + Net Worth पर return का 8%।
MCLR एक floor है — बैंक इससे नीचे ऋण नहीं दे सकते (कुछ अपवादों को छोड़कर)।
Basel III अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग नियम हैं जो बैंकों की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करते हैं।
CRAR (Capital to Risk-Weighted Assets Ratio): भारत में न्यूनतम 9% (Basel III का global minimum 8% है, भारत ने इसे 9% रखा है)।
CRAR = (Tier-1 Capital + Tier-2 Capital) / Risk-Weighted Assets × 100
अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (SCBs):
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs): नरसिम्हम समिति (1975) की सिफारिश पर स्थापित। ग्रामीण क्षेत्र में ऋण और बैंकिंग सेवाएं देना इनका उद्देश्य है।
सहकारी बैंक:
Non-Performing Asset वह ऋण है जिस पर 90 दिनों से अधिक समय से ब्याज या मूलधन की किस्त नहीं चुकाई गई।
NPA को तीन श्रेणियों में बाँटा जाता है:
NPA कम करने के उपाय: IBC (Insolvency and Bankruptcy Code, 2016), ARC (Asset Reconstruction Companies), SARFAESI Act।
याद रखो: CRR पर शून्य ब्याज, SLR पर ब्याज मिलता है। एक pattern-based hook: "CRR = Cash Rests Redundantly (बिना फायदे के)।" यह एक तथ्य है जिस पर Prelims में सीधा प्रश्न आता है। Standard approach: पूरा paragraph पढ़ो — 30 seconds। Pattern hook: एक बार पढ़ो, हमेशा के लिए याद — 3 seconds।
Prelims में LAF पर options देखो और elimination लगाओ। जो भी option कहे "केवल Repo" या "केवल Reverse Repo" — वह गलत। LAF framework में दोनों आते हैं। यह elimination 4 options को 1 में reduce कर देता है — 20 seconds की बचत। MSF और Bank Rate LAF का हिस्सा नहीं हैं — यह भी याद रखो।
MCLR के घटकों की list याद करने की ज़रूरत नहीं। Logic समझो: किसी बैंक की lending rate का सबसे बड़ा हिस्सा उसकी अपनी borrowing cost (फंड्स की सीमांत लागत) होती है — बाकी सब supplementary। तर्क से सोचो: Operating cost और Tenor Premium minor adjustments हैं। CRR negative carry एक regulatory cost है। तो answer हमेशा "फंड्स की सीमांत लागत" होगा। Logic-based approach: 5 seconds; rote memorization: 45 seconds।
"India + 1" rule: वैश्विक Basel III minimum = 8%, भारत ने 1% अतिरिक्त जोड़कर 9% किया। Capital Conservation Buffer (2.5%) इसके ऊपर है — इसे CRAR में मत जोड़ो। Prelims में "10.5%" का option trap होता है जो 8% + 2.5% buffer जोड़कर बनता है। भारत का minimum = 9%, not 10.5%। यह substitution 1 common trap को neutralize करता है।
एक सहज assumption यह है कि DCCBs ग्रामीण/कृषि बैंक हैं तो कृषि ऋण में वे आगे होंगे — यह गलत है। अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की शाखाएं और resources कहीं अधिक हैं। DCCBs का असली काम PACS को refinance करना है, खुद किसानों को direct ऋण देना नहीं। यह एक pattern-trap है जो 2020 Prelims में आया था। Elimination: Statement 1 (DCCBs अधिक ऋण देते हैं) हमेशा गलत।
परीक्षा हॉल में बैंकिंग प्रश्न देखते ही यह decision tree चलाओ:
क्या प्रश्न किसी दर/ratio के बारे में है?
क्या प्रश्न किसी institution की भूमिका के बारे में है?
क्या प्रश्न LAF/OMO/MSF के बारे में है?
क्या कोई statement-based प्रश्न है?
क्यों यह प्रश्न: DCCB बनाम SCB का यह confusion UPSC बार-बार exploit करता है। ग्रामीण संस्था होने का मतलब यह नहीं कि वह कृषि ऋण में सबसे बड़ी है।
समाधान का रास्ता: Statement 1 को logic से जाँचो — SCBs की राष्ट्रव्यापी शाखाएं और बड़े resources DCCBs से कहीं अधिक हैं। Statement 1 गलत। Statement 2: DCCBs → PACS refinancing यह सहकारी बैंकिंग का मूल structure है — सही। इसलिए "केवल 2" सही उत्तर।
क्यों यह प्रश्न: LAF पर options में से "केवल" वाले options trap बनाए जाते हैं। यह framework को definition-level समझने की परीक्षा है।
समाधान का रास्ता: LAF = तरलता समायोजन का पूरा framework। Repo तरलता inject करता है, Reverse Repo absorb करता है — दोनों LAF का हिस्सा। MSF LAF का extension है लेकिन core definition में Repo + Reverse Repo ही हैं। Elimination से "रेपो और रिवर्स रेपो दोनों" सही।
क्यों यह प्रश्न: MCLR के components में कौन सबसे dominant है — यह conceptual clarity की जाँच है। रटने की नहीं, समझने की।
समाधान का रास्ता: बैंक की lending rate का निर्माण: सबसे पहले उसे खुद funds जुटाने पड़ते हैं — deposit rate, borrowing cost। यह marginal cost of funds है और यही सबसे बड़ा component होगा। CRR negative carry और operating cost छोटे adjustments हैं। उत्तर: फंड्स की मार्जिनल कॉस्ट।
क्यों यह प्रश्न: SLR का current value एक factual प्रश्न है। UPSC ऐसे प्रश्नों में options 18%, 18.5%, 19%, 19.5% रखकर test करता है।
समाधान का रास्ता: वर्तमान SLR = 18%। यह NDTL का प्रतिशत है। RBI ने इसे धीरे-धीरे घटाया है — पहले यह 25-38% तक था। Current value: 18%।
क्यों यह प्रश्न: Basel III में global minimum (8%) और भारत का minimum (9%) — यह अंतर UPSC का classic trap है। 10.5% एक और trap है।
समाधान का रास्ता: Basel III global minimum = 8%। RBI ने भारत में यह 9% रखा। Capital Conservation Buffer (2.5%) अतिरिक्त है — इसे न जोड़ो। उत्तर: 9%।
क्यों यह प्रश्न: CRR का current value एक सीधा factual प्रश्न है, लेकिन options में 4%, 3.5%, 5%, 4.5% सभी "reasonable" लगते हैं।
समाधान का रास्ता: वर्तमान CRR = 4.50%। यह NDTL का वह हिस्सा है जो बैंकों को RBI के पास बिना ब्याज के रखना होता है। 2024 तक यह 4.50% है। उत्तर: 4.50%।
क्यों यह प्रश्न: RRBs की स्थापना किस समिति ने recommended की — यह institutional history का प्रश्न है। नरसिम्हम नाम से confusion होती है क्योंकि नरसिम्हम समिति (1991) banking reforms के लिए भी प्रसिद्ध है।
समाधान का रास्ता: दो नरसिम्हम समितियाँ हैं — 1975 की (RRBs के लिए) और 1991/1998 की (banking sector reforms के लिए)। RRBs = 1975 = नरसिम्हम समिति। उत्तर: नरसिम्हम समिति।
क्यों यह प्रश्न: "प्राथमिक साधन" पर जोर दो। CRR, SLR, Bank Rate सब instruments हैं — लेकिन दैनिक तरलता प्रबंधन का primary tool कौन सा है, यह distinction महत्वपूर्ण है।
समाधान का रास्ता: CRR और SLR policy tools हैं जिन्हें बार-बार नहीं बदला जाता। Bank Rate एक signaling tool है। OMO flexible है, RBI इसे daily basis पर government securities खरीद/बेच कर करता है। दैनिक तरलता प्रबंधन = OMO। उत्तर: खुले बाजार की कार्रवाइयाँ (OMO)।
CRR पर ब्याज मान लेना: CRR की राशि पर RBI कोई ब्याज नहीं देता। SLR securities पर ब्याज मिलता है — दोनों को एक समझना सबसे बड़ी गलती है।
LAF को सिर्फ Repo मानना: LAF = Repo + Reverse Repo। MSF को LAF का core part मानना भी गलत है। MSF एक emergency window है।
Basel III में 10.5% लिखना: 9% (minimum CRAR) + 2.5% (Capital Conservation Buffer) = 11.5% total requirement, लेकिन न्यूनतम CRAR requirement अकेले 9% है। प्रश्न "न्यूनतम CRAR" पूछता है तो 9% लिखो।
DCCBs को कृषि ऋण में नंबर एक मानना: ग्रामीण संस्था होने के बावजूद SCBs कृषि ऋण में कहीं आगे हैं। DCCBs का मुख्य काम PACS refinancing है।
दोनों नरसिम्हम समितियों को मिलाना: 1975 की समिति = RRBs की सिफारिश। 1991 की समिति = banking sector liberalization reforms। ये अलग-अलग हैं।
OMO और LAF को interchangeable मानना: LAF daily Repo/Reverse Repo operations हैं जिनमें banks RBI के पास securities pledge करते हैं। OMO में RBI open market में government securities directly खरीदता/बेचता है। दोनों तरलता उपकरण हैं लेकिन mechanism अलग है।