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Sustainable Development — UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

Environment · UPSC CSE
प्रश्न: भारत में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन हेतु Extended Producer Responsibility (EPR) ढाँचा — अभिकल्पना, कार्यान्वयन एवं शासन संबंधी चुनौतियाँ

प्रस्तावना

Plastic Waste Management Rules के अंतर्गत भारत का EPR ढाँचा प्लास्टिक प्रदूषण की जिम्मेदारी को नगर निकायों से हटाकर उन बाजार-अभिकर्ताओं पर स्थानांतरित करता है, जो प्लास्टिक पैकेजिंग से आर्थिक लाभ अर्जित करते हैं।

मुख्य बिंदु

1. EPR का मूल अधिदेश

उत्पादकों, आयातकों एवं ब्रांड स्वामियों (PIBOs) पर यह विधिक दायित्व है कि वे बाजार में प्रवेश कराई गई प्लास्टिक पैकेजिंग के समतुल्य एक निर्धारित मात्रा को संग्रहीत कर पुनर्चक्रण या पुनः उपयोग हेतु प्रेषित करें। यह दायित्व क्रमिक है तथा वार्षिक लक्ष्यों के माध्यम से एक निर्धारित समयसीमा में चरणबद्ध रूप से बढ़ता है।

2. अनुपालन तंत्र में लचीलापन

PIBOs को स्वयं की संग्रह अवसंरचना स्थापित करना अनिवार्य नहीं है। वे Producer Responsibility Organisations (PROs), buy-back व्यवस्थाओं अथवा पंजीकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं के माध्यम से अपना दायित्व पूर्ण कर सकते हैं। यह लचीलापन उन लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है, जिनके पास समर्पित लॉजिस्टिक्स नेटवर्क हेतु पर्याप्त पूँजी नहीं है।

3. EPR प्रमाणपत्र व्यापार

भारत का ढाँचा एक बाजार-आधारित साधन प्रस्तुत करता है — पुनर्चक्रणकर्ताओं को जारी EPR प्रमाणपत्रों का Central Pollution Control Board द्वारा प्रबंधित केंद्रीकृत पोर्टल पर व्यापार किया जा सकता है। अधिक अनुपालन करने वाले PIBOs अपने अतिरिक्त प्रमाणपत्र उन्हें बेच सकते हैं जो लक्ष्य से पीछे हैं, जिससे पुनर्चक्रण क्षमता में निवेश को प्रोत्साहन मिलता है।

4. Single-Use Plastic प्रतिबंधों के साथ अंतःक्रिया

2022 की single-use plastic अधिसूचना के अंतर्गत प्रतिबंधित वस्तुएँ EPR से मुक्त नहीं हैं। प्रतिबंध आपूर्ति-पक्ष पर कार्य करता है, जबकि EPR पहले से प्रचलन में मौजूद अवशिष्ट प्लास्टिक को संबोधित करता है। इन्हें परस्पर अनन्य मानने से प्रवर्तन में रिक्तियाँ उत्पन्न होंगी और अपशिष्ट प्रबंधन शृंखला कमजोर पड़ेगी।

5. शासन एवं कार्यान्वयन संबंधी अंतराल

संग्रह डेटा का सत्यापन, कपटपूर्ण प्रमाणपत्र निर्माण की रोकथाम तथा अनौपचारिक कचरा-संग्राहक वर्ग को औपचारिक EPR पारिस्थितिकी तंत्र में समेकित करना प्रमुख चुनौतियाँ हैं। सुदृढ़ तृतीय-पक्ष लेखापरीक्षण एवं शिकायत तंत्र के अभाव में EPR केवल कागजी अनुपालन बनकर रह जाने का जोखिम है।

निष्कर्ष

EPR की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि एक विनियामक अधिदेश को अपशिष्ट पुनर्प्राप्ति के कार्यात्मक बाजार में परिवर्तित किया जा सके। अनुरेखणीयता को सुदृढ़ करना, अनौपचारिक क्षेत्र को औपचारिक बनाना तथा प्रमाणपत्र की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना यह तय करेगा कि भारत का ढाँचा वास्तविक पर्यावरणीय परिणाम देता है या केवल प्रशासनिक अनुपालन।

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