UNESCO की Intangible Cultural Heritage सूची एक वैश्विक साधन है जो जीवंत परंपराओं — प्रदर्शन कलाओं, अनुष्ठानों, शिल्पकला और मौखिक अभिव्यक्तियों — को मान्यता देती है, जो पीढ़ियों में सामुदायिक पहचान और निरंतरता को परिभाषित करती हैं।
2003 के UNESCO Convention for the Safeguarding of Intangible Cultural Heritage ने ICH को मूर्त स्मारकों से पृथक करने वाला एक ढाँचा स्थापित किया। इसमें मौखिक परंपराएँ, प्रदर्शन कलाएँ, सामाजिक प्रथाएँ, अनुष्ठान, उत्सव, प्रकृति-संबंधी ज्ञान और पारंपरिक शिल्पकला सम्मिलित हैं। भारत ने इस अभिसमय की पुष्टि कर जीवंत विरासत तत्वों के व्यवस्थित नामांकन को सक्षम बनाया।
भारत ने Yoga, Kumbh Mela, Vedic chanting, Nawrouz और Durga Puja को Representative List में अभिलिखित कराया है। Garba of Gujarat को 2023 में सूचीबद्ध किया गया, जो भारत की जीवंत सांस्कृतिक विविधता को प्रतिबिंबित करता है। प्रत्येक अभिलेखन हेतु सामुदायिक भागीदारी और विद्यमान संरक्षण उपायों को प्रदर्शित करने वाला विस्तृत nomination dossier अनिवार्य होता है।
संस्कृति मंत्रालय, Sangeet Natak Akademi और Centre for Cultural Resources and Training जैसे निकायों के माध्यम से अमूर्त विरासत के प्रलेखन और संप्रेषण को समर्थन देता है। मास्टर कलाकारों को फेलोशिप तथा सांस्कृतिक संगठनों को अनुदान प्रदान करने वाली योजनाएँ घरेलू संरक्षण प्रयासों की परिचालन आधारशिला हैं।
नगरीकरण, प्रवासन और व्यावसायीकरण अमूर्त विरासत के सामुदायिक संप्रेषण को क्षीण करते हैं। अभिलेखन विरोधाभासी रूप से अति-पर्यटन और संदर्भ-विच्छेद को प्रेरित कर सकता है, जिससे जीवंत प्रथाएँ मात्र दृश्य-प्रदर्शन बनकर रह जाती हैं। प्रामाणिकता और अनुकूली विकास के मध्य संतुलन बनाना एक स्थायी शासन-चुनौती है, जिसके लिए राज्य-केंद्रित के बजाय समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोण अपेक्षित है।
UNESCO का अभिलेखन दृश्यता प्रदान करता है, किंतु स्वयं में संरक्षण नहीं। स्थायी सुरक्षा के लिए अंतर-पीढ़ीगत संप्रेषण, सामुदायिक स्वामित्व और ऐसे नीतिगत ढाँचों में निरंतर निवेश आवश्यक है जो जीवंत विरासत को स्थिर नहीं, बल्कि गतिशील मानें।
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