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Environment / Plastic Pollution — UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

Environment · UPSC CSE
प्रश्न: प्लास्टिक प्रदूषण — दैनिक उत्पादों में प्लास्टिक के अप्रत्यक्ष एवं गैर-स्पष्ट स्रोत तथा उनके पर्यावरणीय निहितार्थ

प्रस्तावना

प्लास्टिक प्रदूषण केवल दृश्यमान पैकेजिंग कचरे तक सीमित नहीं है। सिगरेट बट्स, चश्मे के लेंस और कार के टायर — ये सभी प्लास्टिक युक्त हैं और पारिस्थितिक तंत्र में सूक्ष्म-प्लास्टिक संदूषण के महत्त्वपूर्ण किंतु प्रायः उपेक्षित स्रोत हैं।

मुख्य बिंदु

1. प्लास्टिक कचरे के रूप में सिगरेट बट्स

सिगरेट फिल्टर cellulose acetate से निर्मित होते हैं, जो प्लास्टिक का एक रूप है और सहज जैव-अपघटन नहीं करता। प्रतिवर्ष अरबों की संख्या में फेंके जाने वाले ये बट्स मृदा एवं जलाशयों में विषाक्त रसायन और सूक्ष्म-प्लास्टिक निक्षालित करते हैं तथा वैश्विक तटीय सफाई अभियानों में सर्वाधिक एकत्रित वस्तुओं में गिने जाते हैं।

2. चश्मे के लेंस और बहुलक संरचना

आधुनिक नेत्र-लेंस प्रायः polycarbonate या अन्य उच्च-सूचकांक प्लास्टिक से निर्मित होते हैं, न कि काँच से। ये सामग्रियाँ हल्की एवं आघात-प्रतिरोधी होने के बावजूद, त्यागे जाने पर प्लास्टिक कचरे में वृद्धि करती हैं। भारत में इनके पुनर्चक्रण की अवसंरचना अभी भी पर्याप्त रूप से विकसित नहीं है।

3. कार टायर और सूक्ष्म-प्लास्टिक अपवाह

टायरों में प्रयुक्त synthetic rubber में styrene-butadiene होता है, जो पेट्रोलियम-व्युत्पन्न प्लास्टिक बहुलक है। टायर घर्षण कण अब शहरी वर्षा-जल अपवाह में सूक्ष्म-प्लास्टिक प्रदूषण के प्रमुख स्रोत के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुके हैं, जो नदियों और अंततः समुद्री पर्यावरण में प्रवेश कर जलीय जैव-विविधता को प्रभावित करते हैं।

4. नीतिगत एवं विनियामक रिक्तताएँ

भारत के Plastic Waste Management Rules का केंद्र-बिंदु मुख्यतः एकल-उपयोग प्लास्टिक और पैकेजिंग है। Extended Producer Responsibility ढाँचे ने टायर घर्षण कणों, ऑप्टिकल कचरे और तंबाकू उत्पाद फिल्टरों को अभी तक पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया है, जिससे राष्ट्रीय प्लास्टिक प्रदूषण नीति में महत्त्वपूर्ण विनियामक रिक्तताएँ बनी हुई हैं।

निष्कर्ष

प्लास्टिक प्रदूषण के प्रभावी नियंत्रण हेतु दृश्यमान पैकेजिंग से आगे बढ़कर अंतर्निहित एवं घर्षण-जनित प्लास्टिक को विनियमित करना आवश्यक है। उत्पादक उत्तरदायित्व का विस्तार, सामग्री-विशिष्ट पुनर्चक्रण में निवेश और पर्यावरणीय मानकों में सूक्ष्म-प्लास्टिक निगरानी का समावेश अपरिहार्य कदम हैं।

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