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Science and Technology — UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

Economy · UPSC CSE
प्रश्न: भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था — संस्थागत ढाँचा, नीति उदारीकरण, और सार्वजनिक व निजी अभिकर्ताओं की विकसित होती भूमिका

प्रस्तावना

भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था, जो वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक तीव्र गति से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में गिनी जाती है, नीतिगत सुधारों के माध्यम से एक संरचनात्मक रूपांतरण से गुज़र रही है — जिसमें सरकारी एजेंसियों, निजी क्षेत्र और नियामक निकायों की भूमिकाएँ नए सिरे से परिभाषित हो रही हैं।

मुख्य बिंदु

1. IN-SPACe: एकल-खिड़की नियामक के रूप में

IN-SPACe (Indian National Space Promotion and Authorisation Centre) की स्थापना अंतरिक्ष गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्राधिकृत करने, प्रोत्साहित करने और मार्गदर्शन देने हेतु एकल-खिड़की नोडल एजेंसी के रूप में की गई। यह आवेदनों का मूल्यांकन, अनुमतियाँ प्रदान करने और राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों का अनुपालन सुनिश्चित करने का कार्य करती है, जिससे वह नौकरशाही विखंडन समाप्त होता है जो पूर्व में निजी निवेश को हतोत्साहित करता था।

2. Geospatial Data Policy 2021 — उदारीकरण की दिशा में निर्णायक कदम

Geospatial Data Policy 2021 ने भारतीय संस्थाओं द्वारा भू-स्थानिक डेटा के अधिग्रहण, उत्पादन और प्रसार के लिए पूर्व सरकारी अनुमोदन की अनिवार्यता समाप्त कर एक निर्णायक बदलाव किया। इससे दशकों पुरानी प्रतिबंधात्मक लाइसेंसिंग व्यवस्था का अंत हुआ, स्टार्टअप, शोधकर्ता और व्यवसाय मानचित्र व स्थानिक डेटा का स्वतंत्र उपयोग कर सकते हैं, तथा स्थान-आधारित सेवाओं और परिशुद्ध कृषि में वृद्धि को गति मिली है।

3. Space Policy 2023 के अंतर्गत ISRO का पुनर्परिभाषित अधिदेश

Indian Space Policy 2023 ISRO को परिचालन से पूर्णतः हटाने के बजाय उसे अत्याधुनिक अनुसंधान, विकास और प्रौद्योगिकी प्रदर्शन पर केंद्रित करती है। परिचालन एवं वाणिज्यिक मिशन क्रमशः NewSpace India Limited (NSIL) और निजी संस्थाओं को हस्तांतरित किए जा रहे हैं, किंतु ISRO एक संरक्षक और रणनीतिक भूमिका में बना रहता है।

4. शासन की कमियाँ और कार्यान्वयन की चुनौतियाँ

प्रगतिशील सुधारों के बावजूद कुछ रिक्तियाँ बनी हुई हैं: एक समर्पित Space Activities Act अभी भी लंबित है, निजी प्रक्षेपणों के लिए दायित्व ढाँचा अविकसित है, और वैश्विक निकायों के साथ स्पेक्ट्रम समन्वय हेतु सुदृढ़ संस्थागत क्षमता की आवश्यकता है। इन रिक्तियों को पाटना भारत के वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में लक्षित हिस्सेदारी प्राप्त करने के लिए अनिवार्य है।

निष्कर्ष

भारत की अंतरिक्ष नीति संरचना राज्य-एकाधिकार मॉडल से विनियमित, प्रतिस्पर्धी पारिस्थितिकी तंत्र की ओर अग्रसर है। इस गति को बनाए रखने के लिए व्यापक अंतरिक्ष विधान का अधिनियमन और IN-SPACe की प्रचार-भूमिका के साथ-साथ उसकी वास्तविक नियामक क्षमता का विकास सुनिश्चित करना आवश्यक है।

शब्द गणना: 335

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