Paris Agreement का Article 6 सहकारी तंत्रों — बाज़ार-आधारित एवं गैर-बाज़ार दोनों — की मूलभूत संरचना प्रदान करता है, जिससे देश अपने Nationally Determined Contributions (NDCs) को सामूहिक एवं कुशल रूप से पूरा कर सकें।
Article 6.2 द्विपक्षीय सहकारी दृष्टिकोणों को सक्षम बनाता है, जिसके तहत देश Internationally Transferred Mitigation Outcomes (ITMOs) का व्यापार करते हैं, जबकि Article 6.4 एक केंद्रीकृत UN-पर्यवेक्षित कार्बन क्रेडिट तंत्र स्थापित करता है। 'Corresponding Adjustments' के अंतर्गत सुदृढ़ लेखांकन नियम उत्सर्जन कटौती की दोहरी गणना को रोकते हैं।
Article 6.8 स्पष्ट रूप से गैर-बाज़ार दृष्टिकोणों — जैसे क्षमता निर्माण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और नीति समन्वय — को जलवायु लक्ष्य प्राप्ति के वैध मार्गों के रूप में मान्यता देता है। इसका आशय केवल अंतर-देशीय नहीं, बल्कि घरेलू गैर-बाज़ार रणनीतियों को भी समाहित करना है।
Paris Agreement की स्वीकृति के बाद से Article 6 सर्वाधिक विवादास्पद प्रावधानों में रहा है। COP26 (Glasgow) और COP28 (Dubai) सहित क्रमिक COPs में इसके नियम-पुस्तिका को अंतिम रूप देना केंद्रीय मुद्दा रहा। कार्बन बाज़ार की अखंडता और जलवायु वित्त में इसकी केंद्रीय भूमिका निर्विवाद है।
Article 6 को क्रियान्वित करने में पर्यावरणीय अखंडता और विकास आवश्यकताओं के मध्य संतुलन अपेक्षित है। विकासशील देश सुलभ कार्बन वित्त चाहते हैं, जबकि विकसित देश कठोर Additionality और Permanence मानकों पर बल देते हैं — यही तनाव Article 6.4 तंत्र की पर्यवेक्षी निकाय नियमावली में विलंब का कारण बना।
Article 6 एक साथ अवसर और शासन-चुनौती दोनों है: सुनियोजित कार्बन बाज़ार जलवायु वित्त को कुशलतापूर्वक संग्रहीत कर सकते हैं, किंतु इसके लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और समता को परिचालन ढाँचे में प्रारंभ से ही अंतर्निहित करना अनिवार्य है।
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