भारत की विस्तारित होती डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए सुदृढ़ साइबर घटना प्रतिक्रिया तंत्र अनिवार्य है। Ministry of Electronics and Information Technology के अधीन राष्ट्रीय नोडल एजेंसी के रूप में CERT-In, साइबर खतरा प्रबंधन की संस्थागत संरचना का केंद्रीय स्तंभ है।
CERT-In को Information Technology (Amendment) Act, 2008 के अंतर्गत कंप्यूटर सुरक्षा घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने हेतु राष्ट्रीय नोडल एजेंसी के रूप में विधिवत् अधिसूचित किया गया है। इसके मूल कार्यों में साइबर खतरों से संबंधित सूचनाओं का संग्रह, विश्लेषण एवं प्रसार, चेतावनी जारी करना तथा विभिन्न क्षेत्रों में घटना प्रतिक्रिया का समन्वय करना सम्मिलित है।
CERT-In के 2022 के निर्देशों ने अनुपालन की परिधि को उल्लेखनीय रूप से विस्तृत किया। VPN संचालकों, क्लाउड प्रदाताओं और डेटा केंद्रों सहित सेवा प्रदाताओं को उपयोगकर्ता लॉग 180 दिनों तक संरक्षित रखना अनिवार्य किया गया। इसके अतिरिक्त, साइबर घटनाओं की सूचना छह घंटे के भीतर देना अनिवार्य किया गया, जो वैश्विक मानकों की तुलना में एक कठोर समय-सीमा है।
CERT-In, वित्त और ऊर्जा जैसे क्षेत्र-विशिष्ट CERTs के साथ समन्वय में कार्य करता है तथा अंतरराष्ट्रीय समकक्ष संस्थाओं से भी संपर्क बनाए रखता है। यह स्तरीय संरचना महत्त्वपूर्ण सूचना अवसंरचना में ऊर्ध्वाधर गहराई और क्षैतिज व्यापकता, दोनों सुनिश्चित करती है।
कार्यान्वयन में अंतराल बने हुए हैं — अनेक लघु एवं मध्यम उद्यमों में रिपोर्टिंग समय-सीमाओं का पालन करने की तकनीकी क्षमता का अभाव है। 2022 के निर्देशों के पश्चात् कई VPN प्रदाताओं ने अपने सर्वर विदेश स्थानांतरित कर लिए, जिससे प्रवर्तन क्षेत्राधिकार और डेटा संप्रभुता पर प्रश्न उठे हैं।
CERT-In की विकसित होती नियामक स्थिति सुरक्षा अनिवार्यताओं और परिचालन व्यवहार्यता के मध्य तनाव को प्रतिबिंबित करती है। इसकी क्षमता को सुदृढ़ करना, क्षेत्राधिकार को स्पष्ट करना और अनुपालन को प्रोत्साहित करना — ये तीनों कारक भारत के साइबर शासन ढाँचे की प्रभावशीलता और विश्वसनीयता निर्धारित करेंगे।
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