UPSC CSE राजनीतिक दर्शन एवं संवैधानिक विचार: उदारवाद से गांधीवाद तक

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अवधारणा

राजनीतिक दर्शन वह विषय है जो इन मूलभूत प्रश्नों से जूझता है: राज्य का औचित्य क्या है? वैध शासन की शर्तें क्या हैं? न्याय का अर्थ क्या है? व्यक्ति और समाज के बीच का संतुलन कैसे तय हो?

इसे ऐसे समझो — जब भारत का संविधान "समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य" घोषित करता है, तो वह केवल शब्द नहीं लिख रहा। वह सदियों के राजनीतिक विमर्श का निचोड़ एक दस्तावेज़ में समेट रहा है। प्रत्येक शब्द के पीछे एक दार्शनिक परंपरा है।

UPSC की दृष्टि से राजनीतिक दर्शन तीन स्तरों पर काम करता है:

पहला स्तर — पश्चिमी परंपरा: हॉब्स, लॉक, रूसो का सामाजिक अनुबंध सिद्धांत; कांट की नैतिकता; मिल का उदारवाद; मार्क्स का वर्ग-संघर्ष; रॉल्स का न्याय सिद्धांत।

दूसरा स्तर — भारतीय परंपरा: गांधी का सत्याग्रह और ग्राम-स्वराज; अंबेडकर का संवैधानिक नैतिकता का विचार; नेहरू का लोकतांत्रिक समाजवाद।

तीसरा स्तर — आधुनिक बहसें: उदारवाद बनाम सामुदायवाद; अधिकार बनाम दायित्व; व्यक्ति बनाम समुदाय।

एक सरल सादृश्य: अगर संविधान एक इमारत है, तो राजनीतिक दर्शन उसकी नींव है। Prelims में इसका सीधा परीक्षण होता है — "किसने क्या कहा" के रूप में। Mains GS-4 और निबंध में यह विश्लेषणात्मक depth की मांग करता है।


गहन विश्लेषण

सामाजिक अनुबंध: तीन भिन्न दृष्टिकोण

सामाजिक अनुबंध सिद्धांत यह मानता है कि राज्य की स्थापना व्यक्तियों के बीच एक काल्पनिक समझौते से हुई है। लेकिन तीनों प्रमुख विचारक इस समझौते की प्रकृति और परिणाम को बिल्कुल अलग-अलग देखते हैं।

थॉमस हॉब्स (1651, Leviathan): प्राकृतिक अवस्था में जीवन "एकाकी, दयनीय, घृणित, क्रूर और अल्पकालिक" है। मनुष्य स्वभावतः स्वार्थी है और निरंतर युद्ध की स्थिति में रहता है। इससे बचने के लिए लोग अपने सभी अधिकार एक निरंकुश संप्रभु को सौंप देते हैं। एक बार अनुबंध हो जाने के बाद विद्रोह का कोई अधिकार नहीं — क्योंकि अराजकता से तो कोई भी सरकार बेहतर है।

जॉन लॉक (1689, Two Treatises of Government): प्राकृतिक अवस्था में भी लोगों के पास प्राकृतिक अधिकार हैं — जीवन, स्वतंत्रता, और संपत्ति। सरकार इन्हीं अधिकारों की रक्षा के लिए बनाई जाती है, इसलिए यह सीमित और जवाबदेह होनी चाहिए। अगर सरकार अत्याचारी हो जाए, तो लोगों को विद्रोह का अधिकार है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता) लॉक की सोच से गहराई से जुड़ा है।

जाँ-जाक रूसो (1762, The Social Contract): रूसो के लिए प्राकृतिक अवस्था में मनुष्य "नेक जंगली" (Noble Savage) था — भ्रष्टाचार सभ्यता ने किया। उनकी 'सामान्य इच्छा' (Volonté Générale) व्यक्तिगत इच्छाओं का योग नहीं, बल्कि सामूहिक भलाई की दिशा में एक सामूहिक संकल्प है। यह लोकतंत्र के गहरे आदर्श की अभिव्यक्ति है।

| विचारक | प्राकृतिक अवस्था | सरकार का स्वरूप | विद्रोह का अधिकार | |--------|----------------|----------------|-------------------| | हॉब्स | युद्ध, भय | निरंकुश संप्रभु | नहीं | | लॉक | अधिकारयुक्त, पर असुरक्षित | सीमित, जवाबदेह | हाँ | | रूसो | नैसर्गिक शुद्धता | प्रत्यक्ष लोकतंत्र | 'सामान्य इच्छा' के अनुसार |

रॉल्स का न्याय सिद्धांत: 'अज्ञानता का पर्दा'

जॉन रॉल्स (A Theory of Justice, 1971) का यह प्रश्न था: एक निष्पक्ष समाज के नियम कैसे तय हों?

उनका उत्तर: कल्पना करो कि तुम एक "मूल स्थिति" (original position) में हो, जहाँ एक "अज्ञानता का पर्दा" (veil of ignorance) पड़ा है। तुम्हें नहीं पता कि तुम अमीर होगे या गरीब, उच्च जाति में पैदा होगे या निम्न, पुरुष होगे या स्त्री। इस पर्दे के पीछे से तुम कौन से नियम चुनोगे?

रॉल्स का तर्क: इस स्थिति में कोई भी तर्कशील व्यक्ति दो सिद्धांत चुनेगा —

  1. समान स्वतंत्रता सिद्धांत: सभी को अधिकतम समान बुनियादी स्वतंत्रताएं मिलें।
  2. अंतर सिद्धांत (Difference Principle): सामाजिक-आर्थिक असमानता तभी उचित है जब वह समाज के सबसे वंचित वर्ग के लिए लाभकारी हो।

यह सिद्धांत UPSC के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की आरक्षण नीति, अनुच्छेद 38, 39 (DPSP) इसी 'अंतर सिद्धांत' की भावना से मेल खाते हैं।

उदारवाद बनाम सामुदायवाद

उदारवाद (Liberalism) का केंद्र है: व्यक्ति प्राथमिक है। समाज व्यक्तियों का साधन है, साध्य नहीं। अधिकार समुदाय से नहीं, बल्कि व्यक्ति की गरिमा से उत्पन्न होते हैं।

सामुदायवाद (Communitarianism) — माइकल सैंडेल, अलास्डेयर मैकइंटायर, चार्ल्स टेलर — इसकी आलोचना करता है: उदारवाद का "unburdened self" (बोझमुक्त आत्मा) एक काल्पनिक अवधारणा है। मनुष्य हमेशा किसी समुदाय, परंपरा, इतिहास में जन्म लेता है। उसकी पहचान इन्हीं संबंधों से बनती है। सामुदायिक मूल्यों को नजरअंदाज करके न्याय की कोई भी व्यवस्था अधूरी है।

भारतीय संवैधानिक व्यवस्था में दोनों का मिश्रण है — अनुच्छेद 19, 21 में उदारवादी व्यक्ति-अधिकार, और अनुच्छेद 25-28 में सामुदायिक धार्मिक अधिकार।

गांधीवाद और मार्क्सवाद: साम्य और भेद

दोनों विचारधाराओं में एक महत्वपूर्ण साम्य है: दोनों अंततः राज्यविहीन समाज का स्वप्न देखते हैं।

मार्क्स के लिए यह "साम्यवादी समाज" है — वर्ग-संघर्ष के बाद जब सर्वहारा की जीत हो, राज्य का "withering away" हो।

गांधी के लिए यह "रामराज्य" या "पूर्ण स्वराज" है — जहाँ ग्राम-स्वशासन इतना सशक्त हो कि केंद्रीय राज्य की आवश्यकता ही न रहे।

लेकिन रास्ते बिल्कुल विपरीत हैं: मार्क्स वर्ग-संघर्ष और क्रांति में विश्वास करते हैं; गांधी अहिंसा, सत्याग्रह और नैतिक परिवर्तन में।


शॉर्टकट और युक्तियाँ

patternसामाजिक अनुबंध: HAL = सरकार का स्वभाव

तीन विचारकों को याद रखने के लिए: Hobs = Hard (कठोर, निरंकुश); Lock = Limited (सीमित, जवाबदेह); Rousseau = Republican (गणतांत्रिक, सामान्य इच्छा)। जब भी "विद्रोह का अधिकार" पूछा जाए — केवल लॉक और रूसो, हॉब्स नहीं। यह एक कदम में उत्तर देता है जबकि तीनों की अलग-अलग समीक्षा में 90 सेकंड लगते।

patternरॉल्स का 'D-D' फ्रेमवर्क

रॉल्स के दो सिद्धांत याद रखो: Democratic Equality (समान स्वतंत्रता) + Difference Principle (अंतर सिद्धांत — सबसे वंचित को लाभ)। जब भी "Veil of Ignorance किसका है" पूछा जाए — उत्तर: रॉल्स, A Theory of Justice (1971)। "Political Liberalism" (1993) उनकी दूसरी किताब है — इन दोनों को मत मिलाओ। Prelims में यह trap बार-बार आता है।

eliminationगांधी-मार्क्स साम्य: केवल एक बिंदु

गांधी और मार्क्स में निम्न बातें समान नहीं हैं: वर्ग-संघर्ष (नहीं — गांधी इसे मानते नहीं), आर्थिक नियतत्ववाद (नहीं), निजी संपत्ति का उन्मूलन (नहीं — गांधी ट्रस्टीशिप में मानते थे)। केवल एक बात समान है: राज्यविहीन समाज का अंतिम लक्ष्य। Elimination method लागू करो — तीन विकल्प तुरंत हटें, चौथा उत्तर।

patternCommunitarianism: 'MAC' विचारक

सामुदायवाद के तीन प्रमुख विचारक याद रखो: MacIntyre + Alasdair (एक ही हैं), Charles Taylor, Sandel (Michael Sandel)। ये सभी उदारवाद की आलोचना करते हैं। "Communitarianism किसकी आलोचना है" — उत्तर: Liberalism। Fascism, Marxism, Utilitarianism — ये options trap हैं।

substitutionEmma Goldman: पुस्तक-नाम जोड़ी

Emma Goldman → "Anarchism and Other Essays" (1910) → राज्य व्यक्तिगत स्वतंत्रता का शत्रु। इसे Proudhon ("What is Property?"), Bakunin (Russian anarchism) और Kropotkin (Mutual Aid) से मत मिलाओ। UPSC में Anarchism की पहचान पुस्तक के नाम से होती है — यही एकमात्र fast-check है।


तेज़-समाधान रूपरेखा

Prelims में राजनीतिक दर्शन के प्रश्न मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं:

प्रकार 1 — "कौन सी अवधारणा / किसकी पुस्तक": सीधे विचारक-अवधारणा-पुस्तक की तिकड़ी याद करो। पहले elimination करो — जो विचारक clearly गलत हैं, उन्हें हटाओ।

प्रकार 2 — "दो विचारधाराओं में समानता / अंतर": गांधी-मार्क्स जैसे प्रश्नों में तुरंत असामान्य साम्य खोजो। जो पहली नजर में विरोधाभासी लगे, वही अक्सर सही उत्तर होता है।

प्रकार 3 — "कौन सी विचारधारा की आलोचना": Communitarianism → Liberalism; Anarchism → State; Marxism → Capitalism। इन्हें fixed pair की तरह याद रखो।

Mains में: कोई भी उत्तर pure descriptive मत लिखो। हर विचारधारा को भारतीय संदर्भ से जोड़ो — अनुच्छेद संख्या, संविधान सभा बहस, या हालिया Supreme Court निर्णय। यही UPSC का analytical dimension है।


हल किए गए PYQs

क्यों यह प्रश्न: यह प्रश्न UPSC 2020 में आया था और यह trap था — पहली नजर में "निजी संपत्ति का उन्मूलन" सही लग सकता है। लेकिन गांधी ट्रस्टीशिप में मानते थे, संपत्ति उन्मूलन में नहीं।

समाधान का रास्ता: तुरंत elimination — वर्ग-संघर्ष (केवल मार्क्स), आर्थिक नियतत्ववाद (केवल मार्क्स), निजी संपत्ति का उन्मूलन (मार्क्स हाँ, गांधी नहीं)। शेष बचता है: राज्यविहीन समाज — यही एकमात्र साम्य है।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न2020
One common agreement between Gandhism and Marxism is
गांधीवाद और मार्क्सवाद के बीच एक समान बात यह है कि दोनों मानते हैं
  1. class struggle
  2. economic determinism
  3. abolition of private property
  4. the final goal of a stateless society
  1. वर्ग संघर्ष
  2. आर्थिक नियतत्ववाद
  3. निजी संपत्ति का उन्मूलन
  4. एक राज्यविहीन समाज का अंतिम लक्ष्य
Solutionसमाधान
Both Gandhism and Marxism envision a stateless society as the ultimate goal, although their paths and means to achieve it differ fundamentally.

क्यों यह प्रश्न: हॉब्स का यह उद्धरण UPSC Prelims में classic है। "Leviathan" और "निरंकुश संप्रभु" — दोनों keywords हॉब्स की पहचान हैं।

समाधान का रास्ता: उद्धरण देखते ही पहचानो: "solitary, poor, nasty, brutish, short" = हॉब्स। लॉक = सीमित सरकार, रूसो = सामान्य इच्छा, मॉन्टेस्क्यू = शक्तियों का पृथक्करण। एक पंक्ति में उत्तर।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
Which political philosopher described the state of nature as 'solitary, poor, nasty, brutish, and short' and argued for an absolute sovereign as the solution?
किस राजनीतिक दार्शनिक ने प्राकृतिक अवस्था (state of nature) को 'एकाकी, दयनीय, घृणित, क्रूर और अल्पकालिक' (solitary, poor, nasty, brutish, and short) बताया और इसके समाधान के रूप में एक निरंकुश संप्रभु (absolute sovereign) का तर्क दिया?
  1. Thomas Hobbes
  2. John Locke
  3. Jean-Jacques Rousseau
  4. Montesquieu
  1. थॉमस हॉब्स
  2. जॉन लॉक
  3. जाँ-जाक रूसो
  4. मॉन्टेस्क्यू
Solutionसमाधान
Thomas Hobbes in his work 'Leviathan' (1651) described the natural condition of mankind as one of perpetual war, summarized by the phrase 'solitary, poor, nasty, brutish, and short.' He argued that people surrender their rights to an absolute sovereign (Leviathan) to escape this condition.
थॉमस हॉब्स ने अपनी पुस्तक 'लेवियाथन' (1651) में प्राकृतिक अवस्था को 'एकाकी, गरीब, घृणित, क्रूर और अल्पकालिक' बताया। उन्होंने तर्क दिया कि लोग इस अवस्था से बचने के लिए एक निरंकुश संप्रभु को अपने अधिकार सौंप देते हैं।

क्यों यह प्रश्न: रॉल्स की दो पुस्तकें हैं — "A Theory of Justice" (1971) और "Political Liberalism" (1993)। "Veil of Ignorance" किसमें है — यही trap है।

समाधान का रास्ता: "Veil of Ignorance" → मूल स्थिति (original position) → न्याय के सिद्धांत → A Theory of Justice। "Political Liberalism" बाद की कृति है जो public reason पर केंद्रित है। यह pair याद रखो और गलती नहीं होगी।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
John Rawls' 'veil of ignorance' is a central concept in which of his works?
जॉन रॉल्स की 'अज्ञानता का पर्दा' (veil of ignorance) की अवधारणा उनकी किस रचना की केंद्रीय अवधारणा है?
  1. Political Liberalism
  2. The Law of Peoples
  3. Collected Papers
  4. A Theory of Justice
  1. Political Liberalism
  2. The Law of Peoples
  3. Collected Papers
  4. A Theory of Justice
Solutionसमाधान
John Rawls introduced the concept of the 'veil of ignorance' in 'A Theory of Justice' (1971). It is a method of determining the morality of political issues by imagining oneself behind a veil of ignorance where one does not know their place in society, facilitating impartial decision-making.
जॉन रॉल्स ने 'अज्ञानता का पर्दा' (Veil of Ignorance) की अवधारणा अपनी पुस्तक 'A Theory of Justice' (1971) में प्रस्तुत की। इसमें व्यक्ति यह मानकर निर्णय लेता है कि उसे समाज में अपनी स्थिति का ज्ञान नहीं है, जिससे निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित होता है।

क्यों यह प्रश्न: लॉक की सामाजिक अनुबंध सिद्धांत और भारतीय संविधान की जड़ें — Prelims और Mains दोनों में पूछा जाता है।

समाधान का रास्ता: "शासितों की सहमति" + "विद्रोह का अधिकार" = लॉक का Social Contract। Divine Right of Kings इसका उलटा है। Aquinas का Natural Law पुराना और religious है। Utilitarianism परिणामवादी है, अधिकारवादी नहीं।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
Which concept, associated with John Locke, holds that government authority derives from the consent of the governed and that people have the right to revolt against tyrannical rule?
जॉन लॉक से जुड़ी वह कौन सी अवधारणा है जो यह मानती है कि सरकार का अधिकार शासितों की सहमति से उत्पन्न होता है और लोगों को अत्याचारी शासन के खिलाफ विद्रोह करने का अधिकार है?
  1. Social Contract Theory
  2. Natural Law Theory of Aquinas
  3. Divine Right of Kings
  4. Utilitarianism
  1. सामाजिक अनुबंध सिद्धांत (Social Contract Theory)
  2. एक्विनास का प्राकृतिक कानून सिद्धांत (Natural Law Theory of Aquinas)
  3. राजाओं का दैवीय अधिकार (Divine Right of Kings)
  4. उपयोगितावाद (Utilitarianism)
Solutionसमाधान
John Locke's Social Contract Theory, articulated in 'Two Treatises of Government' (1689), holds that legitimate government derives from the consent of the governed. Unlike Hobbes, Locke maintained that natural rights (life, liberty, property) are inalienable, and people may overthrow a government that violates these rights.
जॉन लॉक की सामाजिक अनुबंध सिद्धांत के अनुसार, वैध सरकार शासितों की सहमति से उत्पन्न होती है। लॉक ने 'Two Treatises of Government' में तर्क दिया कि प्राकृतिक अधिकार (जीवन, स्वतंत्रता, संपत्ति) अहस्तांतरणीय हैं और तानाशाह सरकार के विरुद्ध विद्रोह का अधिकार है।

क्यों यह प्रश्न: 'Volonté Générale' (General Will) और रूसो — यह pair लगभग हर सामाजिक अनुबंध प्रश्न में आता है।

समाधान का रास्ता: "सामान्य इच्छा" = रूसो, हमेशा। कांट = नैतिक कर्तव्य (categorical imperative); बर्क = परंपरावाद, क्रांति का विरोध; मिल = उपयोगितावाद और व्यक्तिगत स्वतंत्रता। रूसो को बाकी तीन से अलग रखो।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
The concept of 'General Will' (Volonté Générale) is most closely associated with which political philosopher?
'सामान्य इच्छा' (General Will / Volonté Générale) की अवधारणा किस राजनीतिक दार्शनिक से सबसे अधिक जुड़ी हुई है?
  1. Immanuel Kant
  2. Edmund Burke
  3. Jean-Jacques Rousseau
  4. John Stuart Mill
  1. इमैनुअल कांट
  2. एडमंड बर्क
  3. जाँ-जाक रूसो
  4. जॉन स्टुअर्ट मिल
Solutionसमाधान
Jean-Jacques Rousseau introduced 'General Will' in 'The Social Contract' (1762). He argued that true sovereignty lies in the general will of the people, which always aims at the common good, as distinct from the 'will of all' which is merely the sum of private interests.
जीन-जैक्स रूसो ने 'The Social Contract' (1762) में 'सामान्य इच्छा' की अवधारणा प्रस्तुत की। उनके अनुसार वास्तविक संप्रभुता लोगों की सामान्य इच्छा में निहित है, जो सदैव सामान्य भलाई की ओर उन्मुख होती है और व्यक्तिगत हितों के योग से भिन्न होती है।

क्यों यह प्रश्न: Anarchism के भीतर अलग-अलग विचारक हैं — Goldman, Kropotkin, Proudhon, Bakunin। इनमें से "Anarchism and Other Essays" किसकी है?

समाधान का रास्ता: पुस्तक का नाम ही clue है: "Anarchism and Other Essays" → Emma Goldman (1910)। Proudhon = "What is Property?"; Kropotkin = "Mutual Aid"; Bakunin = Russian revolutionary anarchism। पुस्तक-नाम की जोड़ी याद रखो।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
Which philosopher argued in 'Anarchism and Other Essays' that the State is the greatest threat to individual freedom and advocated for a stateless society?
किस दार्शनिक ने 'Anarchism and Other Essays' में यह तर्क दिया कि राज्य व्यक्तिगत स्वतंत्रता के लिए सबसे बड़ा खतरा है और एक राज्यविहीन समाज की वकालत की?
  1. Emma Goldman
  2. Peter Kropotkin
  3. Pierre-Joseph Proudhon
  4. Mikhail Bakunin
  1. Emma Goldman
  2. Peter Kropotkin
  3. Pierre-Joseph Proudhon
  4. Mikhail Bakunin
Solutionसमाधान
Emma Goldman, in 'Anarchism and Other Essays' (1910), argued that the State, capitalism, and religion are the greatest oppressors of individual liberty. She advocated anarchism as a philosophy of a new social order based on liberty, free from the dominion of religion and oppression of the State.
एम्मा गोल्डमैन ने 'Anarchism and Other Essays' (1910) में तर्क दिया कि राज्य, पूंजीवाद और धर्म व्यक्तिगत स्वतंत्रता के सबसे बड़े दमनकर्ता हैं। उन्होंने एक ऐसे नए सामाजिक व्यवस्था की वकालत की जो राज्य के प्रभुत्व और धर्म के दमन से मुक्त हो।

क्यों यह प्रश्न: Communitarianism की परिभाषा और उसका target — यह conceptual प्रश्न Mains में भी आता है।

समाधान का रास्ता: Communitarianism = Liberalism की आलोचना। तुरंत Fascism और Marxism हटाओ — ये Communitarianism के target नहीं हैं। Utilitarianism भी नहीं, क्योंकि सामुदायवाद का मुद्दा व्यक्ति-समुदाय संबंध है, परिणामवाद नहीं।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
The theory of 'Communitarianism' in political philosophy is primarily a critique of which school of thought?
राजनीतिक दर्शन में 'Communitarianism' का सिद्धांत मुख्य रूप से किस विचारधारा की आलोचना है?
  1. Utilitarianism
  2. Fascism
  3. Marxism
  4. Liberalism
  1. Utilitarianism
  2. Fascism
  3. Marxism
  4. Liberalism
Solutionसमाधान
Communitarianism, associated with thinkers like Michael Sandel, Alasdair MacIntyre, and Charles Taylor, critiques liberal political philosophy for its excessive emphasis on individual rights at the expense of community, shared values, and social obligations. It argues that individuals are fundamentally shaped by their communities.
सामुदायवाद (Communitarianism), जो माइकल सैंडेल, अलास्डेयर मैकइंटायर और चार्ल्स टेलर जैसे विचारकों से जुड़ा है, उदारवाद की इस आधार पर आलोचना करता है कि वह सामुदायिक मूल्यों और सामाजिक दायित्वों की कीमत पर व्यक्तिगत अधिकारों पर अत्यधिक जोर देता है।

क्यों यह प्रश्न: रॉल्स और "Veil of Ignorance" — इस प्रश्न में Kant और Mill का trap है क्योंकि दोनों liberal philosophers हैं।

समाधान का रास्ता: "Veil of Ignorance" = रॉल्स, बिना किसी संदेह के। Kant = categorical imperative; Mill = greatest happiness principle; Nozick = Entitlement Theory (रॉल्स का प्रतिवादी)। रॉल्स और Nozick को एक साथ याद रखो — ये एक-दूसरे के विरोधी हैं।

Previous Year Questionपिछले वर्ष का प्रश्न
Which political philosopher introduced the concept of the 'veil of ignorance' as a device to determine principles of justice in a fair society?
किस राजनीतिक दार्शनिक ने एक न्यायपूर्ण समाज में न्याय के सिद्धांत तय करने के लिए 'veil of ignorance' की अवधारणा पेश की?
  1. Immanuel Kant
  2. John Rawls
  3. John Stuart Mill
  4. Robert Nozick
  1. Immanuel Kant
  2. John Rawls
  3. John Stuart Mill
  4. Robert Nozick
Solutionसमाधान
John Rawls introduced the 'veil of ignorance' in his seminal work 'A Theory of Justice' (1971). Behind this hypothetical veil, individuals do not know their place in society, class position, or fortune, enabling them to choose principles of justice impartially. This led to his 'difference principle' and 'equal liberty principle'.
जॉन रॉल्स ने अपनी प्रमुख कृति 'A Theory of Justice' (1971) में 'अज्ञानता का पर्दा' (veil of ignorance) की अवधारणा प्रस्तुत की। इस काल्पनिक पर्दे के पीछे व्यक्ति को समाज में अपनी स्थिति, वर्ग या भाग्य का ज्ञान नहीं होता, जिससे वह निष्पक्ष रूप से न्याय के सिद्धांत चुन सकता है। इससे उन्होंने 'अंतर सिद्धांत' और 'समान स्वतंत्रता सिद्धांत' प्रतिपादित किए।

आम गलतियाँ


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