विमानन क्षेत्र वैश्विक CO₂ उत्सर्जन में लगभग 2–3% का योगदान करता है। Sustainable Aviation Fuel (SAF) पारंपरिक जेट ईंधन की तुलना में जीवनचक्र उत्सर्जन को 80% तक घटाने में सक्षम है और निकट भविष्य में विकार्बनीकरण का सर्वाधिक व्यवहार्य विकल्प है।
SAF का उत्पादन अत्यंत विविध फीडस्टॉक से किया जा सकता है — कृषि अवशेष (फसल पराली, बगास), मक्का जैसी ऊर्जा फसलें, नगरपालिका ठोस अपशिष्ट, अपशिष्ट जल उपचार कीचड़ (sludge) तथा लकड़ी मिल अपशिष्ट सहित काष्ठ जैवमास। यह फीडस्टॉक लचीलापन देशों को स्थानीय अपशिष्ट धाराओं का उपयोग कर विमानन ईंधन आयात-निर्भरता घटाने में सक्षम बनाता है।
ASTM-प्रमाणित स्थापित मार्गों में Hydroprocessed Esters and Fatty Acids (HEFA), Alcohol-to-Jet (AtJ), Fischer-Tropsch संश्लेषण और Power-to-Liquid सम्मिलित हैं। AtJ मक्का और कृषि अवशेषों के लिए उपयुक्त है, जबकि गैसीकरण-आधारित Fischer-Tropsch काष्ठ जैवमास और sludge के लिए प्रभावी है। मार्ग-प्रमाणन SAF की सुरक्षा एवं सम्मिश्रण मानकों की अनुपालना सुनिश्चित करता है।
भारत की National Biofuel Policy और व्यापक ऊर्जा संक्रमण एजेंडे में SAF को प्राथमिकता क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है। धान की पराली — जिसे अन्यथा जलाने से गंभीर वायु प्रदूषण होता है — का उपयोग SAF फीडस्टॉक के रूप में करने से पराली दहन में कमी और ईंधन आपूर्ति, दोनों लाभ एक साथ प्राप्त होते हैं। नगरीय अपशिष्ट जल उपचार संयंत्रों का sludge भी एक अप्रयुक्त संसाधन है।
SAF की लागत पारंपरिक जेट ईंधन से तीन से पाँच गुना अधिक है, जो व्यावसायिक अपनाने को सीमित करती है। फीडस्टॉक एकत्रीकरण, आपूर्ति-श्रृंखला रसद और रूपांतरण सुविधाओं की पूँजी-सघनता प्रमुख बाधाएँ हैं। लागत अंतर को पाटने के लिए सम्मिश्रण अधिदेश, Viability Gap Funding और कार्बन मूल्य-निर्धारण तंत्र आवश्यक नीतिगत उपकरण हैं।
कृषि अवशेष, मक्का, अपशिष्ट जल sludge और लकड़ी मिल अपशिष्ट — चारों SAF फीडस्टॉक के रूप में अर्हता रखते हैं। इस फीडस्टॉक प्रचुरता को वाणिज्यिक उत्पादन में परिवर्तित करने हेतु समन्वित नीति, निवेश प्रोत्साहन और सुदृढ़ प्रमाणन ढाँचे अपरिहार्य हैं।
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