भारत और बांग्लादेश के बीच एक दीर्घ अंतर्राष्ट्रीय सीमा रेखा है, जो पाँच पूर्वोत्तर एवं पूर्वी राज्यों से होकर गुजरती है। यह सीमा विभाजन के इतिहास, जातीय विविधता और सीमापारीय शासन की जटिलताओं के कारण दक्षिण एशिया की सर्वाधिक संवेदनशील सीमाओं में से एक है।
पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम बांग्लादेश के साथ सीमा साझा करते हैं। यह बहु-राज्यीय सीमा 1947 के विभाजन की भौगोलिक वास्तविकता को दर्शाती है, जिसने बंगाल को विखंडित किया और ऐसे एन्क्लेव तथा एक्स्क्लेव उत्पन्न किए जिन्हें Land Boundary Agreement, 2015 के माध्यम से अंततः सुलझाया गया।
पश्चिम बंगाल, अपने विस्तृत नदीय मैदानों और ऐतिहासिक बंगाल संबद्धता के कारण, भारत-बांग्लादेश सीमा का सर्वाधिक लंबा हिस्सा साझा करता है। यह राज्य वैध व्यापार एवं अवैध सीमापारीय गतिविधियों दोनों का प्राथमिक गलियारा है, जिससे सुदृढ़ सीमा प्रबंधन अवसंरचना की आवश्यकता और अधिक बढ़ जाती है।
मेघालय, असम की तुलना में बांग्लादेश के साथ अधिक लंबी सीमा साझा करता है। असम की बांग्लादेश से लगती सीमा अपेक्षाकृत संक्षिप्त है, क्योंकि राज्य का दक्षिणी छोर बांग्लादेश को संक्षेप में स्पर्श करता है, जबकि मेघालय का दक्षिणी भाग अंतर्राष्ट्रीय सीमा के साथ एक विस्तृत खंड में फैला हुआ है।
Border Security Force इस सीमा का प्रबंधन बाड़बंदी, स्मार्ट निगरानी और एकीकृत चेक पोस्टों के माध्यम से करती है। नदीय कटाव से सीमा-चिह्नों का विस्थापन, घुसपैठ, पशु तस्करी तथा राज्यविहीन जनसंख्या से जुड़ी मानवीय चिंताओं का प्रबंधन प्रमुख चुनौतियाँ हैं।
बांग्लादेश के साथ प्रभावी सीमा प्रबंधन हेतु सुरक्षा आवश्यकताओं, मानवीय दायित्वों और द्विपक्षीय व्यापार सुविधा के मध्य संतुलन अनिवार्य है। सीमा अवसंरचना को सुदृढ़ करने के साथ-साथ राजनयिक समन्वय को गहरा करना इस संवेदनशील क्षेत्र में स्थायी स्थिरता के लिए आवश्यक है।
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