सरकारी योजनाएँ वे नीति-उपकरण हैं जिनके माध्यम से सरकार बाज़ार की विफलताओं को सुधारने, सामाजिक न्याय स्थापित करने और मानव विकास सूचकांकों को बेहतर बनाने की कोशिश करती है। UPSC की दृष्टि से इन्हें रटना नहीं, बल्कि समझना है — कि कौन सी योजना किस समस्या का समाधान है, उसका वित्तपोषण कैसे होता है, और उसकी सीमाएँ क्या हैं।
एक सरल सादृश्य लो: अगर बाज़ार एक नदी है जो स्वयं बहती है, तो सरकारी योजनाएँ वे नहरें हैं जो उस पानी को उन खेतों तक पहुँचाती हैं जहाँ बाज़ार खुद नहीं जाता। मनरेगा, PM-KISAN, PMJAY, उज्ज्वला — ये सभी उन "नहरें" हैं जो वंचित वर्गों तक संसाधन पहुँचाती हैं।
UPSC Prelims में इन योजनाओं से सीधे factual प्रश्न आते हैं — राशि, वर्ष, लाभार्थी वर्ग। Mains में इन्हें नीतिगत विश्लेषण के रूप में पूछा जाता है: "क्या DBT ने कल्याण वितरण को बेहतर बनाया?" या "MGNREGA को रोजगार गारंटी क्यों कहा जाता है, योजना नहीं?"
योजनाओं को तीन वर्गों में बाँटकर देखो:
यह वर्गीकरण Mains के उत्तरों को structure देने में सीधा काम आता है।
मनरेगा (2005) एकमात्र ऐसी योजना है जो कानूनी अधिकार देती है — 100 दिन का रोजगार, माँगने पर। यह "scheme" नहीं, "Act" है — यह भेद UPSC बार-बार परखता है।
मुख्य विशेषताएँ:
UPSC Mains की दृष्टि से: मनरेगा की आलोचना — मज़दूरी inflation से कम, productive asset निर्माण कमज़ोर, leakages। पर इसकी उपलब्धि — COVID-19 के दौरान प्रवासी श्रमिकों का तात्कालिक सहारा।
₹6,000 प्रति वर्ष, तीन किस्तों में (हर चार महीने पर ₹2,000), सीधे बैंक खाते में — यह DBT का सबसे बड़ा उदाहरण है।
सावधानी: यह आय सहायता है, कृषि ऋण माफ़ी नहीं। Prelims में यह अंतर प्रश्न बनता है।
₹5 लाख प्रति परिवार प्रति वर्ष, secondary और tertiary अस्पताल में भर्ती के लिए। यह cashless और paperless है — अस्पताल में दाखिल होते ही coverage मिलती है।
महत्वपूर्ण: परिवार में सदस्यों की संख्या की कोई ऊपरी सीमा नहीं। SECC 2011 डेटा के आधार पर लाभार्थी चुने जाते हैं।
2016 में BPL परिवारों की महिलाओं को LPG connection देना — उद्देश्य केवल ऊर्जा नहीं, बल्कि महिला स्वास्थ्य (indoor air pollution से मुक्ति) और सशक्तिकरण।
UPSC angle: Ujjwala 2.0 में प्रवासी श्रमिकों को address proof की छूट दी गई — यह नीतिगत लचीलेपन का उदाहरण।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) 2013 के अंतर्गत लागू। प्रवासी श्रमिक अब किसी भी राज्य की उचित मूल्य दुकान (FPS) से subsidy पर अनाज ले सकते हैं। यह federalism और portability का संगम है।
₹15,000 तक मासिक आय वाले असंगठित श्रमिकों के लिए स्वैच्छिक और अंशदायी (contributory) पेंशन। 60 वर्ष बाद ₹3,000 प्रति माह।
महत्वपूर्ण: सरकार बराबर का अंशदान देती है — अगर श्रमिक ₹55 देता है, सरकार भी ₹55 देती है।
| श्रेणी | राशि सीमा | |--------|-----------| | शिशु | ₹50,000 तक | | किशोर | ₹50,001 – ₹5 लाख | | तरुण | ₹5,00,001 – ₹10 लाख |
बिना गारंटी के ऋण — यह सूक्ष्म उद्यमों के लिए credit gap भरता है।
SC/ST और महिला उद्यमियों को ₹10 लाख से ₹1 करोड़ का बैंक ऋण — greenfield enterprise के लिए, यानी पहली बार उद्यम शुरू करने के लिए। प्रत्येक बैंक शाखा से कम से कम एक SC/ST और एक महिला उद्यमी को ऋण देना अनिवार्य।
हर योजना को तीन कोण से याद करो: WHO (लाभार्थी वर्ग) → WHAT (क्या मिलता है) → HOW (delivery mechanism)। उदाहरण: उज्ज्वला — WHO: BPL महिला → WHAT: मुफ़्त LPG connection → HOW: deposit-free, DBT के ज़रिए refill subsidy। इस pattern से किसी भी नई योजना का MCQ 20 सेकंड में हल होता है, बजाय 60 सेकंड की रटी-रटाई के।
शिशु-किशोर-तरुण को एक बच्चे की उम्र की तरह याद करो: शिशु सबसे छोटा (₹50,000 तक), किशोर बीच में (₹5 लाख तक), तरुण सबसे बड़ा (₹10 लाख तक)। Options में "₹50,001 से ₹5 लाख" देखते ही किशोर आना चाहिए — standard approach: 30 सेकंड; यह pattern: 8 सेकंड।
असंगठित क्षेत्र + ₹3,000 पेंशन = PM-SYM। कृषि मज़दूर + ₹1,000 से ₹5,000 = APY (Atal Pension Yojana)। सरकारी कर्मचारी = NPS। जब भी "असंगठित श्रमिक" और "₹15,000 मासिक आय सीमा" एक साथ दिखे — PM-SYM। Elimination से 4 options में से 3 तुरंत बाहर — standard: 40 सेकंड; elimination: 12 सेकंड।
जब भी "One Nation One Ration Card" या "portability" का ज़िक्र हो — उत्तर NFSA 2013 है, कोई अलग योजना नहीं। UPSC यह trap बार-बार लगाता है — ONORC को PM Garib Kalyan Yojana से जोड़ने की कोशिश होती है। NFSA = कानून, PMGKY = COVID-era relief scheme — ये दोनों अलग हैं। इस एक distinction को याद रखने से 2-3 related questions सीधे हल होते हैं।
₹3 लाख, ₹5 लाख, ₹7 लाख, ₹10 लाख में से किसी एक को चुनना है। Substitute करो: "क्या ₹3 लाख एक बड़ी surgery के लिए काफ़ी है?" — नहीं। "क्या सरकार ₹10 लाख दे सकती है इतने परिवारों को?" — financially unlikely। ₹5 लाख logical midpoint है। यह technique तब काम आती है जब exact figure याद न हो — 4-option MCQ में 50% accuracy से 75% तक।
Prelims में सरकारी योजना का प्रश्न देखते ही इस क्रम से सोचो:
पहला कदम — लाभार्थी पहचानो: प्रश्न में किसका ज़िक्र है — किसान, असंगठित श्रमिक, BPL महिला, SC/ST उद्यमी, प्रवासी मज़दूर? यह एक clue से आधे options बाहर हो जाते हैं।
दूसरा कदम — delivery mechanism देखो: DBT (सीधा bank transfer) vs. in-kind (राशन, LPG connection) vs. insurance (PMJAY) vs. credit (MUDRA, Stand Up India)। ये चार categories हैं — प्रश्न का context एक में fit होगा।
तीसरा कदम — संख्याएँ eliminate करो: UPSC की संख्याएँ याद रखने लायक हैं — ₹6,000 (PM-KISAN), ₹5 लाख (PMJAY), ₹3,000 (PM-SYM), 100 दिन (MGNREGA)। इनमें से कोई एक option में सही होगा।
चौथा कदम — कानून vs. योजना trap: अगर "किस अधिनियम के तहत?" पूछा है — ONORC के लिए NFSA, MGNREGA खुद एक Act है।
इस चार-कदम रूपरेखा से 80% सरकारी योजना प्रश्न 30-45 सेकंड में हल होते हैं।
क्यों यह प्रश्न: PM-KISAN की exact राशि UPSC का सबसे आम factual trap है — ₹4,000 और ₹8,000 जानबूझकर दिए जाते हैं। समाधान का रास्ता: तीन किस्तें × ₹2,000 = ₹6,000। यह calculation याद न हो तो भी: ₹4,000 बहुत कम लगता है, ₹8,000 और ₹10,000 बहुत अधिक। ₹6,000 logical है।
क्यों यह प्रश्न: उज्ज्वला को "स्वच्छ भारत मिशन" से confuse करने की कोशिश होती है — दोनों "स्वच्छता" से जुड़े लगते हैं। समाधान का रास्ता: स्वच्छ भारत = शौचालय। उज्ज्वला = LPG connection। BPL महिला + LPG = उज्ज्वला, तुरंत।
क्यों यह प्रश्न: ONORC को एक अलग "योजना" मानने की गलती सबसे आम है — यह NFSA 2013 का implementation है। समाधान का रास्ता: Elimination — PM Garib Kalyan Yojana COVID-relief है, Antyodaya Anna Yojana सबसे गरीब परिवारों के लिए अलग scheme है, ICDS बच्चों के पोषण के लिए है। बचता है NFSA।
क्यों यह प्रश्न: PM-SYM की ₹3,000 राशि को APY की ₹5,000 maximum से confuse किया जाता है। समाधान का रास्ता: PM-SYM = असंगठित क्षेत्र, fixed ₹3,000। APY = ₹1,000-₹5,000 (variable)। "असंगठित श्रमिक" + "निश्चित राशि" = PM-SYM।
क्यों यह प्रश्न: MGNREGA को "योजना" नहीं "अधिनियम" कहने का भेद UPSC Mains में भी पूछा जाता है। समाधान का रास्ता: PM-KISAN (income support), PMAY (housing), Stand Up India (credit) — ये तीनों ग्रामीण रोजगार गारंटी नहीं देते। MGNREGA एकमात्र है जो 100 दिन की कानूनी गारंटी देता है।
क्यों यह प्रश्न: PMJAY की coverage राशि ₹5 लाख को ₹3 लाख या ₹10 लाख से अलग पहचानना। समाधान का रास्ता: ₹5 लाख = secondary + tertiary दोनों को cover करने लायक, fiscally feasible। यह anchor number है।
क्यों यह प्रश्न: MUDRA की तीनों श्रेणियों की सीमाएँ — खासकर "किशोर" की सटीक range। समाधान का रास्ता: शिशु (₹50K तक) → किशोर (₹50K+1 से ₹5L) → तरुण (₹5L+1 से ₹10L)। "₹50,001 से ₹5 लाख" किशोर है — यह non-overlapping range है।
क्यों यह प्रश्न: Stand Up India के लाभार्थी वर्ग को "युवा" या "किसान" से अलग पहचानना। समाधान का रास्ता: Stand Up India = SC/ST + महिला + greenfield enterprise। "किसान और कृषि मज़दूर" = MGNREGA/PM-KISAN। "शहरी युवा" = Startup India (अलग)। Elimination से SC/ST और महिला उद्यमी बचता है।
MGNREGA को "योजना" लिखना: यह एक अधिनियम है — Mains में यह distinction अंक घटाता है। "MGNREGS" (Scheme) और "MGNREGA" (Act) में फ़र्क करो।
PM-KISAN की राशि को ₹2,000 प्रति माह समझना: ₹2,000 एक किस्त है, कुल ₹6,000 वार्षिक है। "प्रति माह" और "प्रति किस्त" में confusion सबसे आम गलती है।
उज्ज्वला और सौभाग्य को मिलाना: उज्ज्वला = LPG connection (रसोई ऊर्जा); सौभाग्य = बिजली connection (घरेलू विद्युतीकरण)। दोनों के लाभार्थी अलग और उद्देश्य अलग।
ONORC को एक independent scheme मानना: यह NFSA 2013 के अंतर्गत एक implementation reform है — अलग योजना नहीं। Prelims में यह trap बार-बार आता है।
Stand Up India और Startup India को एक मानना: Stand Up India = SC/ST/महिला, established enterprises हेतु bank credit। Startup India = innovation-based startups, tax incentives, recognition। दोनों का overlap नहीं है।
PM-SYM और APY को interchange करना: APY = 18-40 वर्ष के सभी नागरिक, pension ₹1,000-₹5,000 (variable)। PM-SYM = असंगठित श्रमिक, ₹15,000 तक मासिक आय, fixed ₹3,000 pension। लाभार्थी वर्ग अलग, राशि अलग।