Sarkari RiseLogin

Environmental Laws — UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

Environment · UPSC CSE
प्रश्न: CITES ढाँचा — संरचना, महत्त्व और वन्यजीव व्यापार नियमन में भारत का कार्यान्वयन

प्रस्तावना

CITES अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव व्यापार शासन की आधारशिला है, जो एक स्तरीय परिशिष्ट प्रणाली के माध्यम से 38,000 से अधिक प्रजातियों के वाणिज्यिक व्यापार को संरक्षण आवश्यकताओं और संप्रभु व्यापार हितों के मध्य संतुलन बनाते हुए नियमित करता है।

मुख्य बिंदु

1. त्रि-स्तरीय परिशिष्ट संरचना

Appendix I में विलुप्तप्राय प्रजातियाँ सम्मिलित हैं; वाणिज्यिक व्यापार व्यावहारिक रूप से प्रतिबंधित है तथा केवल असाधारण गैर-वाणिज्यिक उद्देश्यों हेतु निर्यातक एवं आयातक दोनों देशों से अनुमति अपेक्षित है। Appendix II में वे प्रजातियाँ हैं जिनके अत्यधिक दोहन को रोकने के लिए नियंत्रित व्यापार अनिवार्य है। Appendix III के अंतर्गत कोई भी पक्षकार राष्ट्र उन प्रजातियों को सूचीबद्ध कर सकता है जिनके व्यापार नियंत्रण में वह बहुपक्षीय सहयोग चाहता है।

2. भारत का विधिक एकीकरण

भारत ने CITES की पुष्टि की है और Wildlife (Protection) Act, 1972 में संशोधनों के माध्यम से घरेलू विधि को CITES दायित्वों के अनुरूप बनाया है। इस अधिनियम की अनुसूचियाँ CITES परिशिष्टों से व्यापक रूप से संगत हैं, जिससे प्रवर्तन एजेंसियाँ सूचीबद्ध प्रजातियों के घरेलू कब्जे और सीमापार आवागमन दोनों को नियमित कर सकती हैं।

3. शासन एवं प्रवर्तन की चुनौतियाँ

विधिक ढाँचे के बावजूद कार्यान्वयन में अंतराल विद्यमान हैं — छिद्रपूर्ण सीमाएँ, अपर्याप्त फोरेंसिक क्षमता और अंतर-एजेंसी समन्वय की अनियमितता प्रतिरोधक क्षमता को कमज़ोर करती है। Project Tiger, Project Elephant और TRAFFIC India के निगरानी नेटवर्क आंशिक रूप से क्षतिपूर्ति करते हैं, किंतु उपभोक्ता देशों में माँग-पक्ष में कमी की समस्या संरचनात्मक रूप से अनसुलझी है।

4. ढाँचे पर उभरते दबाव

Conference of Parties की बैठकों में व्यावसायिक दृष्टि से मूल्यवान प्रजातियों — जैसे कुछ काष्ठ एवं समुद्री प्रजातियों — को निम्न सूची में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव, संरक्षण प्राथमिकताओं और व्यापार-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के मध्य तनाव को उजागर करते हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों के माध्यम से डिजिटल वन्यजीव तस्करी ने संधि की मूल प्रवर्तन संरचना को पीछे छोड़ दिया है।

निष्कर्ष

CITES एक अपरिहार्य बहुपक्षीय ढाँचा प्रदान करता है, किंतु इसकी प्रभावशीलता घरेलू विधायी सुसंगति, सुदृढ़ प्रवर्तन निवेश और माँग-न्यूनीकरण कूटनीति पर निर्भर करती है — इन क्षेत्रों में भारत की विकसित होती नीतिगत स्थिति एक रचनात्मक क्षेत्रीय उदाहरण स्थापित कर सकती है।

शब्द गणना: 319

AI से अपना उत्तर मूल्यांकन कराएँ

GS Answer Coach आपके उत्तर को Introduction, Body, Conclusion के आधार पर परखता है — 30 सेकंड में।

GS Answer Coach खोलेंइस topic के प्रश्न अभ्यास →

इसी topic के PYQ

PYQ 2020
Consider the following statements: 1. 36% of India's districts are classified as "overexploited" or "critical" by the Central Ground Water Authority (CGWA). 2. CGWA was formed under the Environment (Protection) Act. 3. India has the largest area under groundwater irrigation in the world. Which of the statements given above is/are correct?
PYQ
Under the Forest (Conservation) Act, 1980, prior approval of which authority is required before diverting forest land for non-forest purposes?
PYQ
The National Green Tribunal (NGT) was established under which Act and in which year?
PYQ
Which international convention led to India enacting the Biological Diversity Act, 2002?
PYQ
The Coastal Regulation Zone (CRZ) Notification is issued under which Act?

और Environment के मॉडल उत्तर

Agriculture
Air Pollution / SO2 Emissions
Biodiversity
Biodiversity / Endemic Species
Biodiversity / Insects
Biodiversity Conservation

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए दैनिक AI कोच

Essay Coach · GS Answer Coach · Cutoff Planner · 500+ Mains PYQs — साइन अप मुफ्त।

मुफ्त साइन अपUPSC Pro देखें