EU का Carbon Border Adjustment Mechanism जलवायु-व्यापार नीति में एक संरचनात्मक परिवर्तन को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य आयातित वस्तुओं पर वही कार्बन लागत सुनिश्चित करना है जो EU के घरेलू उत्पादकों पर लागू होती है, ताकि carbon leakage को रोका जा सके।
CBAM के अंतर्गत निर्दिष्ट कार्बन-सघन वस्तुओं के आयातकों को CBAM प्रमाणपत्र खरीदने होते हैं, जो EU Emissions Trading System (ETS) के अंतर्गत देय कार्बन मूल्य के समतुल्य होते हैं। यह व्यवस्था दंडात्मक शुल्क के स्थान पर समान प्रतिस्पर्धी परिस्थितियाँ निर्मित करती है। प्रमाणपत्र का मूल्य ETS की साप्ताहिक औसत नीलामी कीमत से निर्धारित होता है।
अक्टूबर 2023 से प्रारंभ हुए संक्रमणकालीन चरण में सीमेंट, लोहा एवं इस्पात, एल्युमीनियम, उर्वरक, विद्युत और हाइड्रोजन क्षेत्र सम्मिलित हैं — ये सभी उच्च कार्बन-सघनता और व्यापक व्यापार संपर्क वाले क्षेत्र हैं। इस चरण में केवल रिपोर्टिंग दायित्व लागू हैं; वित्तीय दायित्व 2026 से पूर्ण कार्यान्वयन के साथ प्रभावी होंगे।
CBAM को स्पष्ट रूप से WTO-अनुकूल ढाँचे में निर्मित किया गया है। यह घरेलू और आयातित दोनों वस्तुओं पर समान कार्बन लागत आरोपित करता है, जिससे गैर-भेदभाव के सिद्धांत का पालन होता है। EU इसे पर्यावरण संरक्षण से संबंधित GATT Article XX अपवादों के अंतर्गत प्रस्तुत करता है, यद्यपि इसकी WTO अनुकूलता पर कानूनी एवं कूटनीतिक परीक्षण जारी है।
भारत जैसे देश, जो EU को इस्पात और एल्युमीनियम निर्यात करते हैं, प्रतिस्पर्धात्मक दबाव का सामना करेंगे। CBAM व्यापारिक भागीदारों को घरेलू कार्बन मूल्य-निर्धारण अपनाने हेतु प्रोत्साहित करता है, जिससे वैश्विक जलवायु कार्रवाई में तेजी आ सकती है; किंतु यह विकासशील देशों के निर्यात पर एकपक्षीय जलवायु शर्तों की चिंता भी उत्पन्न करता है।
CBAM व्यापार और जलवायु शासन के अभिसरण का प्रतीक है। इसकी दीर्घकालिक प्रभावशीलता न्यायसंगत कार्यान्वयन, पारदर्शी कार्बन लेखांकन और बहुपक्षीय संवाद पर निर्भर करती है, ताकि यह प्रच्छन्न व्यापार अवरोध न बन जाए।
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