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Government Budget / Types of Deficits — UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

Economy · UPSC CSE
प्रश्न: भारत में बजट घाटे के प्रकार — प्राथमिक घाटा, राजस्व घाटा, राजकोषीय घाटा और प्रभावी राजस्व घाटा: अवधारणाएँ, परस्पर संबंध और राजकोषीय प्रशासन के निहितार्थ

प्रस्तावना

बजट घाटे एकरूप नहीं होते; राजकोषीय, राजस्व, प्राथमिक और प्रभावी राजस्व — प्रत्येक प्रकार सरकारी वित्त के एक विशिष्ट आयाम को प्रकट करता है, जो नीति-निर्माताओं को संरचनात्मक असंतुलन के निदान और सुधारात्मक उपायों के निर्धारण में सहायता करता है।

मुख्य बिंदु

1. प्राथमिक घाटा और ऋण स्थिरता

प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान। शून्य प्राथमिक घाटा यह संकेत देता है कि वर्तमान उधारी केवल पूर्व ऋण की सेवा हेतु है, नए व्यय के वित्तपोषण हेतु नहीं। यह एक महत्त्वपूर्ण सीमा-संकेतक है — इसे प्राप्त करने का अर्थ है कि सरकार ने वास्तविक अर्थों में नई ऋण-संचय प्रक्रिया को रोक दिया है, यद्यपि उच्च ब्याज भार के कारण ऋण-स्टॉक अस्थिर बना रह सकता है।

2. राजस्व घाटा और उसके राजकोषीय परिणाम

राजस्व घाटा तब उत्पन्न होता है जब राजस्व व्यय, राजस्व प्राप्तियों से अधिक हो जाता है। इस अंतर को उधारी से पूरा करने पर राजकोषीय घाटा सीधे बढ़ता है, क्योंकि उधारी एक पूंजीगत प्राप्ति है जिसे चालू उपभोग अंतराल की पूर्ति में लगाया जाता है। ऐसी उधारी पूंजीगत व्यय में परिवर्तित नहीं होती — यह केवल उपभोग व्यय को बनाए रखती है, जिससे कोई उत्पादक परिसंपत्ति सृजित नहीं होती और विकासात्मक निवेश बाधित होता है।

3. प्रभावी राजस्व घाटा — एक परिष्कृत मापक

Effective Revenue Deficit (ERD) को भारतीय बजट प्रक्रिया में विश्लेषणात्मक स्पष्टता बढ़ाने हेतु प्रस्तुत किया गया। इसमें राजस्व घाटे से उन अनुदानों को घटाया जाता है जो राज्यों एवं अन्य संस्थाओं को पूंजीगत परिसंपत्ति-निर्माण हेतु हस्तांतरित किए जाते हैं। तर्क यह है कि ऐसे अनुदान, यद्यपि केंद्रीय बजट में राजस्व व्यय के रूप में वर्गीकृत हैं, उप-राष्ट्रीय स्तर पर स्थायी परिसंपत्तियाँ सृजित करते हैं और इन्हें शुद्ध उपभोग व्यय नहीं माना जाना चाहिए।

4. घाटे के विभाजन की नीतिगत प्रासंगिकता

FRBM ढाँचा इन घाटा श्रेणियों पर लक्ष्य निर्धारित कर राजकोषीय अनुशासन सुनिश्चित करता है। घाटों का विभाजन प्रशासकों को यह पहचानने में सहायता करता है कि राजकोषीय दबाव संरचनात्मक राजस्व कमी, ब्याज भुगतान भार अथवा अपर्याप्त पूंजी-निर्माण से उत्पन्न हो रहा है — जिनमें से प्रत्येक के लिए भिन्न सुधारात्मक साधन अपेक्षित होते हैं।

निष्कर्ष

तीनों कथन सही हैं। प्रभावी राजकोषीय प्रबंधन के लिए कुल घाटे के आँकड़ों से आगे बढ़कर उनकी संरचना को समझना आवश्यक है — तभी नीतिगत प्रतिक्रियाएँ राजकोषीय असंतुलन के लक्षणों के बजाय मूल कारणों का समाधान कर सकती हैं।

शब्द गणना: 349

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Suppose the revenue expenditure is ₹80,000 crores and the revenue receipts of the Government are ₹60,000 crores. The Government budget also shows borrowings of ₹10,000 crores and interest payments of ₹6,000 crores. Which of the following statements are correct? I. Revenue deficit is ₹20,000 crores. II. Fiscal deficit is ₹10,000 crores. III. Primary deficit is ₹4,000 crores. Select the correct answer using the code given below.
PYQ
Consider the following data for a government budget: • Revenue Receipts: ₹50,000 crores • Capital Receipts (non-debt): ₹10,000 crores • Revenue Expenditure: ₹65,000 crores • Capital Expenditure: ₹20,000 crores • Borrowings: ₹25,000 crores Which of the following statements is/are correct? I. Revenue Deficit = ₹15,000 crores II. Fiscal Deficit = ₹25,000 crores III. Budget Deficit = ₹40,000 crores
PYQ
Consider a budget where Revenue Deficit is ₹30,000 crores and Fiscal Deficit is ₹50,000 crores. What does the difference of ₹20,000 crores represent?
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Given: Revenue Expenditure = ₹12,00,000 crores; Revenue Receipts = ₹9,50,000 crores; Interest Payments = ₹2,00,000 crores; Total Borrowings = ₹4,00,000 crores. Which of the following is correct?
PYQ
Under the Medium Term Fiscal Policy Statement mandated by the FRBM Act, the Central Government is required to set rolling targets for which of the following? 1. Revenue Deficit as a percentage of GDP 2. Fiscal Deficit as a percentage of GDP 3. Total outstanding liabilities as a percentage of GDP Select the correct answer:

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