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Weather Modification / Cloud Seeding — UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

Environment · UPSC CSE
प्रश्न: बड़े पैमाने पर क्लाउड सीडिंग संचालन की पर्यावरणीय चिंताएँ और शासन संबंधी चुनौतियाँ

प्रस्तावना

क्लाउड सीडिंग का उपयोग सूखा-शमन और ओलावृष्टि-नियंत्रण के लिए बढ़ता जा रहा है। यह तकनीक लक्षित वर्षा क्षेत्र से परे भी गंभीर पर्यावरणीय प्रश्न उठाती है, जिसके लिए कठोर वैज्ञानिक परीक्षण और विनियामक निगरानी अनिवार्य है।

मुख्य बिंदु

1. सीमापारीय वर्षा-वितरण में व्यवधान

बड़े पैमाने पर क्लाउड सीडिंग लक्षित क्षेत्र में वर्षा बढ़ाते हुए अनुप्रवाही क्षेत्रों में उपलब्ध आर्द्रता को घटा देती है, जिससे एक साझा वायुमंडलीय संसाधन का पुनर्वितरण होता है। इससे अंतर-राज्यीय एवं अंतर्राष्ट्रीय विवादों की संभावना उत्पन्न होती है। World Meteorological Organization ने ऐसे हस्तक्षेपों को नियंत्रित करने वाले बाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय प्रोटोकॉल की अनुपस्थिति को रेखांकित किया है।

2. पारिस्थितिक तंत्र में Silver Iodide का संचय

Silver iodide, जो सर्वाधिक प्रयुक्त सीडिंग कारक है, उच्च सांद्रता पर जलीय सूक्ष्मजीवों के लिए विषाक्त होता है। जलग्रहण क्षेत्रों पर बार-बार संचालन से मृदा, तलछट और जल-निकायों में जैव-संचयन का जोखिम बढ़ता है, जो पोषक-चक्रण को बाधित कर सकता है। दीर्घकालिक सीडिंग कार्यक्रमों वाले क्षेत्रों के क्षेत्र-अध्ययनों में अनुप्रवाही जलग्रहण क्षेत्रों में मापनीय Silver सांद्रता पाई गई है।

3. समतापमंडलीय ओज़ोन — एक भ्रामक चिंता

क्लाउड सीडिंग कारक क्षोभमंडल में फैलाए जाते हैं, जो ओज़ोन क्षरण वाले समतापमंडल से काफी नीचे है। पारंपरिक सीडिंग रसायनों को ओज़ोन क्षति से जोड़ना वैज्ञानिक आधार से रहित है। यह चिंता क्लाउड सीडिंग को stratospheric aerosol injection के साथ भ्रमित करती है, जो एक पृथक एवं प्रायोगिक भू-अभियांत्रिकी उपागम है।

4. शासन और विनियामक रिक्तताएँ

भारत में मौसम-परिवर्तन गतिविधियों के लिए कोई समर्पित वैधानिक ढाँचा नहीं है, जिससे पर्यावरण प्रभाव आकलन काफी हद तक विवेकाधीन बना हुआ है। संचालन-पूर्व अनिवार्य मॉडलिंग, संचालन-पश्चात निगरानी और सीमापारीय अधिसूचना प्रोटोकॉल सहित एक केंद्रीकृत विनियामक निकाय की स्थापना, संचालन विस्तार से पहले अपरिहार्य है।

निष्कर्ष

प्रथम और द्वितीय चिंताएँ वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित जोखिम हैं जो सतर्कता-आधारित विनियमन की माँग करती हैं; तृतीय चिंता भिन्न प्रौद्योगिकियों को आपस में मिलाती है। प्रभावी शासन के लिए साक्ष्य-आधारित जोखिमों को भ्रांतियों से पृथक करना आवश्यक है, ताकि मौसम-परिवर्तन का उत्तरदायी एवं न्यायसंगत उपयोग सुनिश्चित हो सके।

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