आर्थिक गतिविधियों का सटीक क्षेत्रीय वर्गीकरण राष्ट्रीय लेखांकन, नीति-निर्धारण एवं संसाधन आवंटन का आधार है। गलत वर्गीकरण से GDP मापन विकृत होता है और कल्याणकारी हस्तक्षेप भटक जाते हैं।
प्राथमिक क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों का प्रत्यक्ष दोहन करने वाली गतिविधियाँ आती हैं — कृषि, मत्स्यपालन, खनन एवं पशुपालन। द्वितीयक क्षेत्र कच्चे माल को विनिर्माण एवं निर्माण प्रक्रिया द्वारा तैयार वस्तुओं में परिवर्तित करता है। तृतीयक क्षेत्र व्यापार, परिवहन, बैंकिंग एवं भंडारण जैसी सेवाएँ प्रदान करता है।
डेयरी फार्मिंग में पशुओं से उत्पाद प्राप्त किए जाते हैं, अतः यह निर्विवाद रूप से प्राथमिक क्षेत्र में आती है। कपड़ा बुनाई कच्चे रेशे को विनिर्माण प्रक्रिया द्वारा वस्त्र में बदलती है, इसलिए यह द्वितीयक क्षेत्र में आती है। प्रश्न में ये दोनों युग्म सही सुमेलित हैं।
कृषि उत्पादों का भंडारण एक सेवा गतिविधि है जो प्राथमिक क्षेत्र को सहयोग देती है, अतः यह तृतीयक क्षेत्र में आती है, न कि द्वितीयक में। खनिज अन्वेषण में प्राकृतिक संसाधनों का सर्वेक्षण एवं पूर्वेक्षण होता है, इसलिए यह प्राथमिक क्षेत्र की गतिविधि है, तृतीयक की नहीं। प्रश्न में ये दोनों युग्म गलत सुमेलित हैं।
सही क्षेत्रीय मानचित्रण कृषि भंडारण सहायता एवं खनन विनियमन जैसी योजनाओं को दिशा देता है। गलत वर्गीकरण से अनुचित राजकोषीय प्रोत्साहन, विकृत रोजगार आँकड़े और राष्ट्रीय विकास कार्यक्रमों के अंतर्गत input-output नियोजन में दोष उत्पन्न हो सकते हैं।
चार युग्मों में से केवल दो — डेयरी फार्मिंग (प्राथमिक) एवं कपड़ा बुनाई (द्वितीयक) — सही सुमेलित हैं। सटीक क्षेत्रीय वर्गीकरण साक्ष्य-आधारित आर्थिक नियोजन एवं न्यायसंगत संसाधन वितरण का मूलभूत आधार है।
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