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Physical Geography / Continental Drift — UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

Geography · UPSC CSE
प्रश्न: महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत — साक्ष्य, महत्त्व और पृथ्वी के भूवैज्ञानिक एवं जैवभौगोलिक इतिहास को समझने में इसकी भूमिका

प्रस्तावना

Wegener के महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत ने यह प्रतिपादित कर पृथ्वी विज्ञान को मौलिक रूप से पुनर्निर्देशित किया कि वर्तमान महाद्वीप कभी एक एकल भूखंड Pangaea के रूप में विद्यमान थे। इसके भूवैज्ञानिक, जीवाश्मविज्ञानीय एवं अवसादी साक्ष्य भौतिक भूगोल के केंद्र में हैं।

मुख्य बिंदु

1. भूवैज्ञानिक शैल पट्टी की समरूपता

ब्राजील के तटीय क्षेत्र की प्राचीन शैल संरचनाएँ पश्चिमी अफ्रीकी तट की शैल संरचनाओं से उल्लेखनीय समानता प्रदर्शित करती हैं, जो यह संकेत देती हैं कि ये तटरेखाएँ कभी संलग्न थीं। पृथक महाद्वीपों पर शैल पट्टियों का यह 'jigsaw fit' विस्थापन का सर्वाधिक सशक्त शैलवैज्ञानिक प्रमाण है। यह समरूपता तटरेखा की ज्यामिति से आगे शैल आयु, संघटन एवं संरचनात्मक अभिविन्यास तक विस्तृत है।

2. खनिज निक्षेप की निरंतरता

Ghana में पाए जाने वाले स्वर्ण निक्षेप भूवैज्ञानिक दृष्टि से ब्राजीलियाई पठार से संबद्ध हैं, जो यह सिद्ध करता है कि दोनों भूखंड कभी संलग्न थे। महासागर-पारीय खनिज निरंतरता को पृथक महाद्वीपों पर स्वतंत्र भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं द्वारा स्पष्ट नहीं किया जा सकता। यह इस तथ्य का समर्थन करता है कि आर्थिक खनिज पट्टियाँ महाद्वीपीय पृथक्करण से विच्छिन्न हुईं।

3. Gondwana अवसादी तंत्र

Gondwana अवसादी तंत्र — जो Glossopteris वनस्पति जीवाश्मों एवं विशिष्ट tillite निक्षेपों द्वारा अभिलक्षित है — केवल भारत में नहीं, बल्कि दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया एवं अंटार्कटिका में भी पाया जाता है। दक्षिणी गोलार्ध के छह भूखंडों में यह वितरण एकीकृत Gondwanaland के अंतर्गत साझा निक्षेपण पर्यावरण का प्रबल संकेत देता है। महाद्वीपीय विस्थापन के बिना यह जैवभौगोलिक एवं स्तरिकीय सुसंगति अस्पष्टीकृत रहती है।

4. पुराजलवायु संबंधी साक्ष्य

उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में हिमानी खरोंच एवं tillite निक्षेप तथा ध्रुवीय क्षेत्रों में कोयला संस्तर वर्तमान स्थितियों से असंगत पूर्ववर्ती जलवायु दशाओं को इंगित करते हैं। विस्थापन सिद्धांत के अनुसार महाद्वीपों को पुनर्स्थापित करने पर ये विसंगतियाँ स्पष्ट हो जाती हैं, जो भूवैज्ञानिक काल में भूपर्पटीय प्लेटों के वृहद् क्षैतिज संचलन की पुष्टि करती हैं।

निष्कर्ष

शैल पट्टी समरूपता, खनिज निक्षेप निरंतरता एवं Gondwana अवसाद वितरण — तीनों कथन महाद्वीपीय विस्थापन के वैध साक्ष्य हैं। ये मिलकर एक समेकित भूवैज्ञानिक आख्यान निर्मित करते हैं, जो आधुनिक plate tectonic सिद्धांत का आधार है और वैश्विक आपदा प्रबंधन ढाँचे को दिशा प्रदान करता है।

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