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Environment / International Environmental Laws — UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

Environment · UPSC CSE
प्रश्न: Paris Agreement — वैश्विक तापमान वृद्धि को सीमित करने हेतु उद्देश्य, संरचना एवं कार्यान्वयन की चुनौतियाँ

प्रस्तावना

Paris Agreement (2015) सर्वाधिक महत्त्वाकांक्षी बहुपक्षीय जलवायु संधि है, जो राष्ट्रों को वैश्विक औसत तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर से 2°C से नीचे, तथा 1.5°C तक सीमित रखने के लिए प्रतिबद्ध करती है — यह सीमा अपरिवर्तनीय जलवायु परिवर्तन को रोकने की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

मुख्य बिंदु

1. मूल संरचना: NDCs एवं Ratchet Mechanism

यह संधि Nationally Determined Contributions (NDCs) के माध्यम से संचालित होती है, जिसमें प्रत्येक हस्ताक्षरकर्ता राष्ट्र अपने उत्सर्जन कटौती लक्ष्य स्वयं निर्धारित करता है। पाँच-वर्षीय समीक्षा चक्र — 'Ratchet Mechanism' — यह सुनिश्चित करता है कि प्रतिबद्धताएँ स्थिर न रहकर क्रमशः अधिक महत्त्वाकांक्षी बनती जाएँ।

2. विभेदित उत्तरदायित्व

संधि में Common But Differentiated Responsibilities (CBDR) के सिद्धांत को बनाए रखा गया है, जो विकासशील देशों को समय-सीमा में लचीलापन प्रदान करता है तथा विकसित देशों पर जलवायु वित्त उपलब्ध कराने का दायित्व अधिरोपित करता है। विकासशील देशों को प्रतिवर्ष $100 बिलियन जलवायु वित्त की प्रतिज्ञा की पूर्ति एवं पर्याप्तता विवाद का विषय बनी हुई है।

3. कार्यान्वयन अंतराल

वर्तमान में सभी NDCs को पूर्णतः लागू किए जाने पर भी वर्ष 2100 तक तापमान वृद्धि 2°C से अधिक रहने का अनुमान है। घोषित प्रतिबद्धताओं और 1.5°C लक्ष्य की प्राप्ति हेतु आवश्यक कार्रवाई के बीच का यह अंतर संधि की सर्वाधिक गंभीर संरचनात्मक कमज़ोरी है।

4. भारत का पक्ष

भारत ने वर्ष 2070 तक net-zero उत्सर्जन प्राप्त करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है तथा अपने NDCs को अद्यतन करते हुए गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत क्षमता का पर्याप्त अंश सम्मिलित किया है। विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए विकासात्मक आवश्यकताओं और जलवायु दायित्वों के मध्य संतुलन स्थापित करना केंद्रीय शासन-चुनौती है।

निष्कर्ष

Paris Agreement की स्वैच्छिक, bottom-up संरचना प्रवर्तनीयता की तुलना में सार्वभौमिकता को प्राथमिकता देती है। महत्त्वाकांक्षा के अंतराल को पाटने हेतु सुदृढ़ जवाबदेही तंत्र, न्यायसंगत जलवायु वित्त प्रवाह एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अनिवार्य हैं — अन्यथा 1.5°C का लक्ष्य व्यावहारिक के स्थान पर केवल आकांक्षात्मक बनकर रह जाएगा।

शब्द गणना: 290

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