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Critical Minerals / MMDR Act — UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

Economy · UPSC CSE
प्रश्न: भारत में क्रिटिकल मिनरल्स का शासन — नीति ढाँचा, संसाधन सुरक्षा और MMDR अधिनियम के अंतर्गत विधायी सुधार

प्रस्तावना

लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट और दुर्लभ मृदा तत्व (Rare Earth Elements) स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण एवं रक्षा विनिर्माण की आधारशिला हैं, जिससे इनकी सुरक्षित आपूर्ति भारत के आर्थिक और भू-राजनीतिक हितों के लिए एक रणनीतिक अनिवार्यता बन जाती है।

मुख्य बिंदु

1. Minerals Security Partnership (MSP) में भारत की भागीदारी

भारत 2023 में US-नेतृत्व वाली Minerals Security Partnership में सम्मिलित हुआ, जो विश्वसनीय वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकरण की उसकी मंशा को इंगित करता है। MSP की सदस्यता निवेश समन्वय, तकनीकी सहयोग और एकल-स्रोत निर्भरता से विविधीकरण को सुगम बनाती है, विशेषतः उन खनिजों के प्रसंस्करण में जहाँ चीन का वर्चस्व है।

2. भारत की घरेलू संसाधन स्थिति

भारत ने रणनीतिक क्षेत्रों के लिए 30 क्रिटिकल मिनरल्स चिह्नित किए हैं, किंतु वह सभी में आत्मनिर्भर नहीं है। अभ्रक और लौह अयस्क जैसे खनिजों में पर्याप्त भंडार होने के बावजूद, लिथियम, कोबाल्ट और निकेल के लिए भारत भारी आयात-निर्भरता में है। यह असंतुलन घरेलू अन्वेषण और अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी — दोनों की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

3. MMDR संशोधन 2023 — केंद्र सरकार की विशेष नीलामी शक्तियाँ

Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Act, 2023 ने केंद्र सरकार को निर्दिष्ट क्रिटिकल मिनरल्स के लिए खनन पट्टों और समग्र लाइसेंसों की नीलामी का विशेष अधिकार प्रदान किया, जो पूर्ववर्ती राज्य-केंद्रित ढाँचे को अधिक्रमित करता है। यह केंद्रीकरण अन्वेषण में तेजी, बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षण और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण खनिजों पर रणनीतिक निगरानी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है।

4. कार्यान्वयन की चुनौतियाँ

विधायी सुधार को परिचालन परिणामों में रूपांतरित करने के लिए भूमि अधिग्रहण की जटिलताओं, पर्यावरणीय मंजूरी की समय-सीमाओं और Geological Survey of India में क्षमता की कमियों को दूर करना आवश्यक है। डाउनस्ट्रीम प्रसंस्करण अवसंरचना को सुदृढ़ किए बिना, केवल कच्चे खनिज निष्कर्षण से मूल्य-संवर्धित खंडों में आयात-निर्भरता कम नहीं होगी।

निष्कर्ष

भारत की क्रिटिकल मिनरल्स रणनीति — MSP सदस्यता, विधायी केंद्रीकरण और घरेलू अन्वेषण का संयोजन — दिशात्मक रूप से सुदृढ़ है, परंतु प्रसंस्करण क्षमता और भूवैज्ञानिक मानचित्रण में निरंतर निवेश ही यह निर्धारित करेगा कि नीतिगत अभिप्राय वास्तविक आपूर्ति सुरक्षा में परिणत होता है या नहीं।

शब्द गणना: 309

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