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Environment / Cloud Seeding — UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

Environment · UPSC CSE
प्रश्न: कृत्रिम वर्षा तकनीक के रूप में Cloud Seeding — तंत्र, प्रदूषण नियंत्रण में अनुप्रयोग, और शासन संबंधी चुनौतियाँ

प्रस्तावना

Cloud Seeding एक मौसम परिवर्तन तकनीक है, जो बादलों में hygroscopic कारक प्रविष्ट कर वर्षण प्रेरित करती है। शहरी एवं औद्योगिक क्षेत्रों में तीव्र वायु प्रदूषण की स्थितियों से निपटने हेतु यह नीतिगत चर्चा का विषय बनी है।

मुख्य बिंदु

1. तंत्र एवं प्रयुक्त कारक

Cloud Seeding में सामान्यतः silver iodide, liquid propane अथवा potassium iodide और calcium chloride जैसे hygroscopic लवणों को nucleating कारकों के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। ये पदार्थ संघनन केंद्रक प्रदान करते हैं, जिनके चारों ओर जलवाष्प एकत्रित होकर वर्षण-योग्य बूँदें बनाती हैं। भू-आकृति एवं बादल की स्थिति के अनुसार इन्हें वायुयान, भू-आधारित जनरेटर या तोपों के माध्यम से प्रसारित किया जाता है।

2. प्रदूषण न्यूनीकरण में अनुप्रयोग

कृत्रिम वर्षा वायुमंडल से particulate matter, nitrogen oxides एवं निलंबित धूल को धोकर smog आपात स्थितियों में अस्थायी राहत प्रदान करती है। खतरनाक Air Quality Index स्तर वाले कई नगरों ने odd-even योजनाओं और औद्योगिक बंदी के साथ-साथ इसे पूरक हस्तक्षेप के रूप में अपनाया है। यह समस्या के स्रोत नहीं, बल्कि लक्षण को संबोधित करती है, अतः यह संरचनात्मक समाधान नहीं, संकट-प्रबंधन उपकरण है।

3. शासन एवं विनियामक रिक्तताएँ

भारत में वर्तमान में मौसम परिवर्तन संचालन को नियंत्रित करने वाला कोई समर्पित विधायी ढाँचा नहीं है। India Meteorological Department, राज्य सरकारों और नागरिक उड्डयन प्राधिकरणों के मध्य समन्वय तदर्थ आधार पर होता है। पड़ोसी क्षेत्रों के वर्षण प्रतिरूप को प्रभावित करने वाले सीमापारीय प्रभाव, अंतर-राज्यीय समता एवं प्रथागत पर्यावरण विधि के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों से जुड़े प्रश्न उठाते हैं।

4. पारिस्थितिक एवं प्रभावकारिता संबंधी चिंताएँ

मृदा और जल निकायों में silver iodide का दीर्घकालिक संचय पारिस्थितिक जोखिम उत्पन्न करता है, जिसका भारतीय परिस्थितियों में पर्याप्त अध्ययन नहीं हुआ है। इसकी प्रभावकारिता पूर्व-विद्यमान बादल आवरण, आर्द्रता एवं वायु प्रतिरूप पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे शुष्क शीतकालीन inversion के दौरान — जब प्रदूषण चरम पर होता है — यह अविश्वसनीय सिद्ध होती है।

निष्कर्ष

Cloud Seeding वायु प्रदूषण के विरुद्ध तकनीकी रूप से व्यवहार्य किंतु परिचालन दृष्टि से सीमित प्रतिक्रिया है। दीर्घकालिक वायु गुणवत्ता शासन के लिए उत्सर्जन-स्रोत नियंत्रण अनिवार्य है; कृत्रिम वर्षा केवल एक व्यापक स्वच्छ-वायु नीति संरचना के अंतर्गत विनियमित आपातकालीन पूरक के रूप में ही उपयोगी हो सकती है।

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