भारतीय रिज़र्व बैंक का Financial Inclusion Index (FI-Index) देश में वित्तीय समावेशन की गहराई और व्यापकता का एक समग्र, बहुआयामी माप प्रस्तुत करता है, जो नीति-निर्माण हेतु एक महत्त्वपूर्ण निदान उपकरण के रूप में कार्य करता है।
FI-Index तीन व्यापक उप-सूचकांकों पर आधारित है: Access, Usage और Quality। Access औपचारिक वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता को दर्शाता है; Usage बैंकिंग, ऋण, बीमा और निवेश उत्पादों के वास्तविक उपयोग को मापता है; तथा Quality सेवा-प्रदायगी में ग्राहक-केंद्रितता, वित्तीय साक्षरता और उपभोक्ता संरक्षण के आयामों को प्रतिबिंबित करता है।
समावेशन को तीन आयामों में विभाजित करने से नीति-निर्माता आपूर्ति-पक्ष की कमियों (Access) और मांग-पक्ष की बाधाओं (Usage एवं Quality) के बीच अंतर कर सकते हैं। यह सूक्ष्मता Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana जैसे हस्तक्षेपों को लक्षित करने में सहायक रही है, जबकि Direct Benefit Transfers और सूक्ष्म-ऋण संबद्धता के माध्यम से उपयोग को गहरा करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
RBI इस सूचकांक को बिना किसी आधार वर्ष के वार्षिक रूप से प्रकाशित करता है, जिससे दीर्घकालिक प्रवृत्ति-विश्लेषण संभव होता है। यह नियामकों, राज्य सरकारों और वित्तीय संस्थाओं के लिए प्रगति को मानकीकृत करने तथा नियामकीय प्राथमिकताओं को जमीनी वास्तविकताओं के अनुरूप संरेखित करने का एक जवाबदेही तंत्र है।
Access मापदंडों में सुधार के बावजूद, Quality उप-सूचकांक पिछड़ा हुआ है, जो वित्तीय साक्षरता, शिकायत निवारण और निम्न-आय परिवारों के लिए उत्पादों की उपयुक्तता में बनी हुई कमियों को दर्शाता है। इस अंतराल को पाटने के लिए नियामकों, fintech मध्यस्थों और नागरिक समाज के बीच समन्वित कार्रवाई आवश्यक है।
कोई भी समग्र सूचकांक उतना ही प्रभावी होता है, जितनी प्रभावी उससे उत्पन्न नीतिगत प्रतिक्रियाएँ होती हैं। FI-Index में स्थायी सुधार के लिए खाता-खोलने के मापदंडों से आगे बढ़कर प्रत्येक परिवार की गुणवत्तापूर्ण एवं सार्थक वित्तीय भागीदारी सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
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