वर्षाधीन कृषि भारत के शुद्ध बोए गए क्षेत्र के लगभग 55% भाग को आच्छादित करती है तथा अधिकांश लघु कृषकों की आजीविका का आधार है, जिससे इसका सतत विकास खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण आजीविका एवं जलवायु अनुकूलनशीलता के लिए अनिवार्य हो जाता है।
RAD एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) को प्रोत्साहित करता है, जिसमें एक ही भूखंड पर फसल, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं कृषि-वानिकी का समन्वय किया जाता है। यह विविधीकरण एकल वस्तु पर निर्भरता घटाता है, घरेलू आय को स्थिर करता है तथा अनियमित मानसून के प्रतिकूल प्रभावों से कृषकों को सुरक्षा प्रदान करता है।
RAD की एक प्रमुख विशेषता मृदा नमी संरक्षण, जलागम प्रबंधन एवं सूखा-सहिष्णु फसल किस्मों को अपनाने के माध्यम से जलवायु जोखिमों को न्यूनतम करना है। स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप कृषि पद्धतियाँ अपनाने से वर्षाधीन क्षेत्रों में सूखे एवं अकाल वर्षा के प्रति संवेदनशीलता में उल्लेखनीय कमी आती है।
RAD वर्षाधीन जिलों में उत्पादकता अंतराल को दूर करने हेतु उन्नत बीज किस्मों, संतुलित पोषक तत्त्व प्रबंधन एवं जल-संचयन संरचनाओं को बढ़ावा देता है। इसका अधिदेश विशेष रूप से वर्षाधीन क्षेत्रों तक सीमित है; सिंचित क्षेत्रों में धान की खेती का विस्तार इसके कार्यक्षेत्र से बाहर है।
RAD, NMSA के एक उप-मिशन के रूप में कार्य करता है, जिससे मृदा स्वास्थ्य, सूक्ष्म सिंचाई एवं फसल विविधीकरण से संबंधित योजनाओं के साथ अभिसरण संभव होता है। यह संस्थागत संरचना सुनिश्चित करती है कि हस्तक्षेप स्थान-विशिष्ट, सहभागी एवं व्यापक सतत कृषि लक्ष्यों के अनुरूप हों।
RAD के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु विकेंद्रीकृत नियोजन, सुदृढ़ कृषि विस्तार सेवाएँ एवं कृषक-केंद्रित प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अपरिहार्य हैं। वर्षाधीन जिलों में Integrated Farming Systems का विस्तार न्यायसंगत एवं जलवायु-अनुकूल कृषि विकास की सर्वाधिक व्यावहारिक दिशा है।
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