भारत की Act East Policy दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भौतिक संपर्क को आर्थिक एकीकरण और रणनीतिक गहराई का आधार मानती है। कई बहु-मॉडल गलियारे भारत के पूर्वोत्तर को ASEAN बाज़ारों से जोड़ने हेतु प्रस्तावित हैं।
यह परियोजना कोलकाता बंदरगाह को म्यांमार के Sittwe बंदरगाह से जोड़ती है, तत्पश्चात् Kaladan नदी मार्ग से Paletwa होते हुए सड़क द्वारा मिज़ोरम तक पहुँचती है। इससे भू-आवेष्ठित पूर्वोत्तर को Siliguri Corridor पर निर्भरता कम करने का वैकल्पिक मार्ग मिलता है। म्यांमार के Chin State में उग्रवाद के कारण हुई देरी ने संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में अवसंरचना परियोजनाओं की सुभेद्यता को उजागर किया है।
IMT Trilateral Highway मणिपुर के Moreh को म्यांमार के रास्ते थाईलैंड के Mae Sot से जोड़ती है और भविष्य में इसे Cambodia, Laos तथा Vietnam तक विस्तारित करने की योजना है। यह भारत-ASEAN सहयोग के अंतर्गत एक प्रमुख भू-संपर्क पहल है। कठिन भूभाग, वित्त-पोषण की कमी और 2021 के पश्चात् म्यांमार में राजनीतिक अस्थिरता के कारण प्रगति असमान रही है।
यह रेल परियोजना त्रिपुरा के Agartala को बांग्लादेश के Akhaura से जोड़ती है, जिससे भारत के पूर्वोत्तर और ढाका के बीच यात्रा दूरी उल्लेखनीय रूप से घटती है। यद्यपि बांग्लादेश ASEAN का सदस्य नहीं है, तथापि यह लिंक BIMSTEC ढाँचे के माध्यम से ASEAN गलियारों से जुड़ने वाली व्यापक उप-क्षेत्रीय संपर्क संरचना का अभिन्न अंग है।
समयबद्ध भूमि अधिग्रहण, सीमा-पार कानूनी ढाँचे और अनेक संप्रभु देशों के मध्य समन्वित वित्त-पोषण निरंतर अवरोध बने हुए हैं। परियोजना प्रबंधन इकाइयों को सुदृढ़ करना और समर्पित राजनयिक क्षमता की तैनाती समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए अनिवार्य है।
भारत-ASEAN संपर्क की प्राप्ति के लिए अवसंरचना कूटनीति को एकमुश्त निवेश नहीं, बल्कि निरंतर राजनीतिक प्रतिबद्धता के रूप में देखना होगा। इन गलियारों के पूर्ण होने पर पूर्वोत्तर एक परिधीय क्षेत्र से प्रवेश-द्वार में रूपांतरित होगा, जो भूगोल को रणनीतिक उद्देश्य के अनुरूप बनाएगा।
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