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Biodiversity Conservation — UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

Environment · UPSC CSE
प्रश्न: IUCN Red List की श्रेणियाँ — महत्त्व, संरचना और जैव विविधता संरक्षण नीति में भूमिका

प्रस्तावना

IUCN Red List प्रजातियों के विलुप्ति जोखिम के आकलन हेतु विश्व का सर्वाधिक प्रामाणिक ढाँचा है, जो राष्ट्रीय वन्यजीव संरक्षण कानूनों, आवास संरक्षण प्राथमिकताओं और अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता समझौतों को प्रत्यक्ष रूप से दिशा प्रदान करता है।

मुख्य बिंदु

1. Red List की संरचना

Red List प्रजातियों को नौ श्रेणियों में वर्गीकृत करती है — Least Concern से Extinct तक — जो जनसंख्या ह्रास, भौगोलिक विस्तार और विलुप्ति की संभाव्यता पर आधारित मात्रात्मक मानदंडों पर निर्भर है। यह स्तरीय संरचना नीति-निर्माताओं को खतरे की गंभीरता के अनुपात में संरक्षण संसाधनों के आवंटन में सहायक होती है।

2. Extinct in the Wild (EW) — सही अवधारणा

EW श्रेणी उन प्रजातियों को इंगित करती है जो केवल कृत्रिम पालन, कृषि या अपनी ऐतिहासिक सीमा से बाहर प्राकृतिकीकृत आबादी में जीवित हैं, जबकि जंगल में कोई ज्ञात व्यक्ति नहीं है। यह श्रेणी ex-situ संरक्षण कार्यक्रमों और पुनःप्रवेश योजना को सक्रिय करती है, जैसा कि वैश्विक स्तर पर चिड़ियाघर प्रजनन संघों द्वारा प्रबंधित प्रजातियों में देखा जाता है।

3. Data Deficient (DD) — खतरे की श्रेणी नहीं

DD स्पष्ट रूप से एक गैर-खतरा श्रेणी है; यह विलुप्ति जोखिम के आकलन हेतु अपर्याप्त सूचना का संकेत देती है, न कि खतरे की पूर्वधारणा का। DD को खतरे की श्रेणी मानने की भूल संरक्षण प्राथमिकता निर्धारण को विकृत कर सकती है और सर्वेक्षण निधि के आवंटन को दिशाहीन कर सकती है।

4. Near Threatened (NT) — सही अवधारणा

NT श्रेणी उन प्रजातियों पर लागू होती है जो Vulnerable, Endangered या Critically Endangered की सीमा के निकट हैं, किंतु वर्तमान में उन मानदंडों को पूरा नहीं करतीं। यह एक पूर्व-चेतावनी संकेत के रूप में कार्य करती है, जो किसी प्रजाति के खतरे की श्रेणी में प्रवेश करने से पूर्व निगरानी को प्रेरित करती है।

5. भारत के लिए नीतिगत प्रासंगिकता

भारत का Wildlife Protection Act और Project Tiger/Elephant ढाँचा संरक्षण स्तर निर्धारित करने हेतु Red List आकलनों पर आधारित है। National Biodiversity Action Plan के अंतर्गत Species Recovery Plans के प्रारूपण के लिए श्रेणियों की सटीक व्याख्या अनिवार्य है।

निष्कर्ष

Red List की उपयोगिता श्रेणियों की सटीक व्याख्या पर निर्भर करती है। DD को खतरे की स्थिति मानना या NT मानदंडों की गलत पठन संरक्षण नियोजन को कमज़ोर करती है। प्रजाति-डेटा संग्रह को सुदृढ़ करना साक्ष्य-आधारित जैव विविधता शासन की आधारभूत आवश्यकता है।

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