IBRD, World Bank Group की सबसे पुरानी शाखा है, जिसकी स्थापना 1944 में Bretton Woods सम्मेलन में मुख्यतः यूरोप के युद्धोत्तर पुनर्निर्माण हेतु की गई थी। कालांतर में यह मध्य-आय वर्ग के देशों के लिए एक केंद्रीय विकास वित्त संस्था के रूप में विकसित हुई।
IBRD मुख्यतः उन मध्य-आय और निम्न-आय वाले देशों को ऋण, गारंटी तथा जोखिम-प्रबंधन उत्पाद प्रदान करता है जिनमें पुनर्भुगतान की क्षमता होती है। IDA जैसी रियायती खिड़कियों के विपरीत, IBRD बाज़ार-दर के निकट ऋण देता है, जिससे वैश्विक बॉन्ड बाज़ारों से पूँजी जुटाकर उसे विकास परियोजनाओं में पुनर्निवेशित किया जाता है।
1944 के Bretton Woods ढाँचे के अंतर्गत स्थापित IBRD का मूल उद्देश्य युद्ध-विध्वस्त यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं का पुनर्निर्माण वित्तपोषित करना था। इसके प्रथम ऋण France एवं अन्य यूरोपीय देशों को दिए गए। यूरोप के पुनरुद्धार के पश्चात् यह संस्था विकासशील देशों के अवसंरचना, शासन एवं निर्धनता-उन्मूलन की ओर उन्मुख हो गई।
IBRD स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं करता; यह World Bank Group के अंतर्गत IDA, IFC, MIGA और ICSID के साथ समन्वित रूप से संचालित होता है। यह क्षेत्रीय विकास बैंकों, UN एजेंसियों, द्विपक्षीय दाताओं तथा प्राप्तकर्ता सरकारों के साथ भी समन्वय करता है, जो एकपक्षीय दृष्टिकोण के स्थान पर साझेदारी-आधारित मॉडल को प्रतिबिंबित करता है।
वर्तमान में IBRD जलवायु अनुकूलन, डिजिटल अवसंरचना, स्वास्थ्य प्रणालियों और मानव पूँजी जैसे क्षेत्रों में वित्तपोषण के माध्यम से Sustainable Development Goals की प्राप्ति में सहयोग करता है। वित्तपोषण के साथ-साथ तकनीकी सहायता और नीति-संवाद का समन्वय इसे विशुद्ध वाणिज्यिक ऋणदाताओं से पृथक करता है।
युद्धोत्तर पुनर्निर्माण वित्तपोषक से सहयोगात्मक विकास संस्था तक IBRD का रूपांतरण अनुकूलनशील बहुपक्षवाद की आवश्यकता को रेखांकित करता है। न्यायसंगत वैश्विक विकास परिणामों के लिए इसके पूँजी आधार को सुदृढ़ करना और शासन प्रतिनिधित्व में सुधार करना अनिवार्य है।
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