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Banking and RBI — UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

Economy · UPSC CSE
प्रश्न: नकद आरक्षित अनुपात (CRR) एक मौद्रिक नीति उपकरण के रूप में — तंत्र, उधार योग्य संसाधनों पर प्रभाव और समष्टि आर्थिक महत्त्व

प्रस्तावना

नकद आरक्षित अनुपात (CRR) भारतीय रिज़र्व बैंक का एक प्राथमिक मौद्रिक नीति उपकरण है, जिसके माध्यम से वाणिज्यिक बैंकों के पास ऋण वितरण हेतु उपलब्ध निधि की मात्रा को प्रत्यक्ष रूप से नियंत्रित करते हुए तरलता एवं मुद्रास्फीति दोनों को एक साथ प्रभावित किया जाता है।

मुख्य बिंदु

1. CRR की कार्यप्रणाली और उधार योग्य संसाधन

CRR के अंतर्गत बैंकों को अपनी शुद्ध माँग एवं सावधि देनदारियों (Net Demand and Time Liabilities — NDTL) का एक निर्धारित प्रतिशत RBI के पास नकद आरक्षित के रूप में रखना अनिवार्य होता है, जिस पर कोई ब्याज प्राप्त नहीं होता। ₹8,000 करोड़ की जमा राशि पर CRR में 4% से 5% की 100 आधार अंक वृद्धि से अनिवार्य आरक्षित ₹320 करोड़ से बढ़कर ₹400 करोड़ हो जाता है, अर्थात ₹80 करोड़ की उधार योग्य निधि प्रत्यक्षतः कम हो जाती है।

2. ऋण आपूर्ति पर संचरण प्रभाव

यह कटौती केवल अंकगणितीय नहीं है; मुद्रा गुणक प्रभाव (Money Multiplier Effect) के कारण प्रत्येक अवरुद्ध रुपया ऋण-सृजन के अनेक चक्रों को बाधित करता है। इस प्रकार व्यापक मुद्रा आपूर्ति में वास्तविक संकुचन ₹80 करोड़ के अंकित आँकड़े से कहीं अधिक होता है, जिससे संपूर्ण बैंकिंग तंत्र में तरलता की स्थिति कठोर हो जाती है।

3. नीतिगत संदर्भ और मुद्रास्फीति प्रबंधन

RBI सामान्यतः अतिरिक्त तरलता या मुद्रास्फीतिक दबाव की स्थितियों में CRR वृद्धि करता है, क्योंकि यह एक तत्काल एवं बाज़ार-विकृति-रहित अवशोषण तंत्र प्रदान करता है। खुले बाज़ार परिचालन (Open Market Operations) के विपरीत, CRR वृद्धि सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों पर एकसमान रूप से लागू होती है, जिससे चयनात्मक विकृतियों के बिना प्रणालीगत प्रभाव सुनिश्चित होता है।

4. सीमाएँ और नीतिगत द्वंद्व

बार-बार CRR समायोजन से बैंकों पर वित्तीय भार पड़ता है, क्योंकि अवरुद्ध निधि पर कोई प्रतिफल नहीं मिलता, जिससे शुद्ध ब्याज मार्जिन संकुचित होता है और जमा संग्रहण हतोत्साहित हो सकता है। उत्पादक क्षेत्रों के लिए ऋण उपलब्धता एवं मुद्रास्फीति नियंत्रण के मध्य संतुलन बनाए रखना केंद्रीय शासन-चुनौती बनी रहती है।

निष्कर्ष

CRR वृद्धि एक सटीक किंतु व्यापक प्रभाव वाला उपकरण है — यह ₹8,000 करोड़ की जमा राशि पर प्रति 100 आधार अंक ₹80 करोड़ की निधि विश्वसनीय रूप से अवशोषित करता है, परंतु ऋण एवं संवृद्धि पर इसके क्रमिक प्रभावों को देखते हुए मौद्रिक प्राधिकरण द्वारा इसका सुविचारित एवं दूरदर्शी उपयोग अपेक्षित है।

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