भारत की Production Linked Incentive Scheme निवेश-आधारित अनुदानों से हटकर उत्पादन-संबद्ध पुरस्कारों की दिशा में एक संरचनात्मक परिवर्तन है, जो निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता और आयात प्रतिस्थापन — दोनों लक्ष्यों को एक साथ साधती है।
PLI Scheme को मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरण, ऑटोमोबाइल, वस्त्र, खाद्य प्रसंस्करण और advanced chemistry cell batteries सहित चौदह प्रमुख क्षेत्रों में विस्तारित किया गया। यह व्यापक охват संपूर्ण औद्योगिक मूल्य श्रृंखला में घरेलू क्षमता निर्मित करने की सुविचारित रणनीति को दर्शाता है।
इस योजना की मूल विशेषता यह है कि प्रोत्साहन राशि एक निर्धारित आधार वर्ष के सापेक्ष वृद्धिशील बिक्री से जोड़ी गई है। इससे केवल क्षमता-निर्माण के बजाय वास्तविक उत्पादन वृद्धि को पुरस्कृत किया जाता है, जो इसे पारंपरिक पूंजी अनुदानों की तुलना में अधिक राजकोषीय दक्षता प्रदान करता है।
PLI का स्पष्ट लक्ष्य ऐसे घरेलू विनिर्माताओं को तैयार करना है जो अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकृत हो सकें। active pharmaceutical ingredients और semiconductors जैसे क्षेत्रों में आयात निर्भरता घटाकर यह योजना आर्थिक सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता — दोनों की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।
विभिन्न क्षेत्रों में असमान भागीदारी, अनुपालन सत्यापन के कारण संवितरण में विलंब और MSMEs की सीमित सहभागिता प्रमुख चिंताएँ हैं। प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अनुमोदन प्रक्रियाओं का सरलीकरण तथा लॉजिस्टिक्स, कौशल विकास और विनियामक सुधार में पूरक निवेश आवश्यक है।
PLI की उत्पादन-संबद्ध संरचना सैद्धांतिक दृष्टि से सुदृढ़ है, किंतु इसकी रूपांतरकारी क्षमता प्रक्रियागत बाधाओं के निराकरण और यह सुनिश्चित करने पर निर्भर करती है कि प्रोत्साहन का लाभ केवल बड़े निगमों तक सीमित न रहकर व्यापक विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त करे।
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