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Science & Technology / Space Missions — UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

Environment · UPSC CSE
प्रश्न: भारत का Aditya-L1 सौर मिशन — उद्देश्य, पेलोड और वैज्ञानिक महत्त्व

प्रस्तावना

ISRO द्वारा प्रक्षेपित भारत की प्रथम समर्पित सौर वेधशाला Aditya-L1, स्वदेशी अंतरिक्ष विज्ञान क्षमता में एक महत्त्वपूर्ण प्रगति है, जो एक रणनीतिक कक्षीय स्थिति से सौर गतिकी के निरंतर अध्ययन को संभव बनाती है।

मुख्य बिंदु

1. L1 पर रणनीतिक स्थिति

Aditya-L1 को सूर्य-पृथ्वी Lagrange Point 1 के चारों ओर एक halo orbit में स्थापित किया गया है, जो पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर है। यह स्थिति बिना किसी अवरोध या ग्रहण के निरंतर सौर अवलोकन की सुविधा देती है, जो अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान और पूर्व चेतावनी प्रणालियों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

2. विविध पेलोड संरचना

अंतरिक्षयान में सात विशिष्ट पेलोड हैं, किंतु सभी केवल सौर corona के अध्ययन के लिए नहीं हैं। ये पेलोड सामूहिक रूप से विद्युत-चुंबकीय एवं कण संसूचकों द्वारा photosphere, chromosphere और corona का अध्ययन करते हैं, जिससे solar wind, flares और coronal mass ejections की बहुस्तरीय समझ विकसित होती है।

3. VELC — प्राथमिक उपकरण

Visible Emission Line Coronagraph (VELC) सबसे प्रमुख एवं वृहत्तम पेलोड है, जिसे Indian Institute of Astrophysics द्वारा विकसित किया गया है। यह सौर corona का चित्रण करता है तथा उसके तापमान, वेग और घनत्व को मापता है, जिससे coronal heating की दीर्घकालीन खगोलभौतिकीय समस्या के समाधान में सहायता मिलती है।

4. शासन एवं रणनीतिक महत्त्व

अंतरिक्ष मौसम की घटनाएँ उपग्रह संचार, विद्युत ग्रिड और नौवहन प्रणालियों को बाधित कर सकती हैं। Aditya-L1 से प्राप्त आँकड़े भारत की समय पर अंतरिक्ष मौसम सलाह जारी करने की क्षमता को सुदृढ़ करते हैं, जिससे राष्ट्रीय अवसंरचना की सुरक्षा और रणनीतिक अंतरिक्ष क्षमताओं में आत्मनिर्भरता के व्यापक लक्ष्य पूरे होते हैं।

निष्कर्ष

Aditya-L1 सौर अनुसंधान में भारत की वैज्ञानिक स्वायत्तता को आगे बढ़ाता है और अंतरिक्ष मौसम निगरानी के माध्यम से ठोस शासन लाभ प्रदान करता है। आँकड़ों के उपयोग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में निरंतर निवेश ही इस मिशन के दीर्घकालिक नीतिगत प्रभाव को निर्धारित करेगा।

शब्द गणना: 283

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