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Mineral Resources — UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

Geography · UPSC CSE
प्रश्न: सामरिक एवं महत्वपूर्ण खनिज — भारत की संसाधन नीति, महत्व एवं शासन-संबंधी चुनौतियाँ

प्रस्तावना

महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज आधुनिक प्रौद्योगिकी, रक्षा प्रणालियों तथा स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण की आधारशिला हैं। वर्ष 2023 में भारत द्वारा ऐसे खनिजों की पहचान, आयात-निर्भरता से सक्रिय संसाधन-सुरक्षा नियोजन की दिशा में एक निर्णायक बदलाव को दर्शाती है।

मुख्य बिंदु

1. सामरिक खनिजों की परिभाषा

भारत के खान मंत्रालय ने आर्थिक महत्व एवं आपूर्ति शृंखला की संवेदनशीलता के आधार पर lithium, cobalt, nickel, graphite, rare earth elements तथा titanium सहित महत्वपूर्ण खनिजों की सूची निर्धारित की। ये खनिज electric vehicle बैटरी, semiconductors, सौर पैनलों एवं रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए अनिवार्य हैं। इनका 'सामरिक' वर्गीकरण तकनीकी अपरिहार्यता तथा आपूर्ति के भू-राजनीतिक संकेंद्रण, दोनों को प्रतिबिंबित करता है।

2. नीतिगत एवं विधायी प्रतिक्रिया

Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Act, 2023 के अंतर्गत महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की नीलामी हेतु प्रावधान किए गए तथा उनके आवंटन पर केंद्र सरकार का नियंत्रण सुनिश्चित किया गया। Khanij Bidesh India Ltd (KABIL) की स्थापना Argentina एवं Australia जैसे lithium-समृद्ध देशों में विदेशी खनिज संपदा सुरक्षित करने के लिए की गई। ये कदम खनिज कूटनीति में समग्र-सरकारी दृष्टिकोण को इंगित करते हैं।

3. आपूर्ति शृंखला की संवेदनशीलताएँ

भारत वर्तमान में अपनी महत्वपूर्ण खनिज आवश्यकताओं का एक बड़ा भाग आयात करता है तथा प्रसंस्कृत rare earths एवं cobalt के लिए China पर अत्यधिक निर्भर है। यह संकेंद्रण रक्षा एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्रों के लिए सामरिक जोखिम उत्पन्न करता है। द्विपक्षीय समझौतों एवं घरेलू अन्वेषण के माध्यम से स्रोतों का विविधीकरण एक घोषित नीतिगत प्राथमिकता है।

4. घरेलू अन्वेषण में रिक्तताएँ

भूवैज्ञानिक सर्वेक्षणों द्वारा Jammu and Kashmir में lithium तथा Odisha एवं Andhra Pradesh में rare earths के भंडार इंगित किए जाने के बावजूद, निष्कर्षण अवसंरचना, प्रसंस्करण क्षमता एवं पर्यावरणीय मंजूरी की रूपरेखा अपर्याप्त बनी हुई है। इस रिक्तता को पाटने के लिए भू-वैज्ञानिक मानचित्रण, beneficiation प्रौद्योगिकी तथा सुव्यवस्थित विनियामक मार्गों में समन्वित निवेश अपेक्षित है।

निष्कर्ष

महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षा उतनी ही शासन-संबंधी चुनौती है जितनी भूवैज्ञानिक। घरेलू अन्वेषण, प्रसंस्करण क्षमता एवं सामरिक भंडारण में निरंतर निवेश तथा सुविचारित खनिज कूटनीति — ये सब मिलकर प्रौद्योगिकी-गहन आगामी दशकों में भारत की आत्मनिर्भरता निर्धारित करेंगे।

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