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Wastewater Treatment — UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

Environment · UPSC CSE
प्रश्न: द्वितीयक अपशिष्ट जल उपचार में सक्रिय आपंक प्रक्रिया — तंत्र, महत्त्व एवं शासन संबंधी चुनौतियाँ

प्रस्तावना

सक्रिय आपंक प्रक्रिया के माध्यम से द्वितीयक अपशिष्ट जल उपचार एक महत्त्वपूर्ण जैविक हस्तक्षेप है, जो जल निकायों में प्रवाहित होने वाले बहिःस्राव की गुणवत्ता निर्धारित करता है और सार्वजनिक स्वास्थ्य तथा जलीय पारिस्थितिकी को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है।

मुख्य बिंदु

1. मूल जैविक तंत्र

सक्रिय आपंक प्रक्रिया वायवीय सूक्ष्मजीव समुदायों — मुख्यतः विषमपोषी जीवाणुओं — पर निर्भर करती है, जो ऑक्सीकरण द्वारा घुलित कार्बनिक पदार्थों का चयापचय करते हैं। सूक्ष्मजीव कार्बनिक यौगिकों को कार्बन एवं ऊर्जा स्रोत के रूप में आत्मसात कर उन्हें जैवभार, कार्बन डाइऑक्साइड और जल में परिवर्तित करते हैं। यह जैविक ऑक्सीकरण ही द्वितीयक उपचार में Biochemical Oxygen Demand (BOD) न्यूनीकरण का प्राथमिक तंत्र है।

2. प्रक्रिया अभिकल्पना एवं प्रचालन मापदंड

कार्बनिक पदार्थ के प्रभावी निष्कासन हेतु वातन टंकियों में पर्याप्त घुलित ऑक्सीजन स्तर, आपंक प्रतिधारण समय तथा भोजन-से-सूक्ष्मजीव अनुपात का उचित रखरखाव आवश्यक है। आपंक पुनःसंचरण से सूक्ष्मजीव जनसंख्या निरंतर बनी रहती है, जबकि स्पष्टीकारक उपचारित बहिःस्राव को अवसादित जैवभार से पृथक करते हैं। इन मापदंडों में विचलन उपचार दक्षता एवं बहिःस्राव गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करता है।

3. विनियामक एवं शासन ढाँचा

भारत का Central Pollution Control Board अंतर्देशीय सतही जल में प्रवाह से पूर्व द्वितीयक उपचार द्वारा पूरे किए जाने वाले बहिःस्राव मानक निर्धारित करता है। National Mission for Clean Ganga तथा AMRUT के अंतर्गत शहरी स्थानीय निकायों के अधिदेशों ने मलजल उपचार संयंत्र क्षमता में वृद्धि की है, तथापि उत्पन्न एवं उपचारित मलजल के मध्य व्यापक अंतर एक गंभीर शासन चुनौती बनी हुई है।

4. सीमाएँ एवं उभरती चिंताएँ

सक्रिय आपंक प्रक्रिया नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्त्वों को प्रभावी ढंग से नहीं हटाती, और न ही शहरी अपशिष्ट जल में बढ़ते सूक्ष्म प्रदूषकों तथा फार्मास्यूटिकल अवशेषों का समाधान करती है। अतिरिक्त आपंक का निपटान स्वयं एक पर्यावरणीय दायित्व बन जाता है, जिसके लिए उपचार उन्नयन के साथ-साथ एकीकृत आपंक प्रबंधन नीतियाँ अनिवार्य हैं।

निष्कर्ष

उपचार क्षमता एवं वास्तविक मलजल भार के मध्य अंतर को पाटने के लिए सक्रिय आपंक अवसंरचना में तकनीकी निवेश के साथ-साथ सुदृढ़ नगरीय शासन, प्रचालक प्रशिक्षण तथा प्रवर्तनीय बहिःस्राव मानकों की आवश्यकता है, ताकि भारत के स्वच्छ जल संसाधनों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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