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Microbiology / Viruses — UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

Environment · UPSC CSE
प्रश्न: विषाणुओं की प्रकृति और पारिस्थितिक महत्ता — क्षमताएँ, परपोषी अंतःक्रियाएँ और पर्यावरणीय भूमिकाएँ

प्रस्तावना

विषाणु पृथ्वी पर सर्वाधिक प्रचुर जैविक इकाइयों में से हैं, जो प्रत्येक ज्ञात पारिस्थितिकी तंत्र में विद्यमान हैं और लगभग सभी जीवन-रूपों से अंतःक्रिया करते हैं। उनकी सीमाओं संबंधी भ्रांतियाँ सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरण नीति और जैव-सुरक्षा प्रशासन पर प्रत्यक्ष प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं।

मुख्य बिंदु

1. समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में विषाणु

समुद्री जल में विषाणुओं की असाधारण रूप से उच्च सांद्रता पाई जाती है — अनुमान है कि सतही समुद्री जल के प्रति लीटर में खरबों विषाणु होते हैं। समुद्री विषाणु सूक्ष्मजीव कोशिकाओं को विखंडित कर कार्बनिक पदार्थ मुक्त करते हैं, जिससे पोषक-चक्रण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लवणीय, उच्च-दाब और पराबैंगनी-विकिरण युक्त समुद्री वातावरण में उनका अस्तित्व इस धारणा को पूर्णतः खंडित करता है कि कोई भी विषाणु महासागरों में जीवित नहीं रह सकता।

2. Bacteriophages — जीवाणुओं को संक्रमित करने वाले विषाणु

Bacteriophages ऐसे विषाणु हैं जो विशेष रूप से जीवाणु कोशिकाओं को संक्रमित करने के लिए अनुकूलित हैं और सूक्ष्मजीव विज्ञान में सर्वाधिक अध्ययनित जैविक इकाइयों में से हैं। Phage therapy — प्रतिजैविक-प्रतिरोधी जीवाणु संक्रमणों के उपचार हेतु Bacteriophages का उपयोग — नैदानिक अनुसंधान का एक सक्रिय क्षेत्र है। उनका अस्तित्व इस दावे को निर्विवाद रूप से असत्य सिद्ध करता है कि विषाणु जीवाणुओं को संक्रमित नहीं कर सकते।

3. परपोषी अनुलेखन तंत्र पर विषाणुओं का नियंत्रण

अनेक विषाणु परपोषी कोशिका के अनुलेखन तंत्र को अपने प्रतिकृतिकरण के अनुकूल पुनर्गठित करते हैं। उदाहरणतः, कुछ DNA विषाणु नियामक प्रोटीन प्रविष्ट कराकर परपोषी RNA polymerase की गतिविधि को पुनर्निर्देशित करते हैं, जबकि Retroviruses परपोषी जीनोम में समाकलित होकर जीन अभिव्यक्ति के प्रतिरूप को परिवर्तित करते हैं। कोशिकीय अनुलेखन गतिविधि को संशोधित करने की यह क्षमता वास्तव में विषाणु-जनित रोगजनन की एक परिभाषित विशेषता है।

4. नीति और जैव-सुरक्षा निहितार्थ

विषाणु जीव-विज्ञान की सटीक समझ प्रभावी जैव-निगरानी, महामारी-तैयारी ढाँचों और पर्यावरण निगरानी प्रोटोकॉल के निर्माण का आधार है। विषाणुओं की बहुमुखी क्षमता — परपोषियों, आवासों या कोशिकीय अंतःक्रियाओं में — को कम आँकने से One Health दृष्टिकोण में रिक्तियाँ उत्पन्न होती हैं, जो मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य प्रशासन को एकीकृत करता है।

निष्कर्ष

तीनों कथन असत्य हैं। विषाणु महासागरों में जीवित रहते हैं, जीवाणुओं को संक्रमित करते हैं और परपोषी अनुलेखन को परिवर्तित करते हैं। सुदृढ़ पर्यावरणीय एवं स्वास्थ्य प्रशासन का आधार इस जैविक वास्तविकता पर होना चाहिए, न कि विषाणु-सीमाओं संबंधी पुरानी मान्यताओं पर।

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