भारत के वित्तीय क्षेत्र का रूपांतरण मुख्यतः विशेषज्ञ समितियों द्वारा निर्देशित रहा है, जिनकी अनुशंसाएँ बीमा विनियमन से लेकर डेरिवेटिव बाज़ार तक संस्थागत ढाँचे में परिणत हुईं — यह सुधार के प्रति राज्य के सुविचारित दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है।
Malhotra समिति ने बीमा क्षेत्र में निजी एवं विदेशी भागीदारी तथा एक स्वतंत्र नियामक की स्थापना की अनुशंसा की। इसकी सिफारिशों के प्रत्यक्ष परिणामस्वरूप Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) का गठन हुआ और सार्वजनिक क्षेत्र का एकाधिकार समाप्त हुआ। यह समिति के अधिदेश एवं संस्थागत परिणाम का सटीक मिलान है।
L.C. Gupta समिति का गठन SEBI द्वारा भारतीय पूँजी बाज़ारों में डेरिवेटिव कारोबार हेतु रूपरेखा विकसित करने के लिए किया गया था। इसने एक्सचेंज-ट्रेडेड फ्यूचर्स एवं ऑप्शंस की नींव रखी, जिससे मूल्य-निर्धारण और जोखिम प्रबंधन सुदृढ़ हुआ। समिति, अधिदेश और मूल संस्था का यह युग्म तथ्यतः सही है।
Urjit R. Patel समिति का गठन RBI द्वारा मौद्रिक नीति की संशोधित रूपरेखा अनुशंसित करने हेतु किया गया था, जिसमें विशेष रूप से मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण और Monetary Policy Committee की स्थापना की सिफारिश की गई। इसका आवास क्षेत्र ऋण सुधारों से कोई संबंध नहीं था, अतः वह पंक्ति तथ्यतः असंगत है।
RBI द्वारा गठित Malegam समिति ने अत्यधिक ऋणग्रस्तता एवं दबावपूर्ण वसूली प्रथाओं की चिंताओं के परिप्रेक्ष्य में सूक्ष्म वित्त क्षेत्र की समीक्षा की। इसकी अनुशंसाओं ने NBFC-MFIs के लिए नियामकीय ढाँचे को आकार दिया, जो समिति को RBI एवं सूक्ष्म वित्त सुधार से सही रूप में जोड़ता है।
विशेषज्ञ समितियाँ चिह्नित क्षेत्रीय रिक्तताओं और संस्थागत अनुक्रियाओं के मध्य नीतिगत सेतु का कार्य करती हैं। उनके अधिदेशों का सटीक आरोपण उन प्रशासकों के लिए अनिवार्य है जिन्हें इन निकायों द्वारा स्थापित नियामकीय ढाँचों को क्रियान्वित, मूल्यांकित एवं विकसित करना होता है।
GS Answer Coach आपके उत्तर को Introduction, Body, Conclusion के आधार पर परखता है — 30 सेकंड में।
Essay Coach · GS Answer Coach · Cutoff Planner · 500+ Mains PYQs — साइन अप मुफ्त।