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Climatology / Climate Types — UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

Geography · UPSC CSE
प्रश्न: El Niño परिघटना — तंत्र, वैश्विक जलवायु प्रभाव और भारतीय मानसून पर निहितार्थ

प्रस्तावना

El Niño, उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी भाग में समुद्री सतह के आवधिक तापन की प्रक्रिया है, जो वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण को बाधित कर भारत सहित अनेक संवेदनशील देशों की कृषि, जल सुरक्षा और आपदा तैयारी को प्रभावित करती है।

मुख्य बिंदु

1. El Niño का तंत्र

सामान्य परिस्थितियों में व्यापारिक पवनें (trade winds) गर्म सतही जल को पश्चिम दिशा में धकेलती हैं, जिससे दक्षिण अमेरिका के तट पर ठंडे जल का ऊर्ध्वगमन होता है। El Niño के दौरान ये पवनें शिथिल पड़ जाती हैं और गर्म जल मध्य व पूर्वी प्रशांत में फैल जाता है। इस महासागरीय ऊष्मा पुनर्वितरण से वायुमंडलीय दाब प्रवणता और वर्षा प्रतिरूप मूलभूत रूप से परिवर्तित हो जाते हैं।

2. Walker Circulation और वायुमंडलीय संबद्धता

Walker Circulation — समुद्री सतह तापमान के अंतर से संचालित एक क्षेत्रीय वायुमंडलीय पाश — El Niño प्रकरणों के दौरान उल्लेखनीय रूप से कमज़ोर पड़ जाता है। पश्चिमी प्रशांत पर संवहनीय सक्रियता घटने से इस परिसंचरण की आरोही शाखा दब जाती है और वर्षा का क्षेत्र दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया से विस्थापित हो जाता है। यही व्यवधान El Niño के दूरगामी दूरसंचार प्रभावों (teleconnections) का प्रमुख कारण है।

3. भारतीय मानसून पर प्रभाव

ऐतिहासिक साक्ष्य यह स्पष्ट करते हैं कि El Niño वर्षों में भारत में मानसूनी वर्षा सामान्य से कम अथवा अपर्याप्त रहती है। आर्द्रता-वाहक पवनों का शिथिल पड़ना और हिंद महासागर पर संवहन का दमन वर्षा को घटाता है, जिससे मध्य और प्रायद्वीपीय भारत में वर्षा-आधारित कृषि पर सूखे का संकट गहरा जाता है।

4. शासन और तैयारी संबंधी निहितार्थ

भारत की मौसम विज्ञान एजेंसियाँ अब El Niño सूचकांकों को मौसमी मानसून पूर्वानुमान में सम्मिलित करती हैं, जिससे जल आवंटन, फसल बीमा सक्रियण और सूखा राहत की अग्रिम आकस्मिक योजना संभव होती है। प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को सुदृढ़ करना और El Niño प्रक्षेपणों को कृषि नीति में एकीकृत करना एक महत्त्वपूर्ण प्रशासनिक प्राथमिकता है।

निष्कर्ष

El Niño के तंत्र — महासागरीय तापन, Walker Circulation का शिथिलीकरण और मानसून का दमन — की सटीक समझ साक्ष्य-आधारित जलवायु अनुकूलन के लिए अनिवार्य है। शासन ढाँचों को इन गतिकियों को खाद्य सुरक्षा, जल प्रबंधन और आपदा जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियों में संस्थागत रूप से समाहित करना चाहिए।

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