भारत का संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क वन्यजीव संरक्षण और आर्द्रभूमि परिरक्षण को एकीकृत करता जा रहा है। मध्य प्रदेश स्थित Madhav National Park इस अभिसरण का प्रतिनिधि उदाहरण है, जिसे हाल ही में Tiger Reserve घोषित किया गया है और जिसमें एक Ramsar आर्द्रभूमि भी स्थित है।
Madhav National Park को वर्ष 2025 में भारत के नवीनतम Tiger Reserve के रूप में घोषित किया गया, जिससे Project Tiger नेटवर्क का विस्तार हुआ। इस दर्जे से Wildlife Protection Act के अंतर्गत सुदृढ़ विधिक संरक्षण, समर्पित buffer zones एवं केंद्रीय वित्तपोषण प्राप्त होता है, जो Vindhyan परिदृश्य में कॉरिडोर संपर्कता को सशक्त बनाता है।
राष्ट्रीय उद्यान की सीमाओं के भीतर स्थित Sakhya Sagar झील को जलपक्षी आवास और मीठे जल पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में उसके पारिस्थितिक मूल्य की मान्यता में Ramsar Site का दर्जा प्राप्त है। Tiger Reserve और Ramsar Site की यह दोहरी स्थिति वन्यजीव एवं आर्द्रभूमि प्रबंधन प्राधिकरणों के बीच समन्वय की अनिवार्यता से एक विशिष्ट शासन चुनौती उत्पन्न करती है।
Madhav National Park पूर्णतः मध्य प्रदेश के Shivpuri जिले में स्थित है। यद्यपि यह राज्य सीमा के निकट है, तथापि इसका क्षेत्र राजस्थान के साथ साझा नहीं है। एकीकृत प्रबंधन योजना और अवैध शिकार-रोधी अभियानों के लिए स्पष्ट क्षेत्राधिकार सीमाएँ अनिवार्य हैं।
ऐसे बहु-दर्जा प्राप्त संरक्षित क्षेत्रों के प्रभावी प्रबंधन हेतु National Tiger Conservation Authority के प्रोटोकॉल और Ramsar Convention के दायित्वों का अभिसरण आवश्यक है। eco-development committees के माध्यम से स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करने से आजीविका दबाव के कारण संरक्षण उपलब्धियाँ क्षीण नहीं होतीं।
Madhav National Park की दोहरी अभिहिति यह रेखांकित करती है कि जैव विविधता संरक्षण और आर्द्रभूमि परिरक्षण परस्पर प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि पूरक लक्ष्य हैं। अंतर-एजेंसी समन्वय पर आधारित एकीकृत प्रबंधन ढाँचा ही यह निर्धारित करेगा कि यह संरक्षित परिदृश्य दीर्घकालिक पारिस्थितिक परिणाम दे सकता है या नहीं।
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