Sarkari RiseLogin

Freedom Movement — UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

History · UPSC CSE
प्रश्न: Poona Pact 1932 — दलित राजनीतिक प्रतिनिधित्व के संदर्भ में इसका महत्व, शर्तें और विवादास्पद विरासत

प्रस्तावना

Poona Pact 1932 औपनिवेशिक-विरोधी राष्ट्रवाद और दलित मुक्ति के मध्य एक निर्णायक बिंदु है, जो स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बहुसंख्यकवादी एकता और अल्पसंख्यक राजनीतिक सुरक्षा के मूलभूत तनाव को प्रतिबिंबित करता है।

मुख्य बिंदु

1. पृष्ठभूमि एवं परिस्थितियाँ

यह समझौता तब उभरा जब ब्रिटिश सरकार के Communal Award ने दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्रों का प्रस्ताव रखा, जिसका Gandhi ने Yeravda Jail में आमरण अनशन के माध्यम से विरोध किया। Gandhi और B.R. Ambedkar के मध्य हुई वार्ता ने एक समझौते को जन्म दिया, जिसने Gandhi के प्राण तो बचाए, किंतु दलित राजनीतिक प्रतिनिधित्व के स्वरूप को मूलतः परिवर्तित कर दिया।

2. समझौते की मूल शर्तें

Pact ने पृथक निर्वाचन क्षेत्रों के स्थान पर संयुक्त हिंदू निर्वाचन क्षेत्र के भीतर आरक्षित सीटों की व्यवस्था की, अर्थात दलित उम्मीदवारों का चुनाव केवल दलित मतदाताओं के बजाय व्यापक निर्वाचक मंडल द्वारा होना था। Communal Award की तुलना में आरक्षित सीटों की संख्या उल्लेखनीय रूप से बढ़ाई गई, जिसे पृथक निर्वाचन के सिद्धांत के त्याग की क्षतिपूर्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया।

3. Ambedkar की आलोचना और उसकी प्रासंगिकता

Ambedkar का निरंतर यह तर्क रहा कि संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र के भीतर आरक्षित सीटें दलित राजनीतिक स्वायत्तता को क्षीण करती हैं, क्योंकि उम्मीदवार चुनाव के लिए उच्च जातियों के मतों पर निर्भर रहते हैं। उन्होंने इस Pact को एक दबावपूर्ण समझौता माना, जिसने सीटों की संख्यात्मक वृद्धि के लिए दलित आत्मनिर्णय का बलिदान किया — यह मत उन्होंने अपने परवर्ती लेखन में विस्तार से प्रतिपादित किया।

4. शासन-व्यवस्था पर प्रभाव

Pact का ढाँचा — संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र के भीतर आरक्षण — स्वतंत्र भारत के संविधान में अनुसूचित जाति प्रतिनिधित्व का आधारभूत मॉडल बना। इस प्रकार इसकी विवादास्पद शर्तें स्वातंत्र्योत्तर सकारात्मक कार्रवाई की संरचना के लिए संरचनात्मक दृष्टि से निर्णायक सिद्ध हुईं।

निष्कर्ष

Poona Pact ने एक तात्कालिक राजनीतिक संकट का समाधान किया, किंतु एक अनसुलझा अंतर्विरोध भी स्थापित किया: स्वायत्त राजनीतिक स्वर के बिना संख्यात्मक प्रतिनिधित्व। इसकी विरासत आज भी वास्तविक सामाजिक सशक्तिकरण के साधन के रूप में आरक्षण की पर्याप्तता पर होने वाली बहसों को दिशा देती है।

शब्द गणना: 315

AI से अपना उत्तर मूल्यांकन कराएँ

GS Answer Coach आपके उत्तर को Introduction, Body, Conclusion के आधार पर परखता है — 30 सेकंड में।

GS Answer Coach खोलेंइस topic के प्रश्न अभ्यास →

इसी topic के PYQ

PYQ 2020
With reference to the book "Desher Katha" written by Sakharam Ganesh Deuskar during the freedom struggle, consider the following statements: 1. It warned against the Colonial State's hypnotic conquest of the mind. 2. It inspired the performance of swadeshi street plays and folk songs. 3. The use of 'desh' by Deuskar was in the specific context of the region of Bengal. Which of the statements given above are correct?
PYQ 2020
The Vital-Vidhvansak, the first monthly journal to have the untouchable people as its target audience was published by
PYQ 2020
With reference to the book 'Desher Katha' written by Sakharam Ganesh Deuskar during the freedom struggle, consider the following statements: 1. It warned against the Colonial State's hypnotic conquest of the mind. 2. It inspired the performance of swadeshi street plays and folk songs. 3. The use of 'desh' by Deuskar was in the specific context of the region of Bengal. Which of the statements given above are correct?
PYQ
Which of the following events during the Indian Freedom Movement led to the suspension of the Non-Cooperation Movement in 1922?
PYQ
The 'August Offer' of 1940, made by Viceroy Lord Linlithgow, promised which of the following to Indians?

और History के मॉडल उत्तर

Ahom Dynasty / UNESCO World Heritage / Moidams
Ancient History / Indus Valley Civilization
Ancient India
Ancient India / Buddhism
Ancient India / Buddhism and Cultural Contacts
Ancient India / Gupta Empire

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए दैनिक AI कोच

Essay Coach · GS Answer Coach · Cutoff Planner · 500+ Mains PYQs — साइन अप मुफ्त।

मुफ्त साइन अपUPSC Pro देखें