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Economic Survey and Budget — UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

Economy · UPSC CSE
प्रश्न: आर्थिक सर्वेक्षण एक नीति-दस्तावेज़ के रूप में — महत्त्व, प्रमुख विषय-वस्तु और भारत के आर्थिक शासन को आकार देने में इसकी भूमिका

प्रस्तावना

आर्थिक सर्वेक्षण प्रतिवर्ष Union Budget से पूर्व प्रस्तुत किया जाता है और यह अर्थव्यवस्था के सरकारी निदान का आधिकारिक दस्तावेज़ है — जो आगामी वर्ष की राजकोषीय प्राथमिकताओं एवं संरचनात्मक सुधारों हेतु विश्लेषणात्मक रूपरेखा निर्धारित करता है।

मुख्य बिंदु

1. नीति-दिशा-निर्देशक के रूप में भूमिका

आर्थिक सर्वेक्षण Chief Economic Adviser के कार्यालय द्वारा तैयार किया जाता है और यह समष्टि-आर्थिक परिस्थितियों का साक्ष्य-आधारित मूल्यांकन प्रस्तुत करता है। यह विकास के चालकों, क्षेत्रीय अवरोधों तथा सुधार की अनिवार्यताओं को चिह्नित करते हुए बजट-निर्माण एवं विधायी प्राथमिकताओं के लिए एक विश्वसनीय आधार-रेखा प्रदान करता है।

2. विकास अनुमान और समष्टि-आर्थिक स्थिरता

हालिया सर्वेक्षणों ने वैश्विक प्रतिकूलताओं के बीच भारत की सुदृढ़ता को निरंतर रेखांकित किया है तथा GDP वृद्धि 6.5–7% के दायरे में अनुमानित की है, जो भारत को प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सर्वाधिक तीव्र गति से बढ़ने वाले देशों में स्थापित करती है। ये अनुमान घरेलू उपभोग, पूंजीगत व्यय की गति और मुद्रास्फीति में शिथिलता को ध्यान में रखकर तैयार किए जाते हैं।

3. संरचनात्मक विषय-वस्तु — जलवायु और कृषि

हालिया सर्वेक्षणों में जलवायु परिवर्तन एक पुनरावर्ती चिंता के रूप में उभरा है, विशेषतः अनियमित मानसून और चरम मौसमी घटनाओं के माध्यम से कृषि उत्पादकता पर इसके प्रभाव के संदर्भ में। सर्वेक्षण सामान्यतः फसल-विविधीकरण, सिंचाई दक्षता और जलवायु-सहिष्णु बीज प्रौद्योगिकी जैसी अनुकूलन रणनीतियों की अनुशंसा करता है।

4. दीर्घकालिक दृष्टि और Amrit Kaal

Amrit Kaal की अवधारणा — 2047 तक भारत की विकास-यात्रा — समावेशी विकास, अवसंरचना-विस्तार और विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता के इर्द-गिर्द मध्यकालिक नीति-लक्ष्यों को परिभाषित करती है। सर्वेक्षण वार्षिक प्रदर्शन को इस दीर्घकालिक क्षितिज के संदर्भ में प्रस्तुत करता है ताकि अल्पकालिक राजकोषीय निर्णय संरचनात्मक रूपांतरण के अनुरूप बने रहें।

निष्कर्ष

आर्थिक सर्वेक्षण का मूल्य केवल पूर्वानुमान में नहीं, अपितु ईमानदार निदान में निहित है। जलवायु अनुकूलन और रोज़गार जैसे क्षेत्रों में इसकी अनुशंसाओं एवं क्रियान्वयन के मध्य की कड़ी को सुदृढ़ करने से इसकी व्यावहारिक शासन-उपयोगिता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

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