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Science & Technology / Explosives — UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

Environment · UPSC CSE
प्रश्न: उच्च-ऊर्जा घनत्व विस्फोटक (CL-20, HMX, LLM-105) — विशेषताएँ, अनुप्रयोग और शासन-संबंधी चुनौतियाँ

प्रस्तावना

उच्च-ऊर्जा घनत्व सामग्रियाँ (HEDMs) ऊर्जावान रसायन विज्ञान की अग्रिम पंक्ति में हैं, जहाँ प्रति इकाई द्रव्यमान अधिकतम विस्फोटक उत्पादन सैन्य प्रभावशीलता, अंतरिक्ष प्रणोदन दक्षता और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से निर्णायक महत्त्व रखता है।

मुख्य बिंदु

1. सामान्य विशेषता: उच्च-ऊर्जा घनत्व

CL-20 (hexanitrohexaazaisowurtzitane), HMX (cyclotetramethylene-tetranitramine) और LLM-105 — तीनों उच्च-ऊर्जा घनत्व विस्फोटक हैं, जो TNT जैसे परंपरागत विस्फोटकों की तुलना में प्रति इकाई आयतन कहीं अधिक ऊर्जा मुक्त करते हैं। इनकी आणविक संरचनाओं में सघन नाइट्रोजन-समृद्ध पिंजरे अथवा वलय होते हैं, जो श्रेष्ठ विस्फोट वेग और दाब सुनिश्चित करते हैं, किंतु इन्हें संभालना स्वाभाविक रूप से संवेदनशील कार्य है।

2. सैन्य एवं द्वि-उपयोगी अनुप्रयोग

इन यौगिकों का उपयोग उन्नत वारहेड, आकार-प्रभारित विस्फोटकों और ठोस रॉकेट प्रणोदकों में होता है, जहाँ सघन एवं शक्तिशाली ऊर्जा-विमोचन अनिवार्य है। HMX मिसाइल प्रणोदकों और परमाणु हथियार के इम्प्लोजन लेंस में स्थापित घटक है। CL-20 ऊर्जा उत्पादन में HMX से आगे है, जो इसे अगली पीढ़ी के गोला-बारूद के लिए उपयुक्त बनाता है, जबकि LLM-105 अपेक्षाकृत असंवेदनशील विकल्प प्रदान करता है।

3. असंवेदनशील युद्ध-सामग्री एवं सुरक्षा शासन

HEDMs से जुड़ी प्रमुख नीतिगत चिंता प्रदर्शन और संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाना है — भंडारण या परिवहन के दौरान आकस्मिक विस्फोट विनाशकारी हो सकता है। LLM-105 को विशेष रूप से असंवेदनशील उच्च-विस्फोटक के रूप में विकसित किया गया, जो अंतर्राष्ट्रीय insensitive munitions मानकों के अनुरूप है। रक्षा-खरीद नीतियाँ अब ऊर्जा प्रदर्शन के साथ-साथ असंवेदनशीलता मानदंड भी अनिवार्य करती हैं।

4. अप्रसार एवं निर्यात नियंत्रण

इन सामग्रियों के हथियारीकरण की संभावना के कारण ये कठोर निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं के अंतर्गत आती हैं। Wassenaar Arrangement में भाग लेने वाले देश ऐसी ऊर्जावान सामग्रियों और उनके अग्रदूत रसायनों के हस्तांतरण को विनियमित करते हैं, जिससे नागरिक अनुसंधान सहयोग और वाणिज्यिक आपूर्ति श्रृंखलाएँ जटिल हो जाती हैं।

निष्कर्ष

भारत जैसे-जैसे रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है, HEDMs के स्वदेशी विकास के साथ-साथ सुदृढ़ सुरक्षा प्रोटोकॉल, विनियामक ढाँचे और अंतर्राष्ट्रीय अप्रसार प्रतिबद्धताएँ भी अनिवार्य हैं — ताकि रणनीतिक क्षमता शासन-सामर्थ्य से आगे न निकल जाए।

शब्द गणना: 302

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