Q1 · hard · AI-verified
Read the following passage and answer the question:
'नदियाँ हमारी सभ्यता की जननी हैं। भारत की प्राचीन सभ्यताएँ नदियों के किनारे ही पनपीं। गंगा नदी को भारत में माँ का दर्जा दिया गया है। यह नदी उत्तराखंड के गंगोत्री हिमनद से निकलती है और बंगाल की खाड़ी में समाप्त होती है। बिहार में भी गंगा, कोसी, गंडक और बागमती जैसी महत्त्वपूर्ण नदियाँ बहती हैं। इन नदियों से सिंचाई, परिवहन और जल-आपूर्ति होती है। परंतु बढ़ते प्रदूषण और अतिक्रमण के कारण इन नदियों का अस्तित्व खतरे में है।'
गद्यांश के अनुसार गंगा नदी किस हिमनद से निकलती है?
- यमुनोत्री हिमनद
- जोजिला हिमनद
- सियाचिन हिमनद
- गंगोत्री हिमनद
Q2 · easy · AI-verified
Read the following passage and answer the question:
'समय बहुत मूल्यवान है। एक बार बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता। जो लोग समय का सदुपयोग करते हैं, वे जीवन में सफल होते हैं। विद्यार्थियों को विशेष रूप से समय का ध्यान रखना चाहिए। समय नष्ट करना अपने भविष्य को नष्ट करने के समान है।'
गद्यांश के अनुसार समय नष्ट करना किसके समान है?
- स्वास्थ्य खोने के समान
- परिश्रम करने के समान
- भविष्य को नष्ट करने के समान
- धन गँवाने के समान
Q3 · easy · AI-verified
Read the following passage and answer the question:
'वृक्ष हमारे जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। ये हमें ऑक्सीजन देते हैं जिससे हम साँस लेते हैं। वृक्ष वर्षा लाने में भी सहायक होते हैं। इनकी जड़ें भूमि को बाँधे रखती हैं जिससे मिट्टी का कटाव नहीं होता। वृक्षों को काटना पर्यावरण के लिए हानिकारक है। हमें वृक्षारोपण को बढ़ावा देना चाहिए।'
गद्यांश में लेखक क्या बढ़ावा देने की बात करता है?
- वृक्षों की कटाई
- नदियों की सफाई
- वृक्षारोपण
- वर्षा जल संचयन
Q4 · easy · AI-verified
Read the following passage and answer the question:
'स्वच्छता हमारे जीवन का एक महत्त्वपूर्ण अंग है। जहाँ स्वच्छता होती है, वहाँ बीमारियाँ कम होती हैं। गंदगी से अनेक रोग जन्म लेते हैं। इसलिए हमें अपने घर, मुहल्ले और विद्यालय को साफ रखना चाहिए। स्वच्छ वातावरण में मन भी प्रसन्न रहता है।'
गद्यांश के अनुसार गंदगी से क्या होता है?
- बीमारियाँ कम होती हैं
- अनेक रोग जन्म लेते हैं
- वातावरण स्वच्छ होता है
- मन प्रसन्न रहता है
Q5 · medium · AI-verified
Read the following passage and answer the question:
प्रकृति हमारी माँ के समान है। वह हमें अन्न, जल, वायु और आश्रय प्रदान करती है। परंतु मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति का बेरहमी से दोहन किया है। पेड़ काटे जा रहे हैं, नदियाँ प्रदूषित हो रही हैं, और वायुमंडल विषैला होता जा रहा है। यदि हम अभी भी नहीं चेते, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें कभी माफ नहीं करेंगी। प्रकृति की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।
गद्यांश में प्रकृति की तुलना किससे की गई है?
- ईश्वर से
- पिता से
- माँ से
- गुरु से