Sarkari RiseLogin

Climate Change / REDD+ / Carbon Projects — UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

Environment · UPSC CSE
प्रश्न: भारत में REDD+ तंत्र — महत्त्व, कार्यान्वयन की चुनौतियाँ और कार्बन बाज़ार की संभावनाएँ

प्रस्तावना

REDD+ (Reducing Emissions from Deforestation and Forest Degradation) एक निष्पादन-आधारित जलवायु वित्त तंत्र है, जो खड़े वनों को आर्थिक मूल्य प्रदान करता है और भारत जैसे विकासशील देशों के लिए वन संरक्षण को वित्तीय दृष्टि से व्यवहार्य बनाता है।

मुख्य बिंदु

1. तंत्र एवं नीतिगत ढाँचा

REDD+ का संचालन UNFCCC के ढाँचे के अंतर्गत होता है, जो देशों को एक संदर्भ स्तर के सापेक्ष वन कार्बन उत्सर्जन घटाने हेतु प्रोत्साहित करता है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा तैयार भारत की National REDD+ Strategy, देश के Nationally Determined Contributions (NDCs) के अनुरूप है, जिसमें वन आवरण के माध्यम से 2.5–3 बिलियन टन CO₂ समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक निर्मित करने की प्रतिबद्धता है।

2. Plan Vivo प्रमाणन एवं सामुदायिक संबद्धता

Plan Vivo समुदाय-आधारित भूमि उपयोग एवं वानिकी परियोजनाओं के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानक है। इस मानक के अंतर्गत प्रमाणन यह सुनिश्चित करता है कि उत्पन्न कार्बन क्रेडिट स्थानीय एवं जनजातीय समुदायों के मापनीय आजीविका लाभों से जुड़े हों, जो पारिस्थितिकी सेवाओं पर निर्भर भारत की वन-सीमांत जनसंख्या के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है।

3. शासन एवं कार्यान्वयन की चुनौतियाँ

प्रभावी REDD+ कार्यान्वयन के लिए सुदृढ़ वन निगरानी प्रणाली, स्पष्ट भूमि स्वामित्व अधिकार और न्यायसंगत लाभ-वितरण तंत्र आवश्यक हैं। भारत में राज्य वन विभागों और Forest Rights Act के अंतर्गत जनजातीय अधिकारों के बीच अधिकार-क्षेत्र का अतिव्यापन, असंगत MRV (Measurement, Reporting and Verification) क्षमता तथा स्वैच्छिक कार्बन बाज़ारों के साथ सीमित एकीकरण प्रमुख चुनौतियाँ हैं।

4. कार्बन बाज़ार की संभावना

Energy Conservation (Amendment) Act के अंतर्गत भारत की Carbon Credit Trading Scheme के क्रियान्वयन के साथ, REDD+ परियोजनाएँ घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय स्वैच्छिक कार्बन बाज़ारों में योगदान कर सकती हैं। इससे एक राजकोषीय प्रोत्साहन संरचना निर्मित होती है, जो राज्य वन बजट की पूर्ति कर सकती है और वन-आश्रित समुदायों पर दबाव को कम कर सकती है।

निष्कर्ष

REDD+ में संरक्षण की अनिवार्यताओं और विकास की आवश्यकताओं के मध्य सामंजस्य स्थापित करने की वास्तविक क्षमता है, किंतु इसे साकार करने के लिए भू-स्वामित्व सुरक्षा को सुदृढ़ करना, MRV अवसंरचना में सुधार करना और यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि कार्बन राजस्व उन समुदायों तक पहुँचे जो भारत के वनों के वास्तविक संरक्षक हैं।

शब्द गणना: 331

AI से अपना उत्तर मूल्यांकन कराएँ

GS Answer Coach आपके उत्तर को Introduction, Body, Conclusion के आधार पर परखता है — 30 सेकंड में।

GS Answer Coach खोलेंइस topic के प्रश्न अभ्यास →

और Environment के मॉडल उत्तर

Agriculture
Air Pollution / SO2 Emissions
Biodiversity
Biodiversity / Endemic Species
Biodiversity / Insects
Biodiversity Conservation

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए दैनिक AI कोच

Essay Coach · GS Answer Coach · Cutoff Planner · 500+ Mains PYQs — साइन अप मुफ्त।

मुफ्त साइन अपUPSC Pro देखें