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Banking / Payment Systems — UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

Economy · UPSC CSE
प्रश्न: RTGS और NEFT भुगतान प्रणालियाँ — विशेषताएँ, अंतर और भारत की डिजिटल भुगतान संरचना में उनकी भूमिका

प्रस्तावना

Real-Time Gross Settlement (RTGS) और National Electronic Funds Transfer (NEFT), भारतीय रिज़र्व बैंक की प्रमुख अंतर-बैंक भुगतान प्रणालियाँ हैं, जो भारत की औपचारिक वित्तीय लेन-देन संरचना की आधारशिला हैं।

मुख्य बिंदु

1. निपटान तंत्र

RTGS प्रत्येक लेन-देन को व्यक्तिगत एवं तात्कालिक आधार पर सकल रूप में निपटाता है, जो इसे उच्च-मूल्य एवं समय-संवेदनशील अंतरणों के लिए उपयुक्त बनाता है। इसके विपरीत, NEFT विलंबित निवल निपटान पद्धति पर कार्य करता है और दिन भर में निर्धारित अंतरालों पर बैच-प्रक्रिया द्वारा लेन-देन संपन्न करता है। यह मूलभूत अंतर दोनों प्रणालियों की उपयोगिता निर्धारित करता है।

2. न्यूनतम लेन-देन सीमा

RTGS उच्च-मूल्य लेन-देन के लिए अभिकल्पित है और इसमें एक निर्धारित न्यूनतम अंतरण राशि अनिवार्य है, जबकि NEFT में ऐसी कोई न्यूनतम सीमा नहीं है, जिससे यह खुदरा एवं लघु-मूल्य अंतरणों के लिए सुलभ है। यह स्तरीय अभिकल्प सुनिश्चित करता है कि RTGS की उच्च-क्षमता संरचना पर अनावश्यक लघु-मूल्य लेन-देन का भार न पड़े।

3. शुल्क एवं ग्राहक संरक्षण

RBI ने अधिदेशित किया है कि RTGS और NEFT दोनों के अंतर्गत आवक लेन-देन — अर्थात प्राप्त राशि — पर लाभार्थी से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। शुल्क, जहाँ लागू हो, केवल प्रेषक ग्राहक पर आरोपित किया जाता है। इससे प्राप्तकर्ताओं का संरक्षण होता है और विभिन्न आय वर्गों में इन प्रणालियों को अपनाने की प्रवृत्ति बढ़ती है।

4. परिचालन समय एवं उपलब्धता

RBI की नीतिगत निर्देशों के अनुसरण में RTGS और NEFT दोनों अब 24x7x365 आधार पर परिचालित होते हैं, जिससे बैंकिंग घंटों या अवकाश से जुड़ी पूर्ववर्ती बाधाएँ समाप्त हो गई हैं। यह निरंतर उपलब्धता व्यवसायों एवं व्यक्तियों दोनों के तरलता प्रबंधन को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ करती है।

5. नीतिगत महत्त्व

RTGS और NEFT मिलकर RBI की न्यून-नकदी अर्थव्यवस्था की परिकल्पना को आधार प्रदान करते हैं, क्योंकि ये सुरक्षित, लेखापरीक्षणीय एवं दक्ष निधि अंतरण माध्यम उपलब्ध कराते हैं। Core Banking Systems के साथ इनके एकीकरण से निपटान जोखिम में कमी आई है और वित्तीय प्रणाली में मौद्रिक संचरण सुधरा है।

निष्कर्ष

UPI एवं उभरती वास्तविक-समय प्रणालियों के साथ भारत का भुगतान परितंत्र विकसित हो रहा है, तथापि RTGS और NEFT उच्च-मूल्य एवं संरचित अंतरणों के लिए अपरिहार्य बने हुए हैं। दक्षता, सुरक्षा और वित्तीय समावेशन के मध्य संतुलन बनाए रखने हेतु इनका सतत नियामकीय अनुकूलन आवश्यक है।

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