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Science & Technology / Biotechnology / Gene Therapy — UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

Environment · UPSC CSE
प्रश्न: जीन थेरेपी और आनुवंशिक औषधियाँ — तंत्र, वितरण प्रणालियाँ, महत्त्व और सीमाएँ

प्रस्तावना

आनुवंशिक औषधियाँ वंशानुगत एवं अर्जित रोगों के उपचार में एक मूलभूत परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करती हैं — ये लक्षणों के प्रबंधन के बजाय दोषपूर्ण जीन रूपी आणविक मूल कारण को लक्षित करती हैं, जिससे ये आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक बन गई हैं।

मुख्य बिंदु

1. मूल तंत्र: दोषपूर्ण जीन का संशोधन

आनुवंशिक औषधियाँ रोग के लिए उत्तरदायी दोषपूर्ण जीन को सुधारने, प्रतिस्थापित करने, निष्क्रिय करने अथवा क्षतिपूर्ति करने के माध्यम से कार्य करती हैं। पारंपरिक औषधियों के विपरीत, ये उपचार जैव-रासायनिक मार्गों को नहीं, बल्कि जीनोमिक स्तर पर हस्तक्षेप करते हैं। Sickle cell disease, कुछ वंशानुगत दृष्टि-दोष विकारों और कुछ कैंसर में नैदानिक-स्तरीय जीन थेरेपी के प्रयोग हो चुके हैं।

2. वितरण प्रणालियाँ: Vectors और Nanoparticles

लक्षित कोशिकाओं में आनुवंशिक सामग्री पहुँचाना केंद्रीय अभियांत्रिकी चुनौती है। Adeno-associated viruses जैसे इंजीनियर्ड वायरल vectors का व्यापक उपयोग होता है। mRNA-आधारित टीकों के माध्यम से वैश्विक ध्यान आकर्षित करने वाले Lipid nanoparticles एक गैर-वायरल विकल्प हैं, जो अधिक scalable और कम प्रतिरक्षाजनक होने के कारण RNA-आधारित उपचारों में प्राथमिकता पा रहे हैं।

3. सटीक लक्ष्यीकरण, संपूर्ण DNA परिवर्तन नहीं

एक महत्त्वपूर्ण तथ्य यह है कि आनुवंशिक औषधियाँ संपूर्ण DNA अनुक्रम को नहीं बदलतीं; वे उच्च परिशुद्धता के साथ विशिष्ट जीन या अनुक्रमों को लक्षित करती हैं। CRISPR-Cas9 जैसी तकनीकें स्थल-विशिष्ट संपादन सक्षम करती हैं, जबकि RNA interference व्यापक जीनोम को प्रभावित किए बिना विशेष जीन अभिव्यक्ति को निष्क्रिय करती है। संपूर्ण DNA अनुक्रम का परिवर्तन जैविक दृष्टि से विनाशकारी होगा।

4. शासन और नैतिक चुनौतियाँ

भारत में Central Drugs Standard Control Organisation के दिशा-निर्देशों सहित वैश्विक नियामक ढाँचे सुरक्षा, germline editing संबंधी चिंताओं, न्यायसंगत पहुँच और दीर्घकालिक निगरानी को संबोधित करने हेतु विकसित हो रहे हैं। Somatic gene therapy (केवल रोगी को प्रभावित करने वाली) और germline editing (वंशानुगत परिवर्तन) के बीच का अंतर गहन नैतिक प्रश्न उठाता है, जिसके लिए सुदृढ़ नीतिगत निगरानी अनिवार्य है।

निष्कर्ष

आनुवंशिक औषधियाँ उन रोगों के लिए परिवर्तनकारी संभावनाएँ रखती हैं जो पूर्व में अचिकित्स्य मानी जाती थीं, किंतु इस संभावना की प्राप्ति के लिए आनुपातिक विनियमन, घरेलू जैव-विनिर्माण क्षमता में निवेश और नवाचार को सामाजिक सुरक्षा उपायों से संतुलित करने वाले नैतिक ढाँचे अपरिहार्य हैं।

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