पर्वतों का वर्गीकरण उनकी उत्पत्ति की प्रक्रिया — वलन, भ्रंशन, ज्वालामुखीयता अथवा अपरदन — के आधार पर किया जाता है। यह वर्गीकरण विवर्तनिक इतिहास, संसाधन वितरण एवं महाद्वीपीय भूगोल की व्याख्या के लिए अनिवार्य है।
पश्चिमी घाट वलित पर्वत नहीं हैं, बल्कि इन्हें Gondwanaland के विखंडन से संबद्ध एक विभंजित महाद्वीपीय सीमा के साथ निर्मित कगार (escarpment) माना जाता है। इनका तीव्र पश्चिमी ढाल एवं मंद पूर्वी ढाल संपीडनात्मक वलन के स्थान पर संरचनात्मक भ्रंशन को इंगित करता है, जिससे इन्हें block mountains अथवा horst-सदृश संरचना के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
उत्तरी अफ्रीका के Atlas Mountains का निर्माण Alpine-Himalayan Orogeny के दौरान हुआ, जो Alps एवं Himalayas के निर्माण की उसी विवर्तनिक घटना का भाग है। इनमें वलित अवसादी स्तर तथा सक्रिय भूकंपीयता स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है, जो अपेक्षाकृत हाल की पर्वत-निर्माण प्रक्रिया के अनुरूप है। अतः इनका नवीन वलित पर्वत के रूप में वर्गीकरण सही है।
Scandes, Caledonian Orogeny के अवशेष हैं, जो इन्हें प्राचीन वलित पर्वत की श्रेणी में रखते हैं। भूवैज्ञानिक काल में व्यापक अपरदन से इनकी ऊँचाई घटी है, किंतु भू-आकृति विज्ञान की दृष्टि से इन्हें अवशिष्ट पर्वत (residual mountains) नहीं, बल्कि प्राचीन अथवा अवशेष वलित पर्वत कहना अधिक सटीक होगा।
पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट की तुलना में अधिक तीव्र हैं। पश्चिमी घाट संकरी Konkan तटरेखा से अचानक ऊपर उठते हैं, जबकि पूर्वी घाट असंतत, अपेक्षाकृत निम्न एवं मंद ढाल वाले हैं। लाखों वर्षों में पूर्व-प्रवाही प्रायद्वीपीय नदियों द्वारा अपरदन के कारण पूर्वी घाट विच्छिन्न हो गए हैं।
पर्वतों के सटीक वर्गीकरण हेतु उत्पत्ति, संरचना एवं परवर्ती अपरदनात्मक इतिहास में स्पष्ट भेद आवश्यक है। कथन 1 एवं 2 मोटे तौर पर सही हैं; कथन 3 एवं 4 में अपरदनात्मक आयु को अवशिष्ट वर्गीकरण से जोड़ने तथा घाट की ढाल-असमानता को गलत पढ़ने की भ्रांति है।
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